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पारा चढ़ने के साथ आई फ्लू वायरल बढ़ा
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जम्मू। पारे में बढ़ोतरी के साथ कंजेक्टिव वाइट्स (आई फ्लू) वायरल का प्रकोप बढ़ा है। इस संक्रामक बीमारी की चपेट में अधिकांश बच्चे आ रहे हैं। पीड़ित के संपर्क में आने वाले दूसरे लोगों को भी यह बीमारी अपनी चपेट में लेती है। आसपास के वातावरण में साफ-सफाई न होने के कारण वायरल संक्रमण बढ़ने से आई फ्लू की समस्या आती है। इस मौसम में जीएमसी की आई ओपीडी में आई फ्लू से पीड़ित रोजाना 30-40 मरीज पहुंच रहे हैं।
आई फ्लू में एडिनो वाइरस आंखों को खराब करता है। जीएमसी के आफ्थेल्मोलजी (नेत्र) यूनिट के एचओडी डॉ. दिनेश गुप्ता ने बताया कि वायरल कंजेक्टिव वाइट्स हवा में सक्रिय रहता है। तापमान में बढ़ोतरी और बारिश नहीं होने से यह वाइरस हवा में सक्रिय रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों को कंजेक्टिव वाइट्स प्रभावित करता है। यह वायरल ज्यादातर स्कूली बच्चों से घरों तक पहुंचकर अभिभावकों व परिवार के अन्य सदस्यों को अपनी गिरफ्त में लेता है। इस वाइरस से पीड़ित की आंखें ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं। अधिकांश लोग वायरल आने की सूरत में घर पर ही इलाज लेना शुरू कर देते हैं। इसमें बोरिक एसिड का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह एसिड आंखों को लाभ देने के बजाय कई बार नुकसान पहुंचाता है।
लक्षण
1. आंखों में खारिश होना, लाली छाना।
2. आंखों से खून चलना।
3. पलकों में सूजन आना, दर्द होना।
4. आंखों से पानी चलता है।
बचाव
1. पीड़ित दूसरों के संपर्क में न आएं।
2. आंखों पर चश्मा लगाकर रखें।
3. कंप्यूटर और टीवी को न देखें।
4. आंखों में खुद खारिश न करें।
5. अपना रुमाल और तोलिया दूसरों को न दें।
6. दवाई डालने के बाद हाथों को साफ रखें।
7. पीड़ित बच्चे या अन्य को संबंधित संस्थानों में न भेजें।
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आई फ्लू में एडिनो वाइरस आंखों को खराब करता है। जीएमसी के आफ्थेल्मोलजी (नेत्र) यूनिट के एचओडी डॉ. दिनेश गुप्ता ने बताया कि वायरल कंजेक्टिव वाइट्स हवा में सक्रिय रहता है। तापमान में बढ़ोतरी और बारिश नहीं होने से यह वाइरस हवा में सक्रिय रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों को कंजेक्टिव वाइट्स प्रभावित करता है। यह वायरल ज्यादातर स्कूली बच्चों से घरों तक पहुंचकर अभिभावकों व परिवार के अन्य सदस्यों को अपनी गिरफ्त में लेता है। इस वाइरस से पीड़ित की आंखें ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं। अधिकांश लोग वायरल आने की सूरत में घर पर ही इलाज लेना शुरू कर देते हैं। इसमें बोरिक एसिड का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह एसिड आंखों को लाभ देने के बजाय कई बार नुकसान पहुंचाता है।
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लक्षण
1. आंखों में खारिश होना, लाली छाना।
2. आंखों से खून चलना।
3. पलकों में सूजन आना, दर्द होना।
4. आंखों से पानी चलता है।
बचाव
1. पीड़ित दूसरों के संपर्क में न आएं।
2. आंखों पर चश्मा लगाकर रखें।
3. कंप्यूटर और टीवी को न देखें।
4. आंखों में खुद खारिश न करें।
5. अपना रुमाल और तोलिया दूसरों को न दें।
6. दवाई डालने के बाद हाथों को साफ रखें।
7. पीड़ित बच्चे या अन्य को संबंधित संस्थानों में न भेजें।