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Udhampur News: भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप शुरू
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उधमपुर। महिला कालेज में इंटरन्शप कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए अतिथिगण । आयोजक
- महिला कालेज में 15 दिनों तक रहेगी जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। उधमपुर में सांस्कृतिक विरासत के छिपे हुए खजाने की खोज के लिए, राजकीय महिला महाविद्यालय के इतिहास एवं विरासत क्लब विभाग ने डिग्री कालेज रामनगर और बॉयज कालेज के सहयोग से, भारतीय राष्ट्रीय न्यास कला एवं सांस्कृतिक विरासत इंटैक-जम्मू चैप्टर के तत्वावधान में उधमपुर के सांस्कृतिक संसाधन मानचित्रण विषय पर 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप व अभिविन्यास कार्यक्रम शुरू किया।
कार्यक्रम में आईएफएस-सेवानिवृत्त ओम प्रकाश विद्यार्थी मुख्य अतिथि थे। उन्होंन उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उधमपुर और आसपास के क्षेत्रों की विभिन्न वनस्पतियों और जीवों के नामकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन पौधों और स्थानीय जड़ी-बूटियों व घास के औषधीय गुणों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद संगीत विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।
इससे पहले, कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नलिनी पठानिया ने अपने संबोधन में कर्मचारियों और छात्रों की ओर से सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने हमारी सांस्कृतिक पहचान, विरासत, कला, वास्तुकला, ज्ञान, विश्वास, अभिव्यक्ति और परिदृश्य को बनाए रखने वाले ऐसे आयोजन के लिए हेरिटेज क्लब और तीनों कॉलेजों के समन्वयकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों से हमारी स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में स्वेच्छा से योगदान देने की अपील की।
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लगभग 105 छात्रों, 50 कर्मचारियों और इंटैक के 15 सदस्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। संयोजक एसएम साहिनी ने संसाधन व्यक्तियों का दर्शकों से संक्षिप्त परिचय कराया और उनकी विशेषताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। सह-संयोजक डॉ. सीएम सेठ ने उधमपुर के विभिन्न प्राकृतिक जल संसाधनों, विशेष रूप से उधमपुर की बाउली, को मीठे पानी की खपत के लिए जीवन रेखा के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. सुधीर सिंह ने विरासत का अवलोकन कराया और विशेष रूप से मातृभाषा को आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया। प्रमुख बैंकर अनिल पाबा ने उधमपुर की निर्मित विरासत, विशेष रूप से क्रिमची मंदिरों और रामनगर किले के बारे में विस्तार से चर्चा की और छात्रों से सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की उनकी जिम्मेदारी के बारे में अपील की।
कार्यक्रम के सबसे आकर्षक वक्ताओं और प्रस्तुतकर्ताओं में से एक, इंटैक के आजीवन सदस्य श्री कृपाल सिंह थे, जिन्होंने एक पीपीटी के माध्यम से क्षेत्र की कला और शिल्प के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें परोला, बाँस, पेंटिंग के रंग और चावल की भूसी जैसे स्थानीय उत्पादों से बनी कला पर प्रकाश डाला गया।
इंटैक उधमपुर चैप्टर के एक अन्य सदस्य अशोक शर्मा, सेवानिवृत्त, अंग्रेजी के वरिष्ठ व्याख्याता ने भी क्षेत्र के विभिन्न जातीय खाद्य पदार्थों जैसे बतरोड़, कलारी, बबरू, खमीरा, मणि, मदरा आदि पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
जीडीसी रामनगर के डॉ. पंकज सारस्वत ने एनईपी-2020 के अंतर्गत छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप का अवलोकन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की संपूर्ण कार्यवाही समन्वयक ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप और विभागाध्यक्ष इतिहास, महिला कालेज प्रो. यश पॉल के समन्वय में आयोजित की गई। उन्होंने छात्रों को कला, वास्तुकला, संस्कृति, मूल्यों, विश्वासों और किसी भी समाज के निर्माण में सांस्कृतिक विरासत के इन सभी गुणों की भूमिका को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की संपूर्ण गतिविधियां भारतीय राष्ट्रीय न्यास कला एवं सांस्कृतिक विरासत द्वारा प्रायोजित थीं।
फोटो सहित
