बारिश-बाढ़ से खेती चौपट: जम्मू संभाग में 1.45 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद; किसान बोले- रिपोर्ट नहीं मुआवजा चाहिए
भारी बारिश और बाढ़ के चलते जम्मू संभाग में 1.45 लाख हेक्टेयर में धान, मक्का, दालें और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे 6 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। कृषि विभाग ने एसडीआरएफ से 135 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में मांगे हैं।
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बारिश, बाढ़ से इस बार खेती चौपट हो गई है। एक मात्र आय का जरिया खेती नष्ट होने से किसानों की कमर टूट गई है। जम्मू संभाग में 1.53 लाख हेक्टेयर में से 1.45 लाख हेक्टेयर भूमि में फसलें बर्बाद हुई हैं। कृषि विभाग ने किसानों को मुआवजा देने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से 135 करोड़ रुपये की मांग की है।
रिपोर्ट एसडीआरएफ को भेज दी गई है। कुल आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही फसल बची है।सबसे ज्यादा नुकसान धान, दालों, मक्का और सब्जियों को हुआ है। पहले चिशोती और कठुआ में बादल फटने से फसलें बर्बाद हुईं। इसके बाद 26 अगस्त को फिर भारी बारिश हुई, जिससे दोबारा फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। इसके बाद भी लगातार हुई बारिश के कारण फसल पानी में डूबी रही। इससे 90 प्रतिशत से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गईं।
कृषि विभाग के अनुसार अधिकारी जम्मू संभाग का दौरा कर रिपोर्ट जमा कर चुके हैं। जम्मू संभाग में छह लाख किसानों की फसल बर्बाद हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान नालों और नदियों के किनारे हुआ है। बीमा कंपनियों को भी सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, किसानों ने सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।
क्षति आकलन रिपोर्ट के अनुसार उधमपुर, किश्तवाड़ और कठुआ जिलों में लगभग शत-प्रतिशत फसलें बर्बाद हुई हैं। इनमें उधमपुर के लिए 24.65 करोड़, किश्तवाड़ के लिए 12.81 करोड़ और कठुआ में 7,768 हेक्टेयर भूमि में नुकसान होने पर 8.02 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। जम्मू जिले में 25,550 हेक्टेयर भूमि में से 19,441 हेक्टेयर में नुकसान हुआ है। जिले के लिए सबसे अधिक 55.41 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। जिले में बासमती धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
किसानों की मांग : समय पर मिले मुआवजा
जम्मू-कश्मीर किसान सलाहकार बोर्ड के सदस्य कुलभूषण खजूरिया ने कहा कि किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए। अक्सर रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाती है, लेकिन किसानों को दो-दो साल तक मुआवजा नहीं मिल पाता।
किसान तंग आ चुके हैं और अब खेतों को बेचने के लिए विवश हो रहे हैं। सरकार को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए।वहीं, जम्मू-कश्मीर किसान काउंसिल के अध्यक्ष तजिंद्र सिंह बजीर ने कहा कि सरकार को समय पर सहायता देकर किसानों का मनोबल बढ़ाना चाहिए। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक स्थायी राहत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
जम्मू संभाग में कृषि क्षति का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। एसडीआरएफ को रिपोर्ट भेजकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए 135 करोड़ रुपये की मांग की गई है। धनराशि जारी होते ही मुआवजे का वितरण शुरू कर दिया जाएगा। डॉ. अनिल गुप्ता, निदेशक, कृषि विभाग, जम्मू-कश्मीर