अस्पतालों में लैप्स हो गए दस करोड़, पढ़ें खबर
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जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों के सामने बड़ा वित्त संकट खड़ा हो गया है। ट्रेजरी (खजाने) से पिछले वित्त वर्ष के बिलों का भुगतान न होने से दस करोड़ रुपये से अधिक की राशि लैप्स हो गई है। बिलों का भुगतान न करने से जीएमसी में बीएसएनएल ने टेलीफोन कनेक्शन काट दिए हैं।
पेट्रोल के लिए भी कोई राशि जारी नहीं हुई है। प्रिंसिपल, प्रशासक और स्टाफ वाहनों के चक्के जाम हो गए हैं। अस्पताल की एंबुलेंस भी काम चलाऊ तरीके से दौड़ रही हैं। डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये का फरवरी का वेतन फंस गया है। आय की जानकारी न देने पर आयकर विभाग के नोटिस की तलवार लटक रही है।
बिलों को ट्रेजरी में जमा करवाने के बावजूद सरकार की ओर से राशि जारी नहीं की गई। बताया जाता है कि पिछले 35 साल में पहली बार ऐसा वित्त संकट हुआ है। सूत्रों के अनुसार गत 22 मार्च को सचिवालय जम्मू से जीएमसी प्रशासन को बकाया बिलों का भुगतान करने के लिए शाम को फंड अलाट किए गए।
इसके अगले दिन जीएमसी प्रशासन की ओर से रिलीज आर्डर बनाकर ट्रेजरी को भेजा गया।
बंद हो गई उधारी भी
24 मार्च को सभी बकाया बिल ट्रेजरों को भेज दिए गए, लेकिन 25 से 31 मार्च तक सरकार की ओर से कोई फंड रिलीज नहीं किया गया, जिससे मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) में साढ़े आठ करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया। इसमें साढ़े सात करोड़ रुपये डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का फरवरी माह का वेतन भी शामिल है।
इसके अलावा अन्य बिलों में अलग से एक करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया। भुगतान न होने पर पेट्रोल पंप मालिकों ने तेल देने से मना कर दिया है। इसी तरह शहर के दूसरे बड़े अस्पताल एसएमजीएस में दो करोड़ 15 लाख और 37 हजार के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया। इसमें सवा करोड़ रुपये के वेतन के बिल शामिल हैं।
इन बिलों में टेलीफोन, बेडिंग क्लाथिंग, मशीन उपकरण, लांडरी, ब्लड बैंक उपकरण, मशीनों की मरम्मत आदि शामिल है। सीडी अस्पताल में 36 लाख रुपये का ट्रेजरी से भुगतान नहीं हो पाया, जिसमें अप्रैल में वेतन के दस लाख रुपये जारी हुए हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी पचास लाख रुपये से अधिक की राशि लैप्स हो गई है।
इसमें जीवन रक्षक दवाइयों, बड़ी-छोटी मशीनों आदि के बिल शामिल हैं।
फंड में देरी से संकट बना: प्रिंसिपल
जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता का कहना है कि फंड के जारी होने में देरी से वित्त संकट बना है, लेकिन नये वित्त वर्ष में सभी बिलों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से हो जाएगा।
आयकर विभाग के नोटिस की तलवार
एसोसिएटेड अस्पतालों में स्टाफ के फरवरी माह के वेतन का भुगतान न होने से आयकर विभाग की ओर से पुराने वित्त वर्ष में टैक्स नहीं काटा गया है, लेकिन अगर तीस अप्रैल से पहले इसे क्लीयर नहीं किया जाता तो डाक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग आफसर (डीडीओ) को आयकर विभाग की ओर से नोटिस जारी करने के साथ अलग से जुर्माना वसूला जाएगा।