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निजी कारखाना प्रबंधन श्रमिकों की कर रहा उपेक्षा
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सांबा। कस्बे में लगे निजी कारखाना प्रबंधन पर युवाओं ने श्रमिकों की अपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया है। इससे उनमें कारखाना प्रबंधकों के खिलाफ रोष पनप रहा है। रविवार को युवाओं ने निजी कारखाना प्रबंधन व स्थानीय पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
कस्बा के दूसरे फेज में लगे एक पेयजल कारखाने में काम करने वाले श्रमिक सुखदेव सिंह पुत्र मदन लाल निवासी पूलरा ने बताया कि गत शाम काम करते समय उस का पैर कट गया, लेकिन कारखाना प्रबंधन की ओर से उनकी कोई सहायता नहीं की गई। उसके परिजनों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया था। जब वह पुलिस चौकी रख अंब टाली में मामला दर्ज कराने गए तो पुलिस ने उन्हें वापस कर दिया। स्थानीय सरपंच विनोद कुमार, पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, नायब सरपंच दवेंद्र सिंह सोनू आदि की देखरेख में स्थानीय युवाओं ने निजी कारखाना प्रबंधन और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सरपंच के अनुसार पुलिस के पास जब मामला दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने इनकार कर दिया जबकि सरपंचों की बातों को ही अनसुना कर दिया गया। उनका कहना था कि बैक टू विलेज कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी वह शिकायत करेंगे व राज्यपाल तक अपनी बात पहुंचाएंगे। उनके अनुसार निजी कारखाना प्रबंधन स्थानीय लोगों की उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजी कारखाना प्रबंधन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी तो लोग सड़क पर उतरेंगे।
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कस्बा के दूसरे फेज में लगे एक पेयजल कारखाने में काम करने वाले श्रमिक सुखदेव सिंह पुत्र मदन लाल निवासी पूलरा ने बताया कि गत शाम काम करते समय उस का पैर कट गया, लेकिन कारखाना प्रबंधन की ओर से उनकी कोई सहायता नहीं की गई। उसके परिजनों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया था। जब वह पुलिस चौकी रख अंब टाली में मामला दर्ज कराने गए तो पुलिस ने उन्हें वापस कर दिया। स्थानीय सरपंच विनोद कुमार, पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, नायब सरपंच दवेंद्र सिंह सोनू आदि की देखरेख में स्थानीय युवाओं ने निजी कारखाना प्रबंधन और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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सरपंच के अनुसार पुलिस के पास जब मामला दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने इनकार कर दिया जबकि सरपंचों की बातों को ही अनसुना कर दिया गया। उनका कहना था कि बैक टू विलेज कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी वह शिकायत करेंगे व राज्यपाल तक अपनी बात पहुंचाएंगे। उनके अनुसार निजी कारखाना प्रबंधन स्थानीय लोगों की उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजी कारखाना प्रबंधन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी तो लोग सड़क पर उतरेंगे।
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