ऑपरेशन ऑलआउट से बौखलाए आतंक के आका, सुरक्षा बलों ने लगाई डबल सेंचुरी
आपरेशन आल आउट के तहत सुरक्षा बलों ने आतंकियों के सफाए में डबल सेंचुरी पूरी कर ली है लेकिन चुनौती अब भी बरकरार है। दुर्दांत आतंकियों के 285 की लिस्ट में से 200 मारे जा चुके हैं पर घाटी में अब भी करीब 200 आतंकी सक्रिय हैं। उधर पीओके स्थित आतंकियों के लांचिंग पैड पर 250 आतंकी घुसपैठ को तैयार बैठे हैं।
सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है, आतंकी वारदातों में कमी भी आई है लेकिन आतंकी अपनी मौजूदगी दिखाने में भी सफल हो रहे हैं। आतंकियों के खिलाफ छेड़े गए आपरेशन आल आउट के अभियान का असर साफ दिखता है। आतंकियों के खात्मे में मिल रही कामयाबी दस साल में एक रिकार्ड है।
आपरेशन आल आउट ने आतंकियों और आतंकी संगठनों के बीच खौफ भी पैदा कर दिया है। कुछ आतंकी अपने माता- पिता की अपील पर वापस भी लौटे हैं। आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्तियां कम हुईं हैं लेकिन यह पूरी तरह बंद नहीं हो सका है। वर्ष 2017 में अब तक 200 आतंकी मारे जा चुके हैं।
इसमें 120 विदेशी आतंकी है और 80 स्थानीय नागरिक हैं। मारे गए आतंकियों में विभिन्न आतंकी संगठनों के एक दर्जन टाप कमांडर हैं। इनमें सब्जार अहमद भट्, अबू दुजाना, जुनैद मट्टू, अबू मुसैब, अजहर खान, सज्जाद लोन, मुज्जफर अहमद वानी, शौकत लौहार, बशीर लश्करी, अबू लल्हारी, अब्दुल क्यूम नाजर, यासिन इट्टू, परवेज अहमद वानी, उमर खालिद, तल्ला राशिद, मोहम्मद भाई, अबू जरगम, महमूद भाई आदि शामिल हैं।
हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैइबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के टाम कमांडर मारे गए हैं। इससे इन संगठनों की कमर टूटी है। आलम यह है कि इन संगठनों में अब कोई कमांडर बनने तक बनने से कतरा रहे हैं।
पहले से संगठनों में शामिल आतंकियों को कमांडर बनाना पड़ रहा है। 2018 में सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में जाकिर मूसा जैसे दुर्दांत आतंकी निशाने पर हैं। इनका खात्मा भी लगभग तय है।
चार सालों में आतंकी वारदातें और क्षति
वर्ष आतंकी घटनाएं मारे गए नागरिक शहीद सैनिक मारे गए आतंकी
2014 222 28 47 110
2015 225 21 49 137
2016 319 15 82 150
2017 250 से अधिक 54 76 200
आंतकी संगठनो को खोजे नहीं मिल रहे हैं कमांडर
आपरेशन आल आउट के लगभग आठ महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान सेना और सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। लगभग सभी टाप कमांडर ढेर हो चुके हैं। लश्कर-ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन को घाटी में कमांडर नहीं मिल रहे हैं।
जैश ए मोहम्मद बीच-बीच में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश करता रहा है लेकिन उसके पर भी कतरे गए हैं। सेना और बीएसएफ ने एलओसी और बार्डर पर आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों पर भी ब्रेक लगाया है। पीओके और पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को लगातार ढेर किया जा रहा है।
लेकिन चुनौती खत्म नहीं हुई है। पीओके में लाचिंग पैड पर हथियारों से लैस आतंकियों का जमावड़ा है। पाकिस्तान लगातार आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश में जुटा है और घाटी में मौजूद आतंकी बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं।
इस बीच अमन की मुहिम के तहत पत्थरबाजों से मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर हालात का जायजा लेना शुरू किया है लेकिन कश्मीर में अमन की राह में कई बाधाएं अब भी खड़ीं हैं।