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चमलयाल दरगाह पर मेला 27 को
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रामगढ़ । अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाबा चमलयाल की दरगाह पर चौथा सूफी कार्यक्रम का आयोजन रविवार को किया जाएगा। बाबा के भक्तों ने कहा कि इसमें दूसरे राज्यों के कलाकार शामिल होंगे और बाबा की भक्ति में सूफियाना कलाम पेश करेंगे।
बाबा चमलयाल क्लब यूनियन के सुखदेव सिंह (सुखा) सोड़ी, सोनू, गारा राम, अंगरेज पाल, बिल्लू चौधरी, शामा चौधरी ने कहा कि बाबा की दरगाह पर आकर आशीर्वाद लें। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 27 जून को होने वाले मेले की तैयारी अंतिम चरण में। जिला प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई एवं रंग-रोगन के लिए सेवादारों को हर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सेवादारों को प्रशासन ने सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने के आदेश जारी किए हैं। दग छनी गांव के बुजुर्गों का कहना है कि बाबा को धोखे से मारा गया था। वह धार्मिक विचार के थे। चंबल चमड़ रोग को जड़ से दूर करने के कारण वह जल्द ही दूर तक प्रसिद्ध हो गए। बताया जाता है कि धीरे-धीरे बाबा की मशहूर होते गए और अन्य हकीमों का कारोबार चौपट होने लगा। एक दिन बाबा को चमलयाल गांव से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित गांव सौदोयाली (अब पाकिस्तान में) कुछ शरारती तत्वों ने इलाज के बहाने बुलाया। संदेश मिलते ही बाबा घोड़े पर सवार होकर सौदोयाली गांव चल पड़े। जैसे ही बाबा गांव पहुंचे तो घात लगाकर बैठे शरारती तत्वों ने बाबा जी पर हमला बोलकर उनका सिर काट दिया। बुजुर्गों के अनुसार बाबा का घोड़ा काफी समझदार था। वह बिना सिर के ही बाबा जी को वहां से ले आया। उस वक्त गांव की एक औरत पास के कुएं पर थी। उसने देखा कि बाबा धरती में समा गए। बाबा को धरती में समाते देख घोड़ा भी धरती में समा गया।
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बाबा चमलयाल क्लब यूनियन के सुखदेव सिंह (सुखा) सोड़ी, सोनू, गारा राम, अंगरेज पाल, बिल्लू चौधरी, शामा चौधरी ने कहा कि बाबा की दरगाह पर आकर आशीर्वाद लें। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 27 जून को होने वाले मेले की तैयारी अंतिम चरण में। जिला प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई एवं रंग-रोगन के लिए सेवादारों को हर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सेवादारों को प्रशासन ने सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने के आदेश जारी किए हैं। दग छनी गांव के बुजुर्गों का कहना है कि बाबा को धोखे से मारा गया था। वह धार्मिक विचार के थे। चंबल चमड़ रोग को जड़ से दूर करने के कारण वह जल्द ही दूर तक प्रसिद्ध हो गए। बताया जाता है कि धीरे-धीरे बाबा की मशहूर होते गए और अन्य हकीमों का कारोबार चौपट होने लगा। एक दिन बाबा को चमलयाल गांव से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित गांव सौदोयाली (अब पाकिस्तान में) कुछ शरारती तत्वों ने इलाज के बहाने बुलाया। संदेश मिलते ही बाबा घोड़े पर सवार होकर सौदोयाली गांव चल पड़े। जैसे ही बाबा गांव पहुंचे तो घात लगाकर बैठे शरारती तत्वों ने बाबा जी पर हमला बोलकर उनका सिर काट दिया। बुजुर्गों के अनुसार बाबा का घोड़ा काफी समझदार था। वह बिना सिर के ही बाबा जी को वहां से ले आया। उस वक्त गांव की एक औरत पास के कुएं पर थी। उसने देखा कि बाबा धरती में समा गए। बाबा को धरती में समाते देख घोड़ा भी धरती में समा गया।
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