इस अवसर पर औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन जीडीसी रामनगर के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. मनमोहन सिंह ने प्रस्तुत किया। सभी प्रतिभागियों को एक साधारण डोगरा भोजन परोसा गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। उधमपुर में सांस्कृतिक विरासत के छिपे हुए खजाने की खोज के लिए, राजकीय महिला महाविद्यालय के इतिहास एवं विरासत क्लब विभाग ने डिग्री कालेज रामनगर और बॉयज कालेज के सहयोग से, भारतीय राष्ट्रीय न्यास कला एवं सांस्कृतिक विरासत इंटैक-जम्मू चैप्टर के तत्वावधान में उधमपुर के सांस्कृतिक संसाधन मानचित्रण विषय पर 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप व अभिविन्यास कार्यक्रम शुरू किया।
कार्यक्रम में आईएफएस-सेवानिवृत्त ओम प्रकाश विद्यार्थी मुख्य अतिथि थे। उन्होंन उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उधमपुर और आसपास के क्षेत्रों की विभिन्न वनस्पतियों और जीवों के नामकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन पौधों और स्थानीय जड़ी-बूटियों व घास के औषधीय गुणों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद संगीत विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।
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इससे पहले, कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नलिनी पठानिया ने अपने संबोधन में कर्मचारियों और छात्रों की ओर से सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने हमारी सांस्कृतिक पहचान, विरासत, कला, वास्तुकला, ज्ञान, विश्वास, अभिव्यक्ति और परिदृश्य को बनाए रखने वाले ऐसे आयोजन के लिए हेरिटेज क्लब और तीनों कॉलेजों के समन्वयकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों से हमारी स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में स्वेच्छा से योगदान देने की अपील की।
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लगभग 105 छात्रों, 50 कर्मचारियों और इंटैक के 15 सदस्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। संयोजक एसएम साहिनी ने संसाधन व्यक्तियों का दर्शकों से संक्षिप्त परिचय कराया और उनकी विशेषताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। सह-संयोजक डॉ. सीएम सेठ ने उधमपुर के विभिन्न प्राकृतिक जल संसाधनों, विशेष रूप से उधमपुर की बाउली, को मीठे पानी की खपत के लिए जीवन रेखा के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. सुधीर सिंह ने विरासत का अवलोकन कराया और विशेष रूप से मातृभाषा को आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया। प्रमुख बैंकर अनिल पाबा ने उधमपुर की निर्मित विरासत, विशेष रूप से क्रिमची मंदिरों और रामनगर किले के बारे में विस्तार से चर्चा की और छात्रों से सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की उनकी जिम्मेदारी के बारे में अपील की।
कार्यक्रम के सबसे आकर्षक वक्ताओं और प्रस्तुतकर्ताओं में से एक, इंटैक के आजीवन सदस्य श्री कृपाल सिंह थे, जिन्होंने एक पीपीटी के माध्यम से क्षेत्र की कला और शिल्प के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें परोला, बाँस, पेंटिंग के रंग और चावल की भूसी जैसे स्थानीय उत्पादों से बनी कला पर प्रकाश डाला गया।
इंटैक उधमपुर चैप्टर के एक अन्य सदस्य अशोक शर्मा, सेवानिवृत्त, अंग्रेजी के वरिष्ठ व्याख्याता ने भी क्षेत्र के विभिन्न जातीय खाद्य पदार्थों जैसे बतरोड़, कलारी, बबरू, खमीरा, मणि, मदरा आदि पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
जीडीसी रामनगर के डॉ. पंकज सारस्वत ने एनईपी-2020 के अंतर्गत छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप का अवलोकन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की संपूर्ण कार्यवाही समन्वयक ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप और विभागाध्यक्ष इतिहास, महिला कालेज प्रो. यश पॉल के समन्वय में आयोजित की गई। उन्होंने छात्रों को कला, वास्तुकला, संस्कृति, मूल्यों, विश्वासों और किसी भी समाज के निर्माण में सांस्कृतिक विरासत के इन सभी गुणों की भूमिका को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की संपूर्ण गतिविधियां भारतीय राष्ट्रीय न्यास कला एवं सांस्कृतिक विरासत द्वारा प्रायोजित थीं।
फोटो सहित
इस अवसर पर औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन जीडीसी रामनगर के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. मनमोहन सिंह ने प्रस्तुत किया। सभी प्रतिभागियों को एक साधारण डोगरा भोजन परोसा गया।