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Udhampur News: श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया बच्छ दुआ पर्व
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उधमपुर। देविका घाट पर बच्छ दुआ व्रत के अनुष्ठान पूरे करती महिलाएं: संवाद
-परिवार और बच्चों की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने दिनभर रखा उपवास
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले भर में मंगलवार को बच्छ दुआ (वत्स द्वादशी) व्रत का पर्व धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। महिला श्रद्धालुओं ने उपवास रखा और धार्मिक विधिविधान से व्रत के धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर परिवार सहित बच्चों की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना की।
इसको लेकर शहर में अलसुबह से ही महिलाओं का पावन देविका तट पर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ ही संख्या में इजाफा होता चला गया और शाम तक देविका तट पर मेले सा माहौल बना रहा। इस मौके पर पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के भी कडे प्रबंध किए गए थे।
पूजन करने पंहुची पूजा देवी, राजकुमारी, बिंदिया शर्मा, रीना गुप्ता व अन्य ने बताया कि बच्छु दुआ पर्व के अनुसार 13 महिलाएं एक समूह बनाती है और फिर बीच में 13 प्रकार के फल, 13 पत्थर और 13 रोटियां रख कर परिक्रमा करती हैं। बीच में आटे के साथ तैयार गाय व बछड़े की प्रतिमा भी रखी जाती है। साथ वह दिनभर उपवास रखती हैं। राधा कृष्ण मंदिर में भजन-कीर्तन और बच्छ दुआ की कथा सुनते और सुनाते हैं।
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डुग्गर संस्कृति में बच्छ दुआ पर्व का बहुत ही महत्व है। इस व्रत को विशेष तौर पर बच्चों की दीर्घायु और परिवार की सुख-शांति के लिए रखा जाता है। कथा सुना कर आज के दिन के बारे में महिलाओं को विस्तार से बताया जाता है। जिनके घर में बेटे का जन्म हुआ होता है या फिर जिस घर में किसी की शादी हुई होती है तो पूजन करने के साथ एक सूट को मंदिर में चढ़ाना होता है। पूजन के बाद महिलाएं पानी पी सकती हैं और शाम के समय फल खा सकती हैं। व्रत को दूसरे दिन पूजन के बाद भोजन करके खोला जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले भर में मंगलवार को बच्छ दुआ (वत्स द्वादशी) व्रत का पर्व धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। महिला श्रद्धालुओं ने उपवास रखा और धार्मिक विधिविधान से व्रत के धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर परिवार सहित बच्चों की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना की।
इसको लेकर शहर में अलसुबह से ही महिलाओं का पावन देविका तट पर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ ही संख्या में इजाफा होता चला गया और शाम तक देविका तट पर मेले सा माहौल बना रहा। इस मौके पर पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के भी कडे प्रबंध किए गए थे।
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पूजन करने पंहुची पूजा देवी, राजकुमारी, बिंदिया शर्मा, रीना गुप्ता व अन्य ने बताया कि बच्छु दुआ पर्व के अनुसार 13 महिलाएं एक समूह बनाती है और फिर बीच में 13 प्रकार के फल, 13 पत्थर और 13 रोटियां रख कर परिक्रमा करती हैं। बीच में आटे के साथ तैयार गाय व बछड़े की प्रतिमा भी रखी जाती है। साथ वह दिनभर उपवास रखती हैं। राधा कृष्ण मंदिर में भजन-कीर्तन और बच्छ दुआ की कथा सुनते और सुनाते हैं।
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डुग्गर संस्कृति में बच्छ दुआ पर्व का बहुत ही महत्व है। इस व्रत को विशेष तौर पर बच्चों की दीर्घायु और परिवार की सुख-शांति के लिए रखा जाता है। कथा सुना कर आज के दिन के बारे में महिलाओं को विस्तार से बताया जाता है। जिनके घर में बेटे का जन्म हुआ होता है या फिर जिस घर में किसी की शादी हुई होती है तो पूजन करने के साथ एक सूट को मंदिर में चढ़ाना होता है। पूजन के बाद महिलाएं पानी पी सकती हैं और शाम के समय फल खा सकती हैं। व्रत को दूसरे दिन पूजन के बाद भोजन करके खोला जाता है।