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Udhampur News: बावलियों के पानी से बुझेगी शहर की प्यास
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उधमपुर। जलशक्ति विभाग अमृत 2.0 योजना से पहले शहर के वार्ड नंबर पांच में मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी हौज में भरकर शहर के लिए सप्लाई करेगा।
इसको लेकर जलशक्ति विभाग की ओर से 3.20 करोड़ की लागत से योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के पूरा होने पर शहरवासियों को अपने घरों में इन प्राकृतिक बावलियों का स्वच्छ पानी पीने को मिलेगा। इससे शहर में पेयजल सप्लाई भी बेहतर होगी। वर्तमान में शहर में 32 लाख गैलन के आसपास पानी की सप्लाई होती है लेकिन जरूरत इससे कहीं अधिक है इसके चलते शहर के कई इलाकों में नियमित पानी की सप्लाई नहीं हो पाती है। वहीं इस योजना के पूरा होने से वाटर सप्लाई बेहतर होगी। बहरहाल शहर में वाटर सप्लाई को बढ़ाने के लिए अमृत 2.0 योजना को भी मंजूरी मिल गई है लेकिन इस पर काम पूरा होने में अभी करीब तीन साल का समय लगेगा। इससे पहले प्राकृतिक जलाशयों से वाटर सप्लाई को बेहतर बनाने की योजना शहरवासियों को राहत दिलाने का काम करेगी।
उल्लेखनीय है कि गंगेड़ा पहाड़ी से निकलने वाली बाड़ेयां नदी शहर के वार्ड एक और पांच और 21 से होकर गुजरती है। इसके किनारों पर विशेष तौर पर वार्ड पांच के बाडेयां और इसके साथ लगते इलाकों में प्राकृतिक बावलियों व जल निकायों की संख्या काफी ज्यादा है। वर्षों से इसके आसपास रहने वाले इलाकों के लोग इन बावलियों के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। सिर्फ बाड़ेयां से लेकर संगूर तक वर्तमान समय में करीब 15 से अधिक ताजे मीठे पानी के जलाशय मौजूद हैं। इनमें पानी इतना अधिक है कि अगर इसको जमा कर वाटर सप्लाई की योजना तैयार की जाती है तो लगभग शहर की एक चौथाई आबादी के लिए अगले कई सालों की पानी की कमी दूर हो जाएगी।
भीषण गर्मी में भी यहां पानी के जलस्तर में कोई खास अंतर नहीं आता है। पानी की शुद्धता भी काफी ज्यादा है, जितनी सर्दी होती है, उतना यह पानी गर्म होता है और जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, उतना ही यह ठंडा हो जाता है।
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स्थानीय निवासी अश्वनी शर्मा, यशपाल शर्मा, रवि कुमार, ऋषि मल्होत्रा, काका बंद्राल इत्यादि ने बताया कि अफसोस की बात ही है कि शहर के भीतर मीठे पानी का खजाना दशकों से उपेक्षा का शिकार रहा है और इसका आज तक सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है। हालांकि बीते कुछ सालों में इनके रखरखाव पर कुछ ध्यान तो दिया गया है लेकिन फिर भी इनका 90 प्रतिशत से अधिक पानी बेकार बहता है। अगर इस पानी का इस्तेमाल शहर की वाटर सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा तो इससे पानी की किल्लत की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी। अगर सरकार इस दिशा में कोई योजना तैयार करती है तो यह काफी सराहनीय पहल होगी।
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शहर के भीतर और इसके आसपास बावलियों की संख्या काफी है। इनमें पानी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसी के मद्देनजर इन बावलियों के पानी को अपलिफ्ट कर शहर की वाटर सप्लाई में सुधार करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए 3.20 करोड़ के फंड को भी मंजूर किया गया है। इसके तहत इन बावलियों से पानी को अपलिफ्ट कर पहले बाडेयां वाटर पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा और फिर वहां से इसे आगे शहर में सप्लाई किया जाएगा। बाडेयां के अलावा रतैड़ी बावली और कल्लर इत्यादि बावलियों के पानी का प्रयोग करने का प्रयास किया जाएगा। अमृत 2.0 योजना के पूरा होने से पहले इस योजना के जरिए शहर में पानी की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
