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Udhampur News: शहीदी दिवस पर गुरु अर्जुन देव सिंह जी को किया याद

Tue, 11 Jun 2024 05:05 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर Updated Tue, 11 Jun 2024 05:05 AM IST
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गुरुद्वारा सिंह सभा उधमपुर में हुआ कार्यक्रम, उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। सिख पंथ के 5वें गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर उधमपुर के गुरुद्वारा सिंह सभा में सोमवार को एक कार्यक्रम हुआ। इसमें सुबह से ही गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में संगत ने पहुंच कर माथा टेका और गुरु के बलिदान को याद किया। वहीं, ग्रंथियों ने संगत से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम में सोमवार सुबह शहीदी दिवस पर लगभग साढ़े 11 बजे गुरुद्वारे में कार्यक्रम हुआ। इसमें गुरु अर्जुन देव जी के बलिदान एवं संघर्षमयी जीवन पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद छबील एवं लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारे में आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। कमेटी के मुख्य सेवादार जसपाल सिंह ने बताया कि सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी महाराज को मुगल बादशाह जहांगीर ने 1606 को लाहौर में शहीद कर दिया था। शहीदी के समय मियां मीर ने गुरु अर्जुन देव जी से पूछा कि आपके शरीर पर छाले पड़ रहे हैं। इसके बावजूद आप शांत हैं। तब गुरु अर्जुन देव जी ने कहा था कि जितने जिस्म पर पड़ेंगे छाले, उतने सिख होंगे सदके वाले। यानि मेरे शरीर में जितने छाले पड़ेंगे, उतरे हजारों-करोड़ों सदके वाले सिखों का जन्म होगा। जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने गुरु के शहीदी दिवस को मीठे पानी वाला गुरुपर्व नहीं बल्कि शहादत के रूप में स्मरण करने का संकल्प लेने वाला पर्व बताया। उनका कहना था कि हर सिख को उनकी शहीदी से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी शहादत को अपने जहन में रखना चाहिए। उनका इतिहास पढ़ना चाहिए, ताकि जीवन में आने वाली किसी भी विषम परिस्थिति में अपने मार्ग से डगमगाएं नहीं। गुरु जी को गर्म तवे पर बैठाकर उन पर गर्म रेत डाली जाती रही। इसके बावजूद वे शांत रहे। उनका शरीर तप रहा था, लेकिन उनका मन अकाल पुरख से जुड़ा हुआ था। हमें भी उनकी तरह ही अडोल रहना चाहिए। उनकी शहादत को लासानी (अनोखी) शहादत कहा जाता है। उनकी याद में ही छबील लगाई जाती है। जो जून की गर्मी में मानवता के नाते लोगों को शीतलता प्रदान करने की एक पहल है। उन्होंने सभी सिखों से अपील की है कि वे गुरु साहिब के इतिहास को जरूर पढ़ें। यही असल में शहीदी गुरु पर्व मनाना होगा।
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फोटो सहित
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