मसर्रत पर 27 क्रिमिनल केस चल रहे हैं: राजनाथ सिंह
हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मसर्रत आलम बट को हाल ही में लगभग साढ़े चार साल के बाद जेल से रिहा किया गया। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की दोबारा गिरफ्तारी की प्रकिया शुरू होगी।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उसकी रिहाई के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार को आदेश दिए है कि सरकार आलम और हुर्रियत नेताओं पर 24 घंटे कड़ी नजर रखे।
राज्यसभा में राजनाथ सिंह ने साथ में यह भी कहा गया है कि जम्मू कश्मीर सरकार आलम के खिलाफ पहले लंबित केसों को फिर से खोलने के आदेश दिए गए है। गृहमंत्री के एडवाइजरी नोट्स कहा गया है कि मसर्रत के खिलाफ देशद्रोह समेत 27 मामले चल रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में दोबारा बयान देते हुए कहा, 'राज्य सरकार से दोबारा जानकारी मांगी गई है।' सिंह ने कहा, 'मसरत पर 27 क्रिमिनल केस चल रहे हैं, रिहा करते वक्त इन मामलों को ध्यान में रखा जाना चाहिए था।'
राज्य सरकार की रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय संतुष्ट नहीं
राज्यसभा में राजनाथ सिंह ने आज इस मामले पर दूसरी रिपोर्ट पेश की। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश की रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय संतुष्ट नहीं है। हाल ही में मसर्रत की रिहाई के बारे में जम्मू-कश्मीर सरकार ने गृह मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
इसमें कहा गया था कि कानूनी माहौल को देखते हुए, आलम की गिरफ्तारी को आगे जारी रखना संभव नहीं हो पाएगा। मसरत की रिहाई का फैसला राज्य में नई सरकार के गठन के पहले ही ले लिया गया था।
पुलिस के अनुसार इस दौरान उन पर कुल 27 दूसरे मामले भी दर्ज किए गए थे जिनमें 26 में उन्हें ज़मानत मिल गई और बाकी एक मामले में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया गया है। आखिरकार सात मार्च, 2015 को उन्हें रिहा कर दिया गया।
गौरतलब है कि साल 2010 में पत्थर फेंक रहे कश्मीरी युवाओं पर सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाई थी जिनमें लगभग 120 युवा मारे गए थे।