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केंद्र के दबाव से घबराकर एक होने लगे अलगाववादी

Thu, 10 Sep 2015 12:15 PM IST
Updated Thu, 10 Sep 2015 12:15 PM IST
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3 kashmiri separatist leaders join Geelani's Hurriyat

दिल्ली में एनएसए स्तर की वार्ता से पहले पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से हुर्रियत नेताओं के मिलने पर रोक के बाद घाटी में हालात बदले हैं। केंद्र के दबाव से हुर्रियत अलग-थलग पड़ गई है।

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तीन अलगाववादी नेताओं ने बुधवार को हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी का दामन थाम लिया है। फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर साह, नेशनल फ्रंट के नईम खान और आगा सईद हसन भी गिलानी के साथ आ गए हैं। गिलानी के हैदरपोरा आवास पर उन्होंने हुर्रियत ज्वाइन किया।
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तीनों अलगाववादी नेताओं का स्वागत करते हुए गिलानी ने कहा कि उनके दरवाजे हर किसी के लिए खुले हुए हैं। जो कोई भी उनके साथ आना चाहे वैचारिक लड़ाई में सबका स्वागत है।
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अलगाववादी गुटों को एक करने की कवायद शुरू

3 kashmiri separatist leaders join Geelani's Hurriyat

अब एक बार फिर सभी अलगाववादी गुटों को एक करने की कवायद शुरू कर दी गई है। गिलानी, मीरवाइज, यासीन मलिक सहित सभी अलगाववादियों को एक मंच पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

यह सारी कवायद मोदी सरकार के  बदले रुख तथा जम्हूरियत के प्रति कश्मीरियों में बढ़ रहे विश्वास की घबराहट का नतीजा बताया जा रहा है। सूत्रों के  अनुसार केंद्र के  दबाव के बाद अलगाववादी गुटों में खलबली मची। उन्हें अपने अस्तित्व की चिंता सताने लगी।

इस नाते अलगाववादी नेता मो. अशरफ शेरई को सभी को एकजुट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बताते हैं कि सभी गुटों को उन्होंने आपसी वैमनस्यता त्यागकर एक मंच पर आने की अपील की है। इसके लिए बैठकों का दौर भी चल रहा है।

कई गुटों में बंटे हैं अलगाववादी

3 kashmiri separatist leaders join Geelani's Hurriyat

घाटी में लगातार बढ़ रही अलगाववादी गतिविधियों तथा बेरोकटोक आईएस एवं पाकिस्तान के झंडे लहराने, भारत विरोधी नारेबाजी का कड़ा संज्ञान लेते हुए मोदी सरकार ने पिछले महीने दिल्ली में पाकिस्तान के एनएसए से मिलने से हुर्रियत नेताओं को रोक दिया था।

हालांकि, इसके  पहले वे दिल्ली में पाकिस्तानी नेताओं तथा पाकिस्तान केकमिश्नर से बेरोकटोक मिलते रहे हैं। 2001 से 2013 तक कम से कम पांच मौके ऐसे आए हैं जब घाटी के अलगाववादी नेता दिल्ली में पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ, प्रधानमंत्री शौकत अजीज, विदेश मंत्री हीना रब्बानी और प्रधानमंत्री केसुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज से मिल चुकेहैं।

हुर्रियत कांफ्रेंस विभिन्न अलगाववादी संगठनों का साझा मंच है। हालांकि, यह भी गुटों में बंटी हुई है। एक गिलानी का गुट है, दूसरा मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और तीसरा गुट शब्बीर शाह और नईम खान का है। जेकेएलएफ के यासीन मलिक सहित अलगाववादियों के कई अन्य संगठन भी सक्रिय हैं। शब्बीर शाह गुट अब गिलानी के साथ हो गया है।

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