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7वें वेतन आयोग से JK सरकार की जेब से जाएंगे 5000 करोड़
Updated Sun, 22 Nov 2015 10:12 AM IST
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जम्मू-कश्मीर में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अगर लागू किया गया तो करीब 5000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ रियासती बजट पर पड़ेगा।
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें मिलने के बाद अगर केंद्र सरकार अगले साल 2016 में इसे लागू करती है तो फिर रियासती सरकार पर भी इसे लागू करने का दबाव पड़ेगा।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सातवें वेतन आयोग की ओर से केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के बाद से रियासती सरकार भी गुणा-भाग में जुटी हुई है।
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मौजूदा समय में रियासत में करीब साढ़े चार लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अलावा एक लाख से ज्यादा पेंशनर भी हैं। जानकारी के अनुसार वर्तमान में रियासत सरकार सरकारी मुलाजिमों के वेतन और पेंशनरों को दी जाने पेंशन पर करीब 18 हजार 450 करोड़ के करीब सालाना खर्च कर रही है।
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जम्मू कश्मीर में कैसे लागू हो सातवें वेतन आयोग
ऐसे में अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया तो फिर 5000 करोड़ के करीब और बोझ रियासती बजट पर पड़ेगा।
नेशनल मजदूर कांफ्रेंस के प्रधान सुभाष शास्त्री का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की ओर से अपनी सिफारिशों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे जाने के बाद अगर केंद्र जनवरी 2016 से इसे लागू करता है तो फिर जम्मू-कश्मीर सरकार को भी इसे लागू करना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारी संगठनों के पास आंदोलन के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं रह जाएगा।
कर्मचारी साढ़े चार लाख
पेंशनर एक लाख से ज्यादा
सालाना खर्च 18 हजार 450 करोड़
नेशनल मजदूर कांफ्रेंस के प्रधान सुभाष शास्त्री का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की ओर से अपनी सिफारिशों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे जाने के बाद अगर केंद्र जनवरी 2016 से इसे लागू करता है तो फिर जम्मू-कश्मीर सरकार को भी इसे लागू करना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारी संगठनों के पास आंदोलन के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं रह जाएगा।
कर्मचारी साढ़े चार लाख
पेंशनर एक लाख से ज्यादा
सालाना खर्च 18 हजार 450 करोड़