कश्मीर के 15 जिले अति संवेदनशील: कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ से मची तबाही, अब गृह मंत्रालय के निर्देश पर होगा काम
जम्मू-कश्मीर के 15 जिले अति संवेदनशील बताए जा रहे हैं। जो आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की लिस्ट में शामिल हैं। सरकार अब आपदा से निपटने का प्लान संभावित इलाकों के हिसाब से तैयार करेगी।
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आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की लिस्ट में जम्मू-कश्मीर के 15 जिले अति संवेदनशील हैं। बीते वर्षों में इनमें कहीं सुखा ज्यादा हुआ, तो कहीं बाढ़ तबाही मचा चुकी है। प्रदेश में आपदा से निपटने का प्लान अब संभावित इलाकों के हिसाब से तैयार होगा। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बीते वर्षों में हुए हादसों से सबक लेकर रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजेगा। यह तैयारी आगामी तीन महीने में पूरी होगी। गृह मंत्रालय ने प्रदेश के लिए यह मोहलत तय की है।
प्रदेश में आपदा का सबसे बड़ा आंकड़ा मानसून के दौरान होने वाले नुकसान का ही है। मानसून में बादल फटने, अतिवृष्टि और भूस्खलन के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। 15 जिलों में पूर्व में हुई घटनाओं को देखते हुए उनकी रैंकिंग तय की गई है।
2014 की आपदा में गई थी 300 लोगों की जान
बीते 11 वर्षों में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा श्रीनगर में आई थी। 2014 में श्रीनगर में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ में 300 लोगों की मौत हुई थी। बाढ़ की वजह से सैकड़ों ग्रामीण इलाकों का अस्तित्व खत्म हो गया था। इस प्राकृतिक आपदा के बाद श्रीनगर समेत आसपास के जिलों को बाढ़ संभावित खतरे की श्रेणी में रखा गया है। इनमें श्रीनगर, अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा, बडगाम, बांदीपोरा, बारामुला और शोपियां शामिल हैं। इन जिलों को मानसून के मास्टर प्लान में सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
रामबन पर इस साल भारी पड़ी थी अप्रैल की बारिश
प्रदेश में भारी बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन का सबसे ताजा मामला रामबन का है। इस साल अप्रैल में रामबन की घटना में तीन लोगों की मौत के अलावा 46 परिवार बेघर हो गए। साथ ही जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे लंबे समय तक ठप रहा। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रामबन को कश्मीर के दूसरे संवेदनशील जिलों के साथ ही बाढ़ और भूस्खलन संभावित जिले की श्रेणी में रखा है। यहां आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मुआवजे के तौर पर दस करोड़ रुपये स्थानीय प्रशासन को प्रदान किए हैं।
पुंछ-राजोरी भूस्खलन तो जम्मू सांबा और कठुआ सूखा ग्रस्त
पुंछ और राजोरी भूस्खलन की वजह से संबेदनशील जिलों में शामिल हैं। इन दोनों जिलों में फायर सीजन के दौरान आग लगने की भी सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने किश्तवाड़ को भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना है। यहां अब तक भूकंप के कई झटके महसूस किए जा चुके हैं। इसके अलावा जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों को सूखे से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की श्रेणी में रखा गया है। गर्मी के दौरान यहां तापमान 40 से 45 डिग्री के बीच रहता है और पेयजल समेत फसलों को नुकसान की आशंका बनी रहती है।
पाकिस्तानी गोलाबारी भी मानवीय आपदा
जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक के अलावा एक श्रेणी मानवीय आपदा भी है। ये वो इलाके हैं जो पाकिस्तान की सीमा से सटे हैं। पाकिस्तान की ओर से अक्सर इन इलाकों में गोलाबारी की जाती है और इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस बार पाकिस्तान के हमलों से प्रभावित इलाकों को भी आपदा की श्रेणी में रखा है। बीते दिनों भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के हालात में इन इलाकों को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से मदद मुहैया करवाई गई है। इनमें पुंछ, राजोरी, जम्मू, सांबा, कठुआ, बारामुला, उड़ी समेत अन्य इलाके शामिल हैं।
90 दिनों में तैयारी पूरी करेंगे
प्रदेश में आपदा प्रबंधन के तय नियमों के आधार पर काम होगा। दिल्ली में सम्मेलन के बाद जो भी रूपरेखा तय की गई है, उसके आधार पर काम किया जाएगा। आगामी 90 दिनों में सभी संभावित जिलों में आपदा से निपटने की तैयारी पूरी कर ली जाएगी।- वीके धर, अतिरिक्त सचिव, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण