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बैक टू विलेज के अभियान के तहत 106 पंचायतों में पहुंचे अधिकारी
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उधमपुर में छात्राओं को जानकारी देती शिक्षिकाएं।
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्य और ग्रामीणों की समस्याओं केे सुनने के लिए बैक टू विलेज अभियान के दूसरे चरण के पहले दिन सोमवार को जिले की 106 पंचायतों में डीसी उधमपुर सहित सभी सरकारी अधिकारी पहुंचे और लोगों की परेशानियों को सुना। हालांकि पहले चरण के मुकाबले में दूसरे चरण में ग्रामीणों में इस अभियान को लेकर कुछ खास उत्साह नजर नहीं आया। अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए बहुत कम ग्रामीण पहुंचे।
गौरतलब है कि जून 2019 में बैक टू विलेज अभियान की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में बहुत ही उत्साह और उम्मीद के साथ ग्रामीणों ने इस अभियान में हिस्सा लेकर अपनी परेशानियों को रखा था। महीनों गुजरने के बाद परेशानियां दूर नहीं हुई तो सबके हाथ निराशा लगी थी। जब दूसरे चरण का एलान हुआ था तो इस बार ग्रामीणों ने इस अभियान से कुछ ज्यादा उम्मीदें नहीं लगाई। दूसरे चरण के लिए सुबह आठ बजे से सरकारी अधिकारियों का पंचायतों की तरफ रवाना होना शुरू हो गया था। पहले दिन 120 अधिकारियों का 120 पंचायतों में पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित रखा गया था। लेकिन 106 पंचायतों में 106 अधिकारी ही पहुंचे। अधिकारी जब पंचायत घर व अन्य स्थानों पर पहुंचे तो बहुत कम ग्रामीण अपनी परेशानी को रखने के लिए पहुंचे थे। जो पहुंचे हुए थे उन्होंने बिजली, पानी, सड़क, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी, सड़कों की हालत खराब, मनरेगा की दिहाड़ी राशि जारी करने व अन्य कई प्रकार की परेशानियों को रखा। हर बार की तरफ ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद अधिकारियों ने अपनी डायरी में सब कुछ नोट किया। रात तक अधिकारी पंचायत घर व अन्य स्थानों पर बैठे हुए थे और ग्रामीण भी बारी बारी से अपनी बात को रखने के लिए पहुुंच रहे थे। सोमवार की रात अधिकारी पंचायत में ही गुजारेंगे और मंगलवार को भी दिन भर पंचायत में रहकर लोगों की परेशानियों को सुनने के साथ ग्रामीण इलाकों का दौरा करेंगे और शाम के समय अपने घरों को लौट जाएंगे। दौरे के दौरान ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की भी जानकारी देकर जागरूक किया गया।
स्कूल व स्वास्थ्य केंद्रों जाकर जांची सुविधाएं
अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के साथ पंचायतों में मौजूद सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों का भी दौरा किया। स्कूलों में जाकर अधिकारियों ने विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं को जांचा। मिड-ड-मील की जांच की। विद्यार्थियों से बात कर उनकी परेशानी को सुना। स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर भी मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच की। कमियों को अपनी डायरी में नोट किया।
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बंद पड़े विकास कार्यों का लिया जायजा
अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की भी जांच की। कई पंचायतों में विकास कार्य बंद पड़े थे। कुुछ स्थानों पर स्कूल की इमारत का निर्माण कार्य बंद पड़ा था तो कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की इमारत का काम बंद पड़ा है। ग्रामीणों ने इसको लेकर काफी रोष प्रकट किया और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की।
ये अधिकारी पहुंचे गांव
डीसी डा. पीयूष सिंगला, डायरेक्टर रुरल सेनिटेशन लीना पाधा, रजिस्ट्रार जेएंडके स्पेशल ट्रिब्युनल नीतू गुप्ता, डायरेक्टर हार्टीकल्चर जम्मू राज कुमार कटोच, एडिशनल सेक्रेटरी गवर्नमेंट रुरल डेवलपमेंट एंउ पंचायती राज राकेश कुमार, डिप्टी सेक्रेटरी फाइनांस डा. जाकिर, मनीश सरीन, स्मीता सेठी।
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गौरतलब है कि जून 2019 में बैक टू विलेज अभियान की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में बहुत ही उत्साह और उम्मीद के साथ ग्रामीणों ने इस अभियान में हिस्सा लेकर अपनी परेशानियों को रखा था। महीनों गुजरने के बाद परेशानियां दूर नहीं हुई तो सबके हाथ निराशा लगी थी। जब दूसरे चरण का एलान हुआ था तो इस बार ग्रामीणों ने इस अभियान से कुछ ज्यादा उम्मीदें नहीं लगाई। दूसरे चरण के लिए सुबह आठ बजे से सरकारी अधिकारियों का पंचायतों की तरफ रवाना होना शुरू हो गया था। पहले दिन 120 अधिकारियों का 120 पंचायतों में पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित रखा गया था। लेकिन 106 पंचायतों में 106 अधिकारी ही पहुंचे। अधिकारी जब पंचायत घर व अन्य स्थानों पर पहुंचे तो बहुत कम ग्रामीण अपनी परेशानी को रखने के लिए पहुंचे थे। जो पहुंचे हुए थे उन्होंने बिजली, पानी, सड़क, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी, सड़कों की हालत खराब, मनरेगा की दिहाड़ी राशि जारी करने व अन्य कई प्रकार की परेशानियों को रखा। हर बार की तरफ ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद अधिकारियों ने अपनी डायरी में सब कुछ नोट किया। रात तक अधिकारी पंचायत घर व अन्य स्थानों पर बैठे हुए थे और ग्रामीण भी बारी बारी से अपनी बात को रखने के लिए पहुुंच रहे थे। सोमवार की रात अधिकारी पंचायत में ही गुजारेंगे और मंगलवार को भी दिन भर पंचायत में रहकर लोगों की परेशानियों को सुनने के साथ ग्रामीण इलाकों का दौरा करेंगे और शाम के समय अपने घरों को लौट जाएंगे। दौरे के दौरान ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की भी जानकारी देकर जागरूक किया गया।
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स्कूल व स्वास्थ्य केंद्रों जाकर जांची सुविधाएं
अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के साथ पंचायतों में मौजूद सरकारी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों का भी दौरा किया। स्कूलों में जाकर अधिकारियों ने विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं को जांचा। मिड-ड-मील की जांच की। विद्यार्थियों से बात कर उनकी परेशानी को सुना। स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर भी मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच की। कमियों को अपनी डायरी में नोट किया।
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बंद पड़े विकास कार्यों का लिया जायजा
अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की भी जांच की। कई पंचायतों में विकास कार्य बंद पड़े थे। कुुछ स्थानों पर स्कूल की इमारत का निर्माण कार्य बंद पड़ा था तो कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की इमारत का काम बंद पड़ा है। ग्रामीणों ने इसको लेकर काफी रोष प्रकट किया और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की।
ये अधिकारी पहुंचे गांव
डीसी डा. पीयूष सिंगला, डायरेक्टर रुरल सेनिटेशन लीना पाधा, रजिस्ट्रार जेएंडके स्पेशल ट्रिब्युनल नीतू गुप्ता, डायरेक्टर हार्टीकल्चर जम्मू राज कुमार कटोच, एडिशनल सेक्रेटरी गवर्नमेंट रुरल डेवलपमेंट एंउ पंचायती राज राकेश कुमार, डिप्टी सेक्रेटरी फाइनांस डा. जाकिर, मनीश सरीन, स्मीता सेठी।