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Udhampur News: गेंदे के साथ लिलियम से महकेगी फूलों की घाटी
Mon, 10 Jun 2024 06:04 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 10 Jun 2024 06:04 AM IST
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सीएसआईआर-आईआईआईएम के वैज्ञानिकों ने भद्रवाह का दौरा कर स्थिति का लिया जायजा
पुष्प उत्पादकों में वितरित किए बीज नई किस्म से करवाया रूबरू
संवाद न्यूज एजेंसी
भद्रवाह। भद्रवाह को फूलों की घाटी बनाने की पहल को जारी रखते हुए केंद्र सरकार की पुष्प कृषि मिशन के तहत डॉ. इकरा फारूक के नेतृत्व में सीएसआईआर-आईआईआईएम के वैज्ञानिकों ने रविवार को भद्रवाह का दौरा किया। इस दौरान टीम ने गेंदे के खेतों का भी निरीक्षण किया। किसानों में बीज वितरित किए और उच्च उपज देने वाली कट फ्लावर किस्म लिलियम की स्थिति का भी निरीक्षण किया।
सीएसआईआर भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान ने सीएसआईआर पुष्पकृषि मिशन के तहत भद्रवाह घाटी में गेंदा, ग्लेडियोलस, लिलियम, लैवेंडर और बल्गेरियाई गुलाब सहित फूलों की विभिन्न किस्मों की खेती में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह पहल एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। क्योंकि, यह पहली बार है जब सीएसआईआर-आईआईआईएम ने यहां पर लिलियम किस्मों की सफलतापूर्वक खेती की है। डॉ. इकरा फारूक ने कहा कि विदेशी और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फूलों की विभिन्न किस्मों को उगाने के क्षेत्र में सफलता को देखना दिल को छू लेने वाला है। पहले लैवेंडर, मैरीगोल्ड और अब लिलियम की बारी है। 2023 में पैन इंडिया फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत यहां पेश किया था। परिणाम देखना बहुत अच्छा लग रहा है। क्योंकि पिछले साल जो लिलियम बल्ब वितरित किए थे, वे बेहतरीन गुणवत्ता वाली कलियों में विकसित हुए हैं। यह निश्चित रूप से फ्लोरीकल्चर मिशन की सफलता को इंगित कर रहा है।
लिलियम की खेती के लिए उत्तम है भद्रवाह की मिट्टी, जलवायु
डॉ. इकरा ने कहा कि घाटी की अनुकूल जलवायु और मिट्टी की स्थिति इसे लिलियम की खेती के लिए उपयुक्त बनाती है। महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर प्रदान करती है और इस क्षेत्र को उच्च गुणवत्ता वाले फूलों के उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करती है।
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पुष्प उत्पादकों में वितरित किए बीज नई किस्म से करवाया रूबरू
संवाद न्यूज एजेंसी
भद्रवाह। भद्रवाह को फूलों की घाटी बनाने की पहल को जारी रखते हुए केंद्र सरकार की पुष्प कृषि मिशन के तहत डॉ. इकरा फारूक के नेतृत्व में सीएसआईआर-आईआईआईएम के वैज्ञानिकों ने रविवार को भद्रवाह का दौरा किया। इस दौरान टीम ने गेंदे के खेतों का भी निरीक्षण किया। किसानों में बीज वितरित किए और उच्च उपज देने वाली कट फ्लावर किस्म लिलियम की स्थिति का भी निरीक्षण किया।
सीएसआईआर भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान ने सीएसआईआर पुष्पकृषि मिशन के तहत भद्रवाह घाटी में गेंदा, ग्लेडियोलस, लिलियम, लैवेंडर और बल्गेरियाई गुलाब सहित फूलों की विभिन्न किस्मों की खेती में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह पहल एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। क्योंकि, यह पहली बार है जब सीएसआईआर-आईआईआईएम ने यहां पर लिलियम किस्मों की सफलतापूर्वक खेती की है। डॉ. इकरा फारूक ने कहा कि विदेशी और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फूलों की विभिन्न किस्मों को उगाने के क्षेत्र में सफलता को देखना दिल को छू लेने वाला है। पहले लैवेंडर, मैरीगोल्ड और अब लिलियम की बारी है। 2023 में पैन इंडिया फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत यहां पेश किया था। परिणाम देखना बहुत अच्छा लग रहा है। क्योंकि पिछले साल जो लिलियम बल्ब वितरित किए थे, वे बेहतरीन गुणवत्ता वाली कलियों में विकसित हुए हैं। यह निश्चित रूप से फ्लोरीकल्चर मिशन की सफलता को इंगित कर रहा है।
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लिलियम की खेती के लिए उत्तम है भद्रवाह की मिट्टी, जलवायु
डॉ. इकरा ने कहा कि घाटी की अनुकूल जलवायु और मिट्टी की स्थिति इसे लिलियम की खेती के लिए उपयुक्त बनाती है। महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर प्रदान करती है और इस क्षेत्र को उच्च गुणवत्ता वाले फूलों के उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करती है।
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