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पाकिस्तान से घुसपैठ और ड्रोन का वार रोकने के लिए 1284 जवान हो रहे तैयार

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उधमपुर। भारत-पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ के लिए बनाई जा रही सुरंगे और ड्रोन सबसे बड़ी चुनौती हैं। इसे रोकने के लिए सहायक प्रशिक्षण केंद्र उधमपुर में 1284 जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जवानों को बताया जा रहा है कि किस तरह से सुरंग का पता लगाया जा सकता है और ड्रोन को सीमा में प्रवेश करने से रोका जा सकता है। अब यह ट्रेनिंग का अहम हिस्सा बनने लगा है। इसके जरिये आतंकियों की हर साजिश नाकाम करेंगे। ये बातें सीमा सुरक्षा बल के सहायक प्रशिक्षण केंद्र उधमपुर में सोमवार को बीएसएफ के आईजी प्रदीप कत्याल ने कही।गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर उधमुपर में आईजी ने विशेष प्रेसवार्ता बुलाई गई। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात के मद्देनजर सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों को विशेष तौर पर एंटी ड्रोन और एंटी टनल कोर्स करवाए जा रहे हैं।
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एंट्री ड्रोन को लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बॉर्डर पर तैनात जवानों को आधुनिक हथियारों के साथ आधुनिक निगरानी उपकरण भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। पहले इन उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर इनको इस्तेमाल करने का अवसर दिया जाता है। आईजी ने कहा कि जवानों को बर्फबारी के दौरान आतंकियों से निपटने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही नक्सलवाद के साथ निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। बीएसएफ आंतरिक सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रही है। पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में बीएसएफ को तैनात किया जाएगा। इसके साथ जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी हालात को संभालने में बीएसएफ ने अहम भूमिका निभाई है।
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कत्याल ने सहायक प्रशिक्षण के बारे में बताया कि एक जनवरी 1968 को कालूचक में इसकी शुरुआत हुई थी। स्थापना के बाद इसे पलौड़ा कैंप जम्मू और फिर 12 जुलाई, 1982 को रौन दि मेल, धार रोड उधमपुर में स्थापित किया गया।
अब तक इस केंद्र से 173 बैच में 53,570 आरक्षकों को बुनियादी एवं एडवांस कोंबेट प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें सीमा सुरक्षा बल के अलावा राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी, मेवाड़ भील कोर, इंडियन रिजर्व बटालियन, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स सर्विस, जेल वार्डन राजस्थान पुलिस के आरक्षक भी शामिल हैं। जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी, आंतरिक सुरक्षा में स्थानीय प्रशासन की सहायता, नक्सलवाद विरोधी अभियान या आतंकवाद के विरुद्ध ऑपरेशन का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
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प्रशिक्षण केंद्र में 1284 जवान सीख रहे सुरक्षा के गुर
आईजी ने बताया कि वर्तमान में उधमपुर सहायक प्रशिक्षण केंद्र में गुजरात के 554 और महाराष्ट्र के 730 कुल 1284 जवान पूरे कोविड प्रोटोकॉल के साथ बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनका प्रशिक्षण 19 मार्च, 2022 और दो अप्रैल, 2022 को पूरा हो रहा है। पास आउट होकर ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए तैनात हो जाएंगे। 44 सप्ताह तक चलने वाले कठिन प्रशिक्षण में इन नव आरक्षकों को विभिन्न प्रकार के हथियारों और निगरानी उपकरणों का प्रयोग करने के साथ शारीरिक दक्षता, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद एवं नक्सलवाद ग्रस्त इलाकों में होने वाले ऑपरेशनों, आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो इन्हें एक सबल और सक्षम सीमा प्रहरी बनाएगा। इस केंद्र में नव आरक्षकों के लिए विभिन्न प्रोफेशनल क्लब बनाए गए हैं, जो कि इनको बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा विभिन्न खेल एवं ललित कला गतिविधियों जैसे पेंटिंग, निशानेबाजी, कई आउटडोर खेलों, संगीत, फोटोग्राफी आदि का प्रशिक्षण देते हैं।

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एनएसजी कमांडो भी इसी केंद्र से किए जा रहे तैयार
देश की महत्वपूर्ण फोर्स एनएसजी के कमांडो को कन्वर्जन का प्री इंडेक्शन प्रशिक्षण हर साल इस केंद्र से दिया जाता है। उधमपुर के प्रशिक्षु शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी के अधिकारी समय समय पर इस केंद्र का दौर कर प्रशिक्षण गतिविधियों का जायजा लेते हैं। इस उधमपुर के इस केंद्र में स्थित नेशनल लेबल की फायरिंग रेंज न सिर्फ इस केंद्र के कार्मिकों एवं प्रशिक्षुओं को फायरिंग अभ्यास देने में प्रयोग होता है। बल्कि उधमपुर में तैनात सेना की विभिन्न वाहिनियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ राज्य पुलिस को भी चांदमारी/ट्रेनिंग के लिए मुहैया कराया जाता है।
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