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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Udhampur News ›   Terrorists plotting to turn Reasi's forests into a transit corridor again.

Terrorist Activities: रियासी के जंगलों पर आतंकियों की नजर, फिर से ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की फिराक में आतंकी

Wed, 19 Aug 2026 11:23 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, पाैनी/उधमपुर
अमर उजाला नेटवर्क, पाैनी/उधमपुर Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 19 Aug 2026 11:23 AM IST
सार

रियासी और उधमपुर के जंगलों में लगातार संदिग्ध गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, क्योंकि आतंकियों द्वारा इन दुर्गम इलाकों को ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका है।

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Terrorists plotting to turn Reasi's forests into a transit corridor again.
सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर में सुरक्षाबलों के सघन अभियानों, तकनीकी निगरानी और मजबूत आतंकरोधी ग्रिड के चलते आतंकी संगठनों की कमर टूट चुकी है। घाटी में छिपने और सक्रिय रहने की जगह सीमित होने के बाद आतंकियों ने अपनी चाल बदली है। आतंकी अब जम्मू संभाग के शांतिपूर्ण जिलों रियासी और उधमपुर को नया ठाैर और ट्रांजिट काॅरिडोर बनाने की फिराक में हैं।

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रियासी के पौनी तहसील अंतर्गत सुधीन के बाद उधमपुर के जोफड़ और अब मजालता इलाके में लगातार संदिग्धों की हलचल इसी सुनियोजित षड्यंत्र की कड़ी मानी जा रही है। रियासी और आसपास की ये पहाड़ी बेल्ट रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रही है। पूर्व में भी इस क्षेत्र से सटे जंगलों और दुर्गम रास्तों का इस्तेमाल आतंकी व संदिग्ध तत्व घुसपैठ तथा छिपने के लिए करते रहे हैं। नियंत्रण रेखा से बहुत दूर स्थित रियासी जिला पिछले दो दशकों से शांतिपूर्ण था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है।

सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस इलाके के जंगलों को आतंकी अपनी मूवमेंट के लिए गलियारे के रूप में फिर से सक्रिय करने की फिराक में हैं। किसी एक जिले में सुरक्षाबलों का दबाव या तलाशी अभियान शुरू होते ही आतंकी इन पहाड़ी एवं जंगली रास्ते से दूसरे जिले की सीमाओं में प्रवेश कर जाते हैं। सीमा पार करने के बाद आतंकवादी सीधे कश्मीर जाने के बजाय जम्मू संभाग के इन दुर्गम इलाकों को सुरक्षित ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल करने की चाल चल रहे हैं।

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इसलिए संवेदनशील है रियासी जिला
मई 2022: माता वैष्णो देवी के दर्शन कर लौट रही तीर्थयात्रियों की बस में आतंकियों द्वारा बम लगाकर विस्फोट किया गया, जिसमें चार श्रद्धालुओं की जान गई और 24 घायल हुए।

जुलाई 2022 : स्थानीय निवासियों ने रियासी जिले के टुकसान ढोक में भारी हथियारों से लैस लश्कर के दो आतंकवादियों को पकड़ लिया था और उन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंप दिया था। दोनों उस वक्त राजोरी से कश्मीर जा रहे थे।

जून 2024: शिवखोड़ी मंदिर से दर्शन कर कटड़ा लौट रही श्रद्धालुओं की बस पर आतंकियों ने पौनी के कंडा-तेरियाथ के पास घात लगाकर गोलीबारी की गई। ड्राइवर को गोली लगने से बस 250 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिसमें 10 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई और 30 से अधिक घायल हुए।

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पीर पंजाल इलाके को खुद के लिए सुरक्षित मानते हैं आतंकी
राजोरी, पुंछ और रियासी जिले 1990 के दशक में आतंकवाद का केंद्र रहे थे। बाद में यहां शांति बहाल हो गई। 2021 से राजोरी व पुंछ में आतंकी गतिविधियों में फिर तेजी आई है। पूर्व सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, रणनीतिक रूप से ये तीनों जिले पहाड़ी भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों के कारण बेहद संवेदनशील हैं। नियंत्रण रेखा का करीब 200 किलोमीटर हिस्सा राजोरी और पुंछ से होकर गुजरता है। कश्मीर को जम्मू से अलग करने वाली पीर पंजाल रेंज भी इन तीन जिलों से गुजरती है, जिसका इस्तेमाल एलओसी पार करने वाले आतंकी घाटी में घुसपैठ के रास्ते के रूप में करते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति आतंकियों के लिए ढाल का काम करती है। जब भी सुरक्षाबलों का दबाव बढ़ता है तो ये घने जंगल और ऊंचे पहाड़ आतंकियों को एक जिले से दूसरे जिले में भागने और छिपने के लिए सुरक्षित कवर प्रदान करते हैं।

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