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आग और तूफान से नुकसान पर नहीं मिलेगा मुआवजा
Updated Tue, 22 May 2018 02:25 PM IST
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कठुआ। इस सीजन में किसानों को रबी की फसल का नुकसान सबसे अधिक आग और तूफान के कारण हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इन दोनों को शामिल नहीं कया गया है। यानि आग और तूफान के कारण फसल का नुकसान झेल रहे किसानों को इस योजना के तहत बीमा करवाने पर भी नुकसान की भरपाई के लिए पैसे नहीं मिलेंगे। हालांकि, कृषि विभाग और बीमा कंपनी ने मिलकर इस वर्ष 16 हजार से अधिक किसानों का बीमा किया है, जिन्हें नौ करोड़ से अधिक का मुआवजा मिलेगा। लेकिन कई किसान हैं जिन्हें बीमा करवाने के बाद भी इस योजना के तहत लाभ नहीं मिलेेगा।
किसानों की मानें तो इस सीजन में आग और तूफान आंधी के कारण ही उन्हें नुकसान हुआ है। ऐसे में बीमा कंपनी ने इन दोनों के कारण होने वाले नुकसान को बीमा नियमों में शामिल ही नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष किसानों को अलग-अलग कारणों से नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में यदि हर बार बीमा कंपनी इसी प्रकार से कारणों को बीमा नियमों से बाहर करेगी तो किस प्रकार बात बनेगी। उन्होंने कहा कि बीमा के तहत आग, तूफान, बंदरों के कारण, नील गाय के कारण या किसी अन्य मवेशी के कारण नुकसान को शामिल ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों को इन कारणों से भी नुकसान होता है और इसे भी शामिल करना चाहिए। लेकिन, बीमा कंपनी और विभाग ने ऐसा नहीं किया है। किसानों ने कहा कि विभाग को चाहिए कि बीमा कंपनी के साथ मिलकर किसानों के लिए एक चर्चा करे, ताकि किसानों को होने वाले नुकसान के कारणों को सही से पता चल पाए।
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 73,380 किसानों में से 64 हजार किसानों तक ही विभाग पहुंच पाया है। जिला के बाहर काम करने या फिर सर्वे के दौरान घर पर न मिलने के कारण बचे हुए किसानों को कवर नहीं किया जा सका। 64 हजार किसानों में से भी 44 हजार किसानों के पास केसीसी है और इन्हीं में से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियर काटा गया है। नियम अनुसार केसीसी वाले किसानों का ही बीमा किया जा सकता है। अब इन किसानों में से भी इस सीजन में अब तक 16,220 किसानों को नुकसान के तहत बीमा योजना का लाभ मिलेगा। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन किसानों ने करीब 93 लाख का प्रीमियम जमा करवाया है और नुकसान के चलते करीब नौ करोड़ रुपये किसानों को मुआवजे के तौर पर इस सीजन में आवंटित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में करीब 17,500 हेक्टेयर भूमि पर हुए नुकसान को शामिल किया गया है।
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कंडी इलाके में आग, पहाड़ों में ओलावृष्टि से नुकसान
इस सीजन में कडी इलाकों में आग से गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। पहाड़ों पर ओलावृष्टि ने कहर ढाया है। पिछले महीने ही सैकड़ों कनाल भूमि पर लगी फसल आग के कारण खाक हो गई, लेकिन किसानों को इसका मुआवजा नहीं मिलेगा। पहाड़ों में खराब मौसम के कारण हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। इन किसानों को बीमा कंपनी मुआवजा देगी।
क्या कहते है अधिकारी
अभी फसल बीमा योजना जिला में शुरूआती दौर में है और किसानों में जागरूकता की भी कमी है। कुछ किसानों ने तो बीमा भी नहीं करवाया है। वहीं बीमा कंपनी को भी फसल के नुकसान के कारणों का ठीक से पता नहीं है। इस कारण कुछ चीजें छूटी हैं। आने वाले समय में इन्हें भी शामिल किया जाएगा।
-अरुण गुप्ता, मुख्य कृषि अधिकारी
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किसानों की मानें तो इस सीजन में आग और तूफान आंधी के कारण ही उन्हें नुकसान हुआ है। ऐसे में बीमा कंपनी ने इन दोनों के कारण होने वाले नुकसान को बीमा नियमों में शामिल ही नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष किसानों को अलग-अलग कारणों से नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में यदि हर बार बीमा कंपनी इसी प्रकार से कारणों को बीमा नियमों से बाहर करेगी तो किस प्रकार बात बनेगी। उन्होंने कहा कि बीमा के तहत आग, तूफान, बंदरों के कारण, नील गाय के कारण या किसी अन्य मवेशी के कारण नुकसान को शामिल ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों को इन कारणों से भी नुकसान होता है और इसे भी शामिल करना चाहिए। लेकिन, बीमा कंपनी और विभाग ने ऐसा नहीं किया है। किसानों ने कहा कि विभाग को चाहिए कि बीमा कंपनी के साथ मिलकर किसानों के लिए एक चर्चा करे, ताकि किसानों को होने वाले नुकसान के कारणों को सही से पता चल पाए।
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कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 73,380 किसानों में से 64 हजार किसानों तक ही विभाग पहुंच पाया है। जिला के बाहर काम करने या फिर सर्वे के दौरान घर पर न मिलने के कारण बचे हुए किसानों को कवर नहीं किया जा सका। 64 हजार किसानों में से भी 44 हजार किसानों के पास केसीसी है और इन्हीं में से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियर काटा गया है। नियम अनुसार केसीसी वाले किसानों का ही बीमा किया जा सकता है। अब इन किसानों में से भी इस सीजन में अब तक 16,220 किसानों को नुकसान के तहत बीमा योजना का लाभ मिलेगा। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन किसानों ने करीब 93 लाख का प्रीमियम जमा करवाया है और नुकसान के चलते करीब नौ करोड़ रुपये किसानों को मुआवजे के तौर पर इस सीजन में आवंटित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में करीब 17,500 हेक्टेयर भूमि पर हुए नुकसान को शामिल किया गया है।
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कंडी इलाके में आग, पहाड़ों में ओलावृष्टि से नुकसान
इस सीजन में कडी इलाकों में आग से गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। पहाड़ों पर ओलावृष्टि ने कहर ढाया है। पिछले महीने ही सैकड़ों कनाल भूमि पर लगी फसल आग के कारण खाक हो गई, लेकिन किसानों को इसका मुआवजा नहीं मिलेगा। पहाड़ों में खराब मौसम के कारण हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। इन किसानों को बीमा कंपनी मुआवजा देगी।
क्या कहते है अधिकारी
अभी फसल बीमा योजना जिला में शुरूआती दौर में है और किसानों में जागरूकता की भी कमी है। कुछ किसानों ने तो बीमा भी नहीं करवाया है। वहीं बीमा कंपनी को भी फसल के नुकसान के कारणों का ठीक से पता नहीं है। इस कारण कुछ चीजें छूटी हैं। आने वाले समय में इन्हें भी शामिल किया जाएगा।
-अरुण गुप्ता, मुख्य कृषि अधिकारी