-संदीप गुप्ता एक्सईएन, जलशक्ति विभाग उधमपुर
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इसको लेकर जलशक्ति विभाग की ओर से 3.20 करोड़ की लागत से योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के पूरा होने पर शहरवासियों को अपने घरों में इन प्राकृतिक बावलियों का स्वच्छ पानी पीने को मिलेगा। इससे शहर में पेयजल सप्लाई भी बेहतर होगी। वर्तमान में शहर में 32 लाख गैलन के आसपास पानी की सप्लाई होती है लेकिन जरूरत इससे कहीं अधिक है इसके चलते शहर के कई इलाकों में नियमित पानी की सप्लाई नहीं हो पाती है। वहीं इस योजना के पूरा होने से वाटर सप्लाई बेहतर होगी। बहरहाल शहर में वाटर सप्लाई को बढ़ाने के लिए अमृत 2.0 योजना को भी मंजूरी मिल गई है लेकिन इस पर काम पूरा होने में अभी करीब तीन साल का समय लगेगा। इससे पहले प्राकृतिक जलाशयों से वाटर सप्लाई को बेहतर बनाने की योजना शहरवासियों को राहत दिलाने का काम करेगी।
उल्लेखनीय है कि गंगेड़ा पहाड़ी से निकलने वाली बाड़ेयां नदी शहर के वार्ड एक और पांच और 21 से होकर गुजरती है। इसके किनारों पर विशेष तौर पर वार्ड पांच के बाडेयां और इसके साथ लगते इलाकों में प्राकृतिक बावलियों व जल निकायों की संख्या काफी ज्यादा है। वर्षों से इसके आसपास रहने वाले इलाकों के लोग इन बावलियों के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। सिर्फ बाड़ेयां से लेकर संगूर तक वर्तमान समय में करीब 15 से अधिक ताजे मीठे पानी के जलाशय मौजूद हैं। इनमें पानी इतना अधिक है कि अगर इसको जमा कर वाटर सप्लाई की योजना तैयार की जाती है तो लगभग शहर की एक चौथाई आबादी के लिए अगले कई सालों की पानी की कमी दूर हो जाएगी।
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भीषण गर्मी में भी यहां पानी के जलस्तर में कोई खास अंतर नहीं आता है। पानी की शुद्धता भी काफी ज्यादा है, जितनी सर्दी होती है, उतना यह पानी गर्म होता है और जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, उतना ही यह ठंडा हो जाता है।
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स्थानीय निवासी अश्वनी शर्मा, यशपाल शर्मा, रवि कुमार, ऋषि मल्होत्रा, काका बंद्राल इत्यादि ने बताया कि अफसोस की बात ही है कि शहर के भीतर मीठे पानी का खजाना दशकों से उपेक्षा का शिकार रहा है और इसका आज तक सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है। हालांकि बीते कुछ सालों में इनके रखरखाव पर कुछ ध्यान तो दिया गया है लेकिन फिर भी इनका 90 प्रतिशत से अधिक पानी बेकार बहता है। अगर इस पानी का इस्तेमाल शहर की वाटर सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा तो इससे पानी की किल्लत की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी। अगर सरकार इस दिशा में कोई योजना तैयार करती है तो यह काफी सराहनीय पहल होगी।
शहर के भीतर और इसके आसपास बावलियों की संख्या काफी है। इनमें पानी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसी के मद्देनजर इन बावलियों के पानी को अपलिफ्ट कर शहर की वाटर सप्लाई में सुधार करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए 3.20 करोड़ के फंड को भी मंजूर किया गया है। इसके तहत इन बावलियों से पानी को अपलिफ्ट कर पहले बाडेयां वाटर पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा और फिर वहां से इसे आगे शहर में सप्लाई किया जाएगा। बाडेयां के अलावा रतैड़ी बावली और कल्लर इत्यादि बावलियों के पानी का प्रयोग करने का प्रयास किया जाएगा। अमृत 2.0 योजना के पूरा होने से पहले इस योजना के जरिए शहर में पानी की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
-संदीप गुप्ता एक्सईएन, जलशक्ति विभाग उधमपुर