मेडिकल-इंजीनियरिंग में दाखिले की जंग लड़ेंगे 28 हजार युवा
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जेएंडके बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (बीओपीईई) की ओर से मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीटों की एंट्रेंस परीक्षा के लिए परीक्षार्थी कड़ी मेहनत करने में जुट गए हैं। इस परीक्षा के लिए बीओपीईई की ओर से रियासत में 44 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें कश्मीर संभाग में 25, जबकि जम्मू संभाग में 19 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।
रियासत भर से 28615 परीक्षार्थी मेडिकल और इंजीनियरिंग सीट हासिल करने के लिए अपना भाग्य आजमाएंगे। 30 और 31 मई को होने वाली परीक्षा के लिए पहले दिन फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षा होगी, जबकि 31 मई को बायोलाजी और गणित की परीक्षा होगी। मेडिकल और इंजीनियरिंग सीटों के लिए परीक्षार्थियों के बीच कांटे की टक्कर रहेगी।
यह परीक्षा एमबीबीएस, बीडीएस, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चरल साइंस और वेटरनेरी साइंस की सीटों के लिए करवाई जाती है, जिसमें परीक्षा पास करने पर विद्यार्थियों को राज्य के सरकारी और सरकार के अधीन प्रोफेशनल कालेजों में सीट दी जाती है। इस एंट्रेंस परीक्षा के लिए उलटी गिनती भी शुरू हो चुकी है।
राज्य के सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों की निर्धारित सीटों में अपनी जगह पक्की करने के लिए विद्यार्थियों के बीच कांटे की टक्कर रहेगी।
एंट्रेंस परीक्षा को लेकर तनाव हावी
एंट्रेंस परीक्षा को अभी 18 दिन बचे हैं और विद्यार्थियों के बीच परीक्षा को लेकर तनाव हावी होने लगा है। ऐसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि वह अपने बच्चों को तनावमुक्त रखें। साथ ही सकारात्मक रूप से परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करें।
काउंसिलिंग सेंटर की मनोवैज्ञानिक अनीषा धर ने कहा कि पहले बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे अंकों को लेकर बच्चों में तनाव देखने को मिलता रहता है, साथ ही एंट्रेंस परीक्षा को लेकर भी विद्यार्थी अकसर परेशान रहते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को एंट्रेंस परीक्षा में मिलने वाली कामयाबी और नाकामयाबी को सकारात्मक रूप से लेने के लिए प्रेरित करें।
इसके साथ ही सीट नहीं मिलने पर निराश होने के बजाय अन्य अच्छे अवसरों की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।