फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   19 global warming signs were found in kashmir

खतरा: ग्लोबल वार्मिग के 28 संकेतों में 19 कश्मीर में पाए गए

Wed, 10 Jun 2015 09:51 PM IST
Updated Wed, 10 Jun 2015 09:51 PM IST
विज्ञापन
19 global warming signs were found in kashmir

कश्मीर घाटी में मौसम में बेवक्त बदलाव को विशेषज्ञ काफी गंभीरता से लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे हैं कि इस दिशा में जब तक सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती तब तक ऐसे बदलाव पर रोक लगाना संभव नहीं हो सकता।

विज्ञापन


घाटी में जून के महीने में बारिशों का होना और तापमान में लगातार हो रही गिरावट को असामान्य बदलाव माना जा रहा है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि घाटी के विशेषज्ञ काफी परेशान दिख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों जैसा मौसम घाटी में पर्यावरण में आ रहे बदलाव का परिणाम है।
विज्ञापन


कश्मीर विश्वविद्यालय केअर्थ साइंस विभाग के हेड शकील अहमद रोमशू के अनुसार विशेषज्ञ जिन 28 संकेतों को पर्यावरण में बदलाव के पीछे मुख्य कारण मानते हैं उनमें 19 संकेत कश्मीर में पाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ज्यादा बारिश, गर्मियों में सामान्य से कम तापमान, सर्दियों में ज्यादा तापमान, ओलावृष्टि में बढ़ोतरी आदि कई ऐसे संकेत हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कश्मीर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि तापमान में हल्का सा उतार-चढ़ाव कोई बड़ा बदलाव का कारण बन सकता है जिससे न सिर्फ कृषि और पर्यटन पर असर पड़ेगा बल्कि पानी की किल्लत भी परेशानियों का सबब बन सकती है।

130 साल के आंकड़ों में बारिश अधिक हो रही

19 global warming signs were found in kashmir

रोमशू के अनुसार पिछले करीब 130 वर्षों के आंकड़े के अनुसार ज्यादा बारिश हो रही है जिससे सूखे दिन कम हो रहे हैं। उनके अनुसार इस बदलाव को रोकने में अंतररार्ष्र्टीय स्तर पर शुरुआत होनी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने का प्रयास किया जाए ताकि घाटी में पिछले वर्ष आई बाढ़ जैसी आपदा से बचा जाए।

कश्मीर के मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस के अनुसार रिकॉर्ड पर नजर डाली जाए तो न सिर्फ जून माह में बल्कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मौसम ज्यादा ठंडा है। समय-समय पर लगातार बारिशों के कारण तापमान सामान्य से काफी नीचे गिरता दिख रहा है।

इस वर्ष मार्च के महीने में रिकॉर्ड बारिश हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष-2015 के बिगड़े मौसम के कारण 50 प्रतिशत सेब की फसल पर प्रभाव पड़ा है जबकि बादाम की फसल बारिश और ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह से खराब हो चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed