पहल बेमिसाल ...संकट में 62 दिन चलाए 17 कम्युनिटी किचन, अब बेजुबानों का बने सहारा

एस खजूरिया, कठुआ Updated Fri, 07 Aug 2020 04:57 AM IST
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मदद की जुगत... - फोटो : अमर उजाला

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कोरोना संकट में लॉकडाउन की बंदिशों के बीच किसी को खाने के लाले पड़ गए थे तो किसी को दवा नहीं मिल रही थी। बच्चों के लिए दूध और मवेशियों के लिए चारे का भी संकट था। ऐसे में कठुआ के कुछ युवाओं ने पुलिस के साथ मिलकर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की ठानी। संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए इन्होंने यूनाइटेड कठुआ नाम से मंच बना पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया। 
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इस पहल से प्रेरित होकर मंच से क्षेत्र के 584 युवक जुड़ गए। लगातार 62 दिनों तक पुलिस विभाग के साथ  मिलकर 584 वॉलंटियर युवाओं के इस अनोखे मंच ने 17 कम्युनिटी किचन चलाकर हजारों लोगों को रोजाना खाना खिलाया। 
दवा से लेकर रोजमर्रा का अन्य जरूरी सामान लोगों के घरों तक पहुंचाया। अनलॉक में जब लोगों का जीवन पटरी पर लौटने लगा तो युवाओं का यह समूह सड़कों पर घूम रहे भूखे और घायल पशुओं को चारा देने और उन्हें मरहम लगाने में जुट गया है।
कंट्रोल रूम से कंट्रोल 
अपनी तरह की अनोखी पहल जम्मू-कश्मीर के प्रवेश जिला कठुआ में की गई, जिसे बेहद हाईटेक सूचना तंत्र के साथ अंजाम दिया गया। एसएसपी कठुआ ने पुलिस संसाधनों से एक वॉर रूम तैयार किया। वॉलंटियर युवा कॉल सेंटर के तर्ज पर कॉल नोट करते और फिर जरूरतमंद लोगों को सामान की होम डिलीवरी की जाती। इसी तरह से पूरे जिले में 17 सामुदायिक रसोईघर खोले गए। न सिर्फ खाना बनाया जाता बल्कि चिह्नित जगहों पर वाहन ले जाकर परोसा भी जाता। पूरी प्रक्रिया में सामुदायिक दूरी का विशेष ख्याल रखा गया। अनलॉक में यह मंच अब बेजुबान जानवरों की सेवा में जुट गया है।

दान में मिली पाई-पाई का हिसाब रखा 
लॉकडाउन के दौरान आम लोगों ने सामाजिक कार्य के लिए दान किया। इसकी पाई-पाई का हिसाब रखकर सार्वजनिक किया गया। कुल 5,05,33,453 रुपये की मदद मिली जिसे कम्युनिटी किचन से लेकर दवा, बच्चों के लिए दूध और लावारिस कुत्तों और मवेशियों के लिए भी भोजन और चारे की व्यवस्था करने के लिए इस्तेमाल किया।

साढ़े 11 लाख प्लेट भोजन 
17 सामुदायिक किचन में प्रतिदिन तैयार होने वाले भोजन को सुबह-शाम हजारों लोगों तक पहुंचाया गया। एक टीम खाना तैयार करती तो दूसरी जरूरतमंदों तक पहुंचाती। फोन कॉल को वॉर रूम में बैठे वालंटियर सामुदायिक किचन और लंगर परोसने वाले वालंटियरों तक पहुंचाते रहे। लगभग 19 हजार लोगों तक प्रतिदिन दो वक्त का भोजन, साढ़े चार सौ से अधिक नौनिहालों तक दूध की निशुल्क सप्लाई और सैकड़ों पशुओं तक चारे की व्यवस्था की गई।

यूनाइटेड कठुआ ने यह साबित कर दिया कि युवा समाज की सहायता के लिए सदैव तत्पर हैं। कठुआ जिले के 584 युवाओं का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने तब अपना योगदान दिया है जब इस महामारी और उसके प्रभावों से लड़ना एक चुनौती रहा है।
- डॉ. शैलेंद्र मिश्रा, एसएसपी कठुआ

(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)
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