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अढ़ाई गांव की सड़क पर नहीं चलती मेटाडोर
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:55 AM IST
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मुनीश शर्मा
पुंछ। जिले की मंडी तहसील मुख्यालय के निकटवर्ती गांव अढ़ाई की सड़क 2014 में आई बाढ़ में कई जगहों पर बह गई। बाढ़ में सड़क जगह-जगह से टूट गई और जहां नहीं टूटी वहां सड़क में जगह-जगह गड्ढे बन गए। ऐसे में इस मार्ग पर यात्री वाहनों का चलना बंद हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों मोहम्मद इखलाक, मोहम्मद फरीद, आशिक हुसैन आदि ने बताया कि उनके गांव की सड़क इतनी ज्यादा खस्ताहाल हो गई है चार साल में यहां छह बड़े हादसे हो चुके हैं, जिसमें दर्जन भर लोगों की मौत हो गई। गांव में कई लोगों की इसलिए मौत हो गई, क्योंकि वे बीमार थे और समय से अस्पताल नहीं पहुंचाए जा सके। पिछले चार साल में न तो प्रशासन, न किसी विधायक या विधान परिषद सदस्य ने गांव की सड़क की मरम्मत करवाने पर ध्यान दिया। ग्रामीणों का कहना था कि इस बार पंचायत चुनाव में नए पंच-सरपंच चुने जाने के बाद उनको सड़क की मरम्मत करवाने की उम्मीद बंधी है। अढ़ाई गांव में पंचायत चुनाव में सड़क की मरम्मत करवाने का मुद्दा सबसे अहम था। इसको ध्यान में रख कर ही लोगों ने अपने पंच-सरपंच चुने हैं। इसलिए नए पंचों-सरपंचों को अब लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। गौरतलब है कि करीब 10 हजार की आबादी वाले अढ़ाई गांव की तीन पंचायतें हैं। तीनों पंचायतों के लिए यही सड़क एकमात्र आवाजाही का जरिया है। इस सड़क के खस्ताहाल हो जाने से लोगों को हर दिन कई किलोमीटर तक पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता है। अक्सर लोग मंडी तक पैदल ही आते-जाते हैं।
कभी-कभी नजर आ जाती है सूमो
2004 की बाढ़ में सड़क बर्बाद होने के बाद से अढ़ाई गांव में भूले-भटके भी कोई मेटाडोर नहीं आती है। ऐसे में हर दिन स्थानीय ग्रामीणों को छह-सात किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। कभी-कभी कोई हिम्मतवाला सूमो चालक वाहन लेकर आता भी है तो उसमें सवारियां इतनी ज्यादा हो जाती हैं कि उसके पलटने का खतरा रहता है। वैसे भी उसमें जगह भी नहीं रहती है। गांव की सड़क इतनी ज्यादा खस्ताहाल है कि सूमो चालक को कई जगहों पर सड़क के बहुत ज्यादा संकरी हो जाने से सवारियों को उतार कर गाड़ी को आगे ले जाना पड़ता है। बाद में फिर वह सवारियों को बैठाता है। इसी तरह पूरी सड़क पर कई बार होता है।
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पुंछ। जिले की मंडी तहसील मुख्यालय के निकटवर्ती गांव अढ़ाई की सड़क 2014 में आई बाढ़ में कई जगहों पर बह गई। बाढ़ में सड़क जगह-जगह से टूट गई और जहां नहीं टूटी वहां सड़क में जगह-जगह गड्ढे बन गए। ऐसे में इस मार्ग पर यात्री वाहनों का चलना बंद हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों मोहम्मद इखलाक, मोहम्मद फरीद, आशिक हुसैन आदि ने बताया कि उनके गांव की सड़क इतनी ज्यादा खस्ताहाल हो गई है चार साल में यहां छह बड़े हादसे हो चुके हैं, जिसमें दर्जन भर लोगों की मौत हो गई। गांव में कई लोगों की इसलिए मौत हो गई, क्योंकि वे बीमार थे और समय से अस्पताल नहीं पहुंचाए जा सके। पिछले चार साल में न तो प्रशासन, न किसी विधायक या विधान परिषद सदस्य ने गांव की सड़क की मरम्मत करवाने पर ध्यान दिया। ग्रामीणों का कहना था कि इस बार पंचायत चुनाव में नए पंच-सरपंच चुने जाने के बाद उनको सड़क की मरम्मत करवाने की उम्मीद बंधी है। अढ़ाई गांव में पंचायत चुनाव में सड़क की मरम्मत करवाने का मुद्दा सबसे अहम था। इसको ध्यान में रख कर ही लोगों ने अपने पंच-सरपंच चुने हैं। इसलिए नए पंचों-सरपंचों को अब लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। गौरतलब है कि करीब 10 हजार की आबादी वाले अढ़ाई गांव की तीन पंचायतें हैं। तीनों पंचायतों के लिए यही सड़क एकमात्र आवाजाही का जरिया है। इस सड़क के खस्ताहाल हो जाने से लोगों को हर दिन कई किलोमीटर तक पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता है। अक्सर लोग मंडी तक पैदल ही आते-जाते हैं।
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कभी-कभी नजर आ जाती है सूमो
2004 की बाढ़ में सड़क बर्बाद होने के बाद से अढ़ाई गांव में भूले-भटके भी कोई मेटाडोर नहीं आती है। ऐसे में हर दिन स्थानीय ग्रामीणों को छह-सात किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। कभी-कभी कोई हिम्मतवाला सूमो चालक वाहन लेकर आता भी है तो उसमें सवारियां इतनी ज्यादा हो जाती हैं कि उसके पलटने का खतरा रहता है। वैसे भी उसमें जगह भी नहीं रहती है। गांव की सड़क इतनी ज्यादा खस्ताहाल है कि सूमो चालक को कई जगहों पर सड़क के बहुत ज्यादा संकरी हो जाने से सवारियों को उतार कर गाड़ी को आगे ले जाना पड़ता है। बाद में फिर वह सवारियों को बैठाता है। इसी तरह पूरी सड़क पर कई बार होता है।
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