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Jammu News: अदालतों में आज से 200 अतिरिक्त मामलों पर होगी सुनवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अदालतों में लंबित साधारण और स्वीकृत मामले बुधवार से नई प्रकार की सूची के तहत दिखाए एवं सूचीबद्ध किए जाएंगे। ये मामले विशेष मध्यस्थता अभियान में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए सूची में शामिल होंगे। इसे एक जुलाई सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के निर्देश अनुसार शुरू किया था।
सूचीबद्ध किए जाने वाले मामलों की प्रतिदिन की सीमा प्रति खंड व एकल पीठ के लिए अत्यावश्यक और साधारण लिए गए मामलों के अतिरिक्त 200 होगी। इस तय सीमा में जो मामले बचेंगे वे वापस अपनी मूल स्थिति में जाएंगे।
जजों से ये भी अपील की गई है कि वे अपने वक्त के हिसाब से समय तय करें और इन मामलों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाएं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा ने इसे लेकर सोमवार आदेश जारी किया है।
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हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार इन मामलों की एक विशेष वाद सूची प्रकाशित करेंगे। किसी भी मामले में कोई भी पीठ तत्काल व साधारण प्रस्ताव कारण सूची में सूचीबद्ध किसी भी मामले को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करना उचित समझती है और जिसमें निपटान का एक तत्व सूचीबद्ध है।
उस पीठ को किसी विशेष दिन पर संदर्भित किया जा सकता है। जारी आदेश में ये भी कहा गया है कि अधिवक्ता व पक्षकार उन मामलों का विवरण भी उपलब्ध कराएंगे जिनमें संबंधित न्यायिक शाखाओं में 19 जून 2025 तक या उससे पहले निपटान की संभावना है, ताकि उन्हें विशेष मध्यस्थता अभियान की सूची में भी सूचीबद्ध किया जा सके। ये आदेश 22 सितंबर तक लागू रहेगा।
इस तरह के मामले होंगे सूचीबद्ध
वैवाहिक विवाद मामले, दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा मामले, चेक बाउंस मामले, वाणिज्यिक विवाद मामले, सेवा मामले (डिवीजन बेंच को संदर्भित मामलों को छोड़कर और ऐसे मामले जिनमें किसी अधिनियम नियम या अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई है), उपभोक्ता विवाद मामले, ऋण वसूली मामले, बेदखली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने शुरू किया था अभियान
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के साथ मिलकर मध्यस्थता राष्ट्र के लिए नामक एक विशेष मध्यस्थता अभियान की परिकल्पना की। यह पहल भारत के मुख्य न्यायाधीश और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत के मार्गदर्शन में शुरू की जा रही है। एक जुलाई से इस अभियान को शुरू किया गया था।
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जम्मू। अदालतों में लंबित साधारण और स्वीकृत मामले बुधवार से नई प्रकार की सूची के तहत दिखाए एवं सूचीबद्ध किए जाएंगे। ये मामले विशेष मध्यस्थता अभियान में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए सूची में शामिल होंगे। इसे एक जुलाई सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के निर्देश अनुसार शुरू किया था।
सूचीबद्ध किए जाने वाले मामलों की प्रतिदिन की सीमा प्रति खंड व एकल पीठ के लिए अत्यावश्यक और साधारण लिए गए मामलों के अतिरिक्त 200 होगी। इस तय सीमा में जो मामले बचेंगे वे वापस अपनी मूल स्थिति में जाएंगे।
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जजों से ये भी अपील की गई है कि वे अपने वक्त के हिसाब से समय तय करें और इन मामलों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाएं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा ने इसे लेकर सोमवार आदेश जारी किया है।
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हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार इन मामलों की एक विशेष वाद सूची प्रकाशित करेंगे। किसी भी मामले में कोई भी पीठ तत्काल व साधारण प्रस्ताव कारण सूची में सूचीबद्ध किसी भी मामले को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करना उचित समझती है और जिसमें निपटान का एक तत्व सूचीबद्ध है।
उस पीठ को किसी विशेष दिन पर संदर्भित किया जा सकता है। जारी आदेश में ये भी कहा गया है कि अधिवक्ता व पक्षकार उन मामलों का विवरण भी उपलब्ध कराएंगे जिनमें संबंधित न्यायिक शाखाओं में 19 जून 2025 तक या उससे पहले निपटान की संभावना है, ताकि उन्हें विशेष मध्यस्थता अभियान की सूची में भी सूचीबद्ध किया जा सके। ये आदेश 22 सितंबर तक लागू रहेगा।
इस तरह के मामले होंगे सूचीबद्ध
वैवाहिक विवाद मामले, दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा मामले, चेक बाउंस मामले, वाणिज्यिक विवाद मामले, सेवा मामले (डिवीजन बेंच को संदर्भित मामलों को छोड़कर और ऐसे मामले जिनमें किसी अधिनियम नियम या अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई है), उपभोक्ता विवाद मामले, ऋण वसूली मामले, बेदखली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने शुरू किया था अभियान
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के साथ मिलकर मध्यस्थता राष्ट्र के लिए नामक एक विशेष मध्यस्थता अभियान की परिकल्पना की। यह पहल भारत के मुख्य न्यायाधीश और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत के मार्गदर्शन में शुरू की जा रही है। एक जुलाई से इस अभियान को शुरू किया गया था।