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मुठभेड़ के समय दहशत में रहे धीरती के लोग
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:58 AM IST
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कटड़ा (धीरती)। धीरती क्षेत्र में आतंकियों व सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान पूरे क्षेत्र में डर व दहशत का माहौल बना रहा। इस दौरान कोई घर में परिवार सहित कैद रहा, तो कोई दुकान में ही मुठभेड़ खत्म होने तक छुपा रहा। शुक्रवार को दिनभर इसी की चर्चा होती रही। हर कोई एक-दूसरे से आपबीती सुनाते दिखाई दिया। इस दौरान जनजीवन पटरी पर उतरता नजर आया।
मुठभेड़ स्थल से मात्र पचास मीटर दूर रहने वाले जमालदीन कहते हैं कि जिस समय सुरक्षाबलों ने क्षेत्र का घेराव किया, तो वह घर से बाहर निकले। गाड़ियों की आवाज सुनने पर उन्हें परिवार की चिंता सताने लगी। इस पर तत्काल घर खुला छोड़ परिवार को लेकर दूर निकल गए। वहीं समूचे आपरेशन के दौरान उन्हें चिंता बनी रही कि कहीं आतंकी उनके घर में घुुसकर सामान को क्षति ना पहुंचा दें। किराना दुकानदार देसराज की भी यही स्थिति रही। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी से उन्हें चिंता हुई। इसके बाद जैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई दी, उन्होंने अंदर से दुकान बंद कर दी। करीब पांच घंटे तक दुकान के अंदर ही रहे।
मुठभेड़ स्थल के पास रहने वाले मुंशी राम भी पूरे आपरेशन के दौरान परिवार सहित घर में ही कैद रहे। आसपास खेत से छोटी सी आहट पर भी वह सहम जाते। दहशत में मन में विभिन्न खयाल भी आने लगते।
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धीरती के ही नरेश कुमार बताते हैं कि मुठभेड़ के समय वह घर के बाहर थे। गोलियों की आवाज सुनाई देने पर एक ओर वह चिंतित हुए तो वहीं उनके परिजन भी सुरक्षा को लेकर लगातार फोन करते रहे। जैसे-तैसे वह घर में पहुंचे। आसपास सुरक्षाबलों का जमावड़ा देख उन्हें थोड़ी राहत तो हुई। लेकिन मुठभेड़ समाप्त होने तक चिंता बनी रही। सुरिंद्र विमला, बिट्टू आदि ने भी वीरवार की दहशत को बयां किया।
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मुठभेड़ स्थल से मात्र पचास मीटर दूर रहने वाले जमालदीन कहते हैं कि जिस समय सुरक्षाबलों ने क्षेत्र का घेराव किया, तो वह घर से बाहर निकले। गाड़ियों की आवाज सुनने पर उन्हें परिवार की चिंता सताने लगी। इस पर तत्काल घर खुला छोड़ परिवार को लेकर दूर निकल गए। वहीं समूचे आपरेशन के दौरान उन्हें चिंता बनी रही कि कहीं आतंकी उनके घर में घुुसकर सामान को क्षति ना पहुंचा दें। किराना दुकानदार देसराज की भी यही स्थिति रही। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी से उन्हें चिंता हुई। इसके बाद जैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई दी, उन्होंने अंदर से दुकान बंद कर दी। करीब पांच घंटे तक दुकान के अंदर ही रहे।
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मुठभेड़ स्थल के पास रहने वाले मुंशी राम भी पूरे आपरेशन के दौरान परिवार सहित घर में ही कैद रहे। आसपास खेत से छोटी सी आहट पर भी वह सहम जाते। दहशत में मन में विभिन्न खयाल भी आने लगते।
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धीरती के ही नरेश कुमार बताते हैं कि मुठभेड़ के समय वह घर के बाहर थे। गोलियों की आवाज सुनाई देने पर एक ओर वह चिंतित हुए तो वहीं उनके परिजन भी सुरक्षा को लेकर लगातार फोन करते रहे। जैसे-तैसे वह घर में पहुंचे। आसपास सुरक्षाबलों का जमावड़ा देख उन्हें थोड़ी राहत तो हुई। लेकिन मुठभेड़ समाप्त होने तक चिंता बनी रही। सुरिंद्र विमला, बिट्टू आदि ने भी वीरवार की दहशत को बयां किया।