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बर्खास्त एनएचएम कर्मियों का भविष्य अधर में
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जम्मू। जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में बर्खास्त किए गए सैकड़ों एनएचएम कर्मियों का भविष्य अंधकार में है। एनएचएम के मिशन निदेशक भूपेंद्र कुमार के राज्य के विभिन्न जिलों में बर्खास्त कर्मियों को ज्वाइन नहीं करवाने के आदेश से कई कर्मचारी न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में कर्मी पहले से अदालत में गए हुए हैं। उनका कहना है कि कश्मीर के कई हिस्सों में बर्खास्त कर्मियों को वापस ज्वाइन करवाया गया है, जबकि जम्मू संभाग के कर्मियों से भेदभाव किया जा रहा है।
स्थायी और अन्य मांगों के लिए एनएचएम कर्मी 14 जनवरी 2019 से 17 फरवरी 2019 तक काम छोड़ हड़ताल पर रहे थे, जिसके बाद सरकार ने ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर सैकड़ों कर्मियों को बर्खास्त कर दिया था। इसमें जम्मू जिला में 6, कठुआ में 14, राजोरी में 9, पुंछ में 8, रियासी में 65, उधमपुर में 6, डोडा में 51, किश्तवाड़ में 202 शामिल हैं। जिला सांबा में 11 बर्खास्त कर्मियों को वापस ज्वाइन करवाया गया था। सरकार की ओर से कश्मीर के कई हिस्सों में बर्खास्त कर्मियों को दोबारा ड्यूटी पर ज्वाइन करवाया गया था। आल जेके एनएचएम इंप्लाइज यूनियन के प्रधान रोहित सेठ ने बताया कि भाजपा के शीर्ष नेताओं के माध्यम से राज्यपाल के आश्वासन पर कर्मियों ने हड़ताल समाप्त की थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने कुछ कर्मियों को निशाना बनाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया। इससे सैकड़ों परिवारों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार को आश्वासन के तहत सभी कर्मियों को वापस लेना चाहिए।
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स्थायी और अन्य मांगों के लिए एनएचएम कर्मी 14 जनवरी 2019 से 17 फरवरी 2019 तक काम छोड़ हड़ताल पर रहे थे, जिसके बाद सरकार ने ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर सैकड़ों कर्मियों को बर्खास्त कर दिया था। इसमें जम्मू जिला में 6, कठुआ में 14, राजोरी में 9, पुंछ में 8, रियासी में 65, उधमपुर में 6, डोडा में 51, किश्तवाड़ में 202 शामिल हैं। जिला सांबा में 11 बर्खास्त कर्मियों को वापस ज्वाइन करवाया गया था। सरकार की ओर से कश्मीर के कई हिस्सों में बर्खास्त कर्मियों को दोबारा ड्यूटी पर ज्वाइन करवाया गया था। आल जेके एनएचएम इंप्लाइज यूनियन के प्रधान रोहित सेठ ने बताया कि भाजपा के शीर्ष नेताओं के माध्यम से राज्यपाल के आश्वासन पर कर्मियों ने हड़ताल समाप्त की थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने कुछ कर्मियों को निशाना बनाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया। इससे सैकड़ों परिवारों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार को आश्वासन के तहत सभी कर्मियों को वापस लेना चाहिए।
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