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उन्नत रेशम उत्पादन में आगे जम्मू-कश्मीर
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:09 AM IST
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जम्मू। सैकड़ों वर्षों से उन्नत गुणवत्ता का रेशम जम्मू कश्मीर रियासत की शान रहा है। आज भी यह एक महत्वपूर्ण कृषि आधारित लघु उद्योग है, जो हजारों भूमिहीन और सीमांत किसानों को आजीविका मुहैया करवाता है। रियासत का पर्यावरण इसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बाईवोल्टाइन सिल्क पैदा करने के लिए अनुकूल प्राकृतिक माहौल देता है, जिसकी बदौलत यह दुनिया में सबसे बेहतर बाईवोल्टाइन सिल्क पैदा करता है। सेरीकल्चर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान समय में जम्मू कश्मीर में औसत बाईवोल्टाइन सिल्क उत्पादन 1000 मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। इसके साथ ही इसने देश के उत्तर पश्चिमी राज्यों को इस क्षेत्र में काफी पीछे कर दिया है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस समय सेरीकल्चर विभाग रियासत में करीब 30 हजार किसानों को कोकून उत्पादन के अतिरिक्त व्यवसाय से आजीविका मुहैया करवा रहा है। खास बात यह है कि इन किसानों में ज्यादातर संख्या भूमिहीन और सीमांत किसानों की है, जिनके पास आजीविका के बहुत सीमित या न के बराबर साधन होते हैं। यह बात भी काबिलेगौर है कि उत्तर पश्चिमी राज्य पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भले ही आर्थिक तौर पर ज्यादा मजबूत हों, लेकिन दुनिया के सबसे अच्छे रेशम के उत्पादन में वे जम्मू कश्मीर के सामने कहीं नहीं ठहरते हैं। सेरीकल्चर विभाग इस समय हर साल औसतन 1000 मीट्रिक टन कोकून पैदा करता है, जो इन उत्तर पश्चिमी राज्यों के कुल उत्पादन से भी कई गुना ज्यादा है।
जानकारी के मुताबिक इस समय भारत में जितना कच्चा रेशम पैदा होता है, उसमें बाईवोल्टाइन सिल्क महज 9 प्रतिशत है। बाकी 91 प्रतिशत मल्टीवोल्टाइन सिल्क होता है, जिसकी गुणवत्ता बाईवोल्टाइन सिल्क के मुकाबले काफी कमजोर होती है। जम्मू कश्मीर का बाईवोल्टाइन सिल्क अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है। रेशम उत्पादन से जुड़े जानकारों की मानें तो यदि सरकार इस सेक्टर के विकास पर अपना ध्यान बढ़ा दे, तो 1000 मीट्रिक टन औसत उत्पादन को बढ़ाकर 2000 मीट्रिक टन पर ले जाया जा सकता है।
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पांच प्रजातियों में बाईवोल्टाइन सबसे बेहतर
दुनिया में पांच तरह के रेशम के रेशम का व्यापार सबसे ज्यादा किया जाता है। बाईवोल्टाइन, क्रास ब्रीड, तसार, इरिस्पून और मुगा। इनमें बाईवोल्टाइन सिल्क सबसे अच्छा होता है। मुगलकाल से यह सिल्क कश्मीर की शान रहा है। जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पैदा होने वाला सारा सिल्क बाईवोल्टाइन ही है। इसकी गुणवत्ता दुनिया में सबसे बेहतर होती है, इसीलिए इसने सदियों तक दुनिया के बाजार में अपनी धमक बनाकर रखी।
उत्तर पश्चिमी राज्यों में कोकून उत्पादन में रियासत की स्थिति
राज्य कोकून उत्पादन (मीट्रिक टन में) कच्चा रेशम उत्पादन (मीट्रिक टन में)
जम्मू-कश्मीर 1000 116
हिमाचल प्रदेश 184 23
उत्तराखंड 130 17
पंजाब 32 4
हरियाणा 1.44 0.18
स्रोत: जम्मू-कश्मीर सेरीकल्चर विभाग
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विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस समय सेरीकल्चर विभाग रियासत में करीब 30 हजार किसानों को कोकून उत्पादन के अतिरिक्त व्यवसाय से आजीविका मुहैया करवा रहा है। खास बात यह है कि इन किसानों में ज्यादातर संख्या भूमिहीन और सीमांत किसानों की है, जिनके पास आजीविका के बहुत सीमित या न के बराबर साधन होते हैं। यह बात भी काबिलेगौर है कि उत्तर पश्चिमी राज्य पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भले ही आर्थिक तौर पर ज्यादा मजबूत हों, लेकिन दुनिया के सबसे अच्छे रेशम के उत्पादन में वे जम्मू कश्मीर के सामने कहीं नहीं ठहरते हैं। सेरीकल्चर विभाग इस समय हर साल औसतन 1000 मीट्रिक टन कोकून पैदा करता है, जो इन उत्तर पश्चिमी राज्यों के कुल उत्पादन से भी कई गुना ज्यादा है।
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जानकारी के मुताबिक इस समय भारत में जितना कच्चा रेशम पैदा होता है, उसमें बाईवोल्टाइन सिल्क महज 9 प्रतिशत है। बाकी 91 प्रतिशत मल्टीवोल्टाइन सिल्क होता है, जिसकी गुणवत्ता बाईवोल्टाइन सिल्क के मुकाबले काफी कमजोर होती है। जम्मू कश्मीर का बाईवोल्टाइन सिल्क अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है। रेशम उत्पादन से जुड़े जानकारों की मानें तो यदि सरकार इस सेक्टर के विकास पर अपना ध्यान बढ़ा दे, तो 1000 मीट्रिक टन औसत उत्पादन को बढ़ाकर 2000 मीट्रिक टन पर ले जाया जा सकता है।
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पांच प्रजातियों में बाईवोल्टाइन सबसे बेहतर
दुनिया में पांच तरह के रेशम के रेशम का व्यापार सबसे ज्यादा किया जाता है। बाईवोल्टाइन, क्रास ब्रीड, तसार, इरिस्पून और मुगा। इनमें बाईवोल्टाइन सिल्क सबसे अच्छा होता है। मुगलकाल से यह सिल्क कश्मीर की शान रहा है। जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पैदा होने वाला सारा सिल्क बाईवोल्टाइन ही है। इसकी गुणवत्ता दुनिया में सबसे बेहतर होती है, इसीलिए इसने सदियों तक दुनिया के बाजार में अपनी धमक बनाकर रखी।
उत्तर पश्चिमी राज्यों में कोकून उत्पादन में रियासत की स्थिति
राज्य कोकून उत्पादन (मीट्रिक टन में) कच्चा रेशम उत्पादन (मीट्रिक टन में)
जम्मू-कश्मीर 1000 116
हिमाचल प्रदेश 184 23
उत्तराखंड 130 17
पंजाब 32 4
हरियाणा 1.44 0.18
स्रोत: जम्मू-कश्मीर सेरीकल्चर विभाग