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पावंदी लगाने से भड़के ग्रामीण
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उधमपुर/जिब। डगार गांव में सैनिक क्षेत्र में होकर गुजर रहे मार्ग पर रात दस बजे के बाद ग्रामीणों की आवाजाही पर पाबंदी लगाए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने रविवार सुबह सैनिक क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सेना के अधिकारी मौके पर पहुंचा और जल्द मामले का हल निकालने का आश्वासन देकर प्रदर्शन बंद करवाया।
सुबह करीब आठ बजे ग्रामीणों ने सैनिक क्षेत्र में पहुंच कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सतीश शर्मा, राज कुमार, हेम राज व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव की तरफ जाने वाला मार्ग सैनिक क्षेत्र के बीच से होकर गुजरता है। उनको हर रोज सेना की तरफ से लगाए गए गेट को पार कर आवाजाही करनी पड़ती है। कुछ दिन पहले सेना के एक अधिकारी ने रात दस बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक सैनिक क्षेत्र से गुजर कर आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया, जोकि किसी को भी मंजूर नहीं है। उनके घर में अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसको अस्पताल कैसे ले जाएंगे। इसके अलावा अगर कोई आपात स्थिति पैदा हो जाती है तो ग्रामीणों तक तो कोई मदद ही नहीं पहुंच सकती है। उनको सेना की यह पाबंदी किसी कीमत पर भी मंजूर नहीं है। सैनिक क्षेत्र से होकर गुजरना उनके लिए मजबूरी है। अगर सेना चाहती है कि उनके मार्ग से नहीं गुजरे तो ग्रामीणों को गांव के अंदर व बाहर जाने के लिए कोई दूसरा मार्ग तैयार कर दिया जाए। जब कोई भी कोई नया अधिकारी आता है तो उन पर पाबंदी लगा दी जाती है। इसी कारण कई वर्षों से ग्रामीण परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनको हर रोज पहचान पत्र दिखा कर ही अपने घर तक पहुंचना पड़ता है। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सेना का एक अधिकारी मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को जल्द पाबंदी हटाने का आश्वासन देकर शांत किया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण प्रदर्शन बंद कर अपने घरों को वापस लौट गए।
सुबह करीब आठ बजे ग्रामीणों ने सैनिक क्षेत्र में पहुंच कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सतीश शर्मा, राज कुमार, हेम राज व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव की तरफ जाने वाला मार्ग सैनिक क्षेत्र के बीच से होकर गुजरता है। उनको हर रोज सेना की तरफ से लगाए गए गेट को पार कर आवाजाही करनी पड़ती है। कुछ दिन पहले सेना के एक अधिकारी ने रात दस बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक सैनिक क्षेत्र से गुजर कर आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया, जोकि किसी को भी मंजूर नहीं है। उनके घर में अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसको अस्पताल कैसे ले जाएंगे। इसके अलावा अगर कोई आपात स्थिति पैदा हो जाती है तो ग्रामीणों तक तो कोई मदद ही नहीं पहुंच सकती है। उनको सेना की यह पाबंदी किसी कीमत पर भी मंजूर नहीं है। सैनिक क्षेत्र से होकर गुजरना उनके लिए मजबूरी है। अगर सेना चाहती है कि उनके मार्ग से नहीं गुजरे तो ग्रामीणों को गांव के अंदर व बाहर जाने के लिए कोई दूसरा मार्ग तैयार कर दिया जाए। जब कोई भी कोई नया अधिकारी आता है तो उन पर पाबंदी लगा दी जाती है। इसी कारण कई वर्षों से ग्रामीण परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनको हर रोज पहचान पत्र दिखा कर ही अपने घर तक पहुंचना पड़ता है। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद सेना का एक अधिकारी मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को जल्द पाबंदी हटाने का आश्वासन देकर शांत किया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण प्रदर्शन बंद कर अपने घरों को वापस लौट गए।
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