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Udhampur News: एससी-एसटी एवं ओबीसी संगठन 11 को निकालेंगे शांति मार्च, यूजीसी नियम को लागू कराने के लिए राष्ट्रपति के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग को लेकर 11 फरवरी को एससी-एसटी एवं ओबीसी संगठनों की तरफ से शहर में गुरु रविदास चौक से विशाल शांति मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च टाउन हाल से होते हुए डीसी कार्यालय तक जाएगा और वहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह जानकारी शुक्रवार को जखैनी में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में संगठनों के प्रतिनिधियों ने दी। गुज्जर बक्करवाल कांफ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष जम्मू चौधरी फारूख खटाना ने कहा कि यूजीसी कानून, शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वर्ग इस कानून को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तव में यह कानून वंचित और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करता है।
यूजीसी की मांग किसी ने नहीं की थी बल्कि सरकार ने स्वयं धर्म और जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव का संज्ञान लेकर लागू करने का निर्णय लिया जिसका हम स्वागत करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून लागू होने से पहले ही कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई और देशभर में यूजीसी के खिलाफ बवाल मच गया है। इसलिए हमारी सभी से अपील है कि हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। यूजीसी की मूल भावना भी भेदभाव को खत्म कर समानता लाना है लेकिन कुछ असामाजिक तत्व भाईचारे में फूट डालकर देश में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहें हैं। यूजीसी सांविधानिक अधिकार है और इसे हर कीमत पर लागू करवाकर रहेंगे।
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उधमपुर। यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग को लेकर 11 फरवरी को एससी-एसटी एवं ओबीसी संगठनों की तरफ से शहर में गुरु रविदास चौक से विशाल शांति मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च टाउन हाल से होते हुए डीसी कार्यालय तक जाएगा और वहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह जानकारी शुक्रवार को जखैनी में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में संगठनों के प्रतिनिधियों ने दी। गुज्जर बक्करवाल कांफ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष जम्मू चौधरी फारूख खटाना ने कहा कि यूजीसी कानून, शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वर्ग इस कानून को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तव में यह कानून वंचित और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करता है।
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यूजीसी की मांग किसी ने नहीं की थी बल्कि सरकार ने स्वयं धर्म और जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव का संज्ञान लेकर लागू करने का निर्णय लिया जिसका हम स्वागत करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून लागू होने से पहले ही कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई और देशभर में यूजीसी के खिलाफ बवाल मच गया है। इसलिए हमारी सभी से अपील है कि हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। यूजीसी की मूल भावना भी भेदभाव को खत्म कर समानता लाना है लेकिन कुछ असामाजिक तत्व भाईचारे में फूट डालकर देश में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहें हैं। यूजीसी सांविधानिक अधिकार है और इसे हर कीमत पर लागू करवाकर रहेंगे।
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