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पुलिस महकमे में अधिकारियों का टोटा
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जम्मू। पुलिस विभाग में अधिकारियों का टोटा है। यूं कहें कि पुलिस मुख्यालय में पोस्टिंग के इंतजार में बैठे अफसरों को पोस्टिंग नहीं मिल रही। आलम यह है कि कई पद ऐसे हैं, जहां पर अफसरों को अतिरिक्त पदभार देकर काम चलाना पड़ रहा है।
जम्मू क्राइम ब्रांच के एसएसपी का पद खाली पड़ा हुआ है। दो महीने पहले एसएसपी रमेश जाला रिटायर हो गए थे। उनके बाद अब तक कोई नया एसएसपी नहीं आया है। जाला का पदभार एसपी क्राइम ब्रांच मुश्ताक चौधरी को अतिरिक्त तौर पर दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण पद जम्मू सांबा कठुआ के डीआईजी का है। जिसको पिछले तीन साल से कोई स्थायी डीआईजी मिल ही नहीं रहा। कोई भी डीआईजी पांच छह महीनों से अधिक नहीं टिक पाता। पिछले तीन साल में जम्मू सांबा कठुआ के पद आधा दर्जन अफसर हाजिरी दे गए हैं। अब यह पद फिर से खाली है। डीआईजी सुजीत कुमार को उधमपुर रियासी भेज दिया गया। अब इस पद का अतिरिक्त जिम्मा राजोरी पुंछ के डीआईजी विवेक गुप्ता के पास है।
बताते चलें कि इस पद तीन सालों में पहले अशकूर वानी, फिर रफीक उल हसन, भीम सेन टूटी, फिर विवेक गुप्ता, फिर सुजित कुमार और अब फिर से यह पद खाली हो गया है। इसके अलावा कई डीएसपी की भी स्थायी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। उन्हें इंचार्ज बनाकर भेजा गया है। कुछ दिन पहले इंस्पेक्टरों को प्रमोशन देकर डीएसपी तो बनाया गया, लेकिन इनको भी इंचार्ज डीएसपी लगाया गया है। वहीं उधमपुर रियासी रेंज के डीआईजी पद पर भी आईपीएस अधिकारी सूजित कुमार इंचार्ज डीआईजी लगाया गया है।
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हर थाने में 30 से 40 कर्मियों की आवश्यकता
जम्मू कश्मीर के थानों में भी पुलिस कर्मियों का जबरदस्त टोटा है। रियासत में 227 पुलिस थाने और 700 पुलिस चौकियां हैं। हर एक थाने में जांच अधिकारियों को मिलाकर 30 से 40 पुलिस कर्मियों की आवश्यकता है। पुलिस चौकियों में भी प्रत्येक में 8 से 10 कर्मचारियों की कमी है, जिसका असर थानों के कामकाज और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। पुलिस विभाग की तरफ से इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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जम्मू क्राइम ब्रांच के एसएसपी का पद खाली पड़ा हुआ है। दो महीने पहले एसएसपी रमेश जाला रिटायर हो गए थे। उनके बाद अब तक कोई नया एसएसपी नहीं आया है। जाला का पदभार एसपी क्राइम ब्रांच मुश्ताक चौधरी को अतिरिक्त तौर पर दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण पद जम्मू सांबा कठुआ के डीआईजी का है। जिसको पिछले तीन साल से कोई स्थायी डीआईजी मिल ही नहीं रहा। कोई भी डीआईजी पांच छह महीनों से अधिक नहीं टिक पाता। पिछले तीन साल में जम्मू सांबा कठुआ के पद आधा दर्जन अफसर हाजिरी दे गए हैं। अब यह पद फिर से खाली है। डीआईजी सुजीत कुमार को उधमपुर रियासी भेज दिया गया। अब इस पद का अतिरिक्त जिम्मा राजोरी पुंछ के डीआईजी विवेक गुप्ता के पास है।
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बताते चलें कि इस पद तीन सालों में पहले अशकूर वानी, फिर रफीक उल हसन, भीम सेन टूटी, फिर विवेक गुप्ता, फिर सुजित कुमार और अब फिर से यह पद खाली हो गया है। इसके अलावा कई डीएसपी की भी स्थायी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। उन्हें इंचार्ज बनाकर भेजा गया है। कुछ दिन पहले इंस्पेक्टरों को प्रमोशन देकर डीएसपी तो बनाया गया, लेकिन इनको भी इंचार्ज डीएसपी लगाया गया है। वहीं उधमपुर रियासी रेंज के डीआईजी पद पर भी आईपीएस अधिकारी सूजित कुमार इंचार्ज डीआईजी लगाया गया है।
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हर थाने में 30 से 40 कर्मियों की आवश्यकता
जम्मू कश्मीर के थानों में भी पुलिस कर्मियों का जबरदस्त टोटा है। रियासत में 227 पुलिस थाने और 700 पुलिस चौकियां हैं। हर एक थाने में जांच अधिकारियों को मिलाकर 30 से 40 पुलिस कर्मियों की आवश्यकता है। पुलिस चौकियों में भी प्रत्येक में 8 से 10 कर्मचारियों की कमी है, जिसका असर थानों के कामकाज और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। पुलिस विभाग की तरफ से इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा।