{"_id":"688fc1b5d6b6aedfa3013cd2","slug":"10th-century-shivling-found-in-jhelum-river-srinagar-news-c-264-1-sr11001-105072-2025-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: झेलम नदी में मिला 10वीं शताब्दी का शिवलिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: झेलम नदी में मिला 10वीं शताब्दी का शिवलिंग
विज्ञापन
बारामुला के खनपोरा में मिला 10वीं शताब्दी का शिवलिंग। स्रोत स्वयं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारामुला स्थित खानपोरा में सेना के शिविर के पास झेलम नदी से रेत निकालने के दौरान मजदूरों को एक शिवलिंग मिला। 137 सेमी लंबा और 160 सेमी चौड़ा यह शिवलिंग 10वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। इसे एसपीएस संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।
अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधिकारियों ने पत्थर से तराशे गए इस प्राचीन शिवलिंग के मिलने की रविवार को घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण खोज क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक विरासत पर प्रकाश डालती है। शिवलिंग को सावधानीपूर्वक संरक्षित किया गया है और जनता को इसके ऐतिहासिक महत्व को समझाने के लिए इसे प्रदर्शित किया जाएगा।
शिवलिंग मिलने पर बारामूला स्थित भारतीय सेना की 22 मध्यम रेजिमेंट ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। इसके ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए सेना ने इसे अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को सौंप दिया। इसके बाद शिवलिंग को श्रीनगर के एसपीएस संग्रहालय में ले जाया गया।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर के अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक, कुलदीप कृष्ण सिद्ध का कहना है कि शिवलिंग की प्राप्ति न केवल एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज है, बल्कि हमारी स्थायी सांस्कृतिक विरासत का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आमजन के शैक्षिक और आध्यात्मिक संवर्धन के लिए इसका संरक्षण और सम्मानपूर्वक प्रदर्शन किया जाएगा।
विज्ञापन
अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधिकारियों ने पत्थर से तराशे गए इस प्राचीन शिवलिंग के मिलने की रविवार को घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण खोज क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक विरासत पर प्रकाश डालती है। शिवलिंग को सावधानीपूर्वक संरक्षित किया गया है और जनता को इसके ऐतिहासिक महत्व को समझाने के लिए इसे प्रदर्शित किया जाएगा।
विज्ञापन
शिवलिंग मिलने पर बारामूला स्थित भारतीय सेना की 22 मध्यम रेजिमेंट ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। इसके ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए सेना ने इसे अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को सौंप दिया। इसके बाद शिवलिंग को श्रीनगर के एसपीएस संग्रहालय में ले जाया गया।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर के अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक, कुलदीप कृष्ण सिद्ध का कहना है कि शिवलिंग की प्राप्ति न केवल एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज है, बल्कि हमारी स्थायी सांस्कृतिक विरासत का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आमजन के शैक्षिक और आध्यात्मिक संवर्धन के लिए इसका संरक्षण और सम्मानपूर्वक प्रदर्शन किया जाएगा।