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चीख-पुकार से दहल उठा पिठार गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, रामबन
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:01 AM IST
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बनिहाल तहसील के पिठार गांव के लिए शनिवार की शाम मनहूस साबित हुई। गांव के दर्जनों परिवार की महिलाएं अपने कमाऊ पूत और पति के काम से लौटने का इंतजार कर रही थीं।
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दिनभर जीतोड़ मेहनत कर लौटने के बाद उनके लिए खाने का बंदोबस्त कर रही थीं। लेकिन, अचानक गांव में टिप्पर हादसे की जानकारी मिलते ही जैसे दर्जनों परिवार के लोगों को सांप सूंघ गया।
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पूरे पिठार गांव में हायतौबा मच गया। ग्रामीणों का मानो एक रैला उप जिला अस्पताल बनिहाल की ओर भागने लगा। महिलाओं और बच्चों ने चीख-पुकार शुरू कर दी। गांव के हर मजदूर के परिवार की महिलाएं खुदा से उसकी सलामती की दुआ करने लगीं।
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शाम के समय चीत्कार से दूर-दूर तक का माहौल मातमी हो गया गया। दूसरी तरफ अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हर कोई अपने का हाल जानने के लिए बेताब थे।
हादसे के करीब डेढ़ घंटे बाद तक यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि मरने वालों में कौन-कौन शामिल हैं और घायलों में कौन। पूरी तरह पुष्टि होने के बाद बनिहाल अस्पताल के कर्मचारियों ने मृतकों की सूची जारी कर दी। उसके बाद साफ हो गया कि हादसे के शिकार सभी मजदूर पिठार गांव के ही रहने वाले हैं।
केवल टिप्पर का चालक मगरकोट का रहने वाला है। इस खुलाके के बाद पिठार गांव में कोहराम की स्थिति बन गई। सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की चीत्कार से आसपास के लोगों का कलेजा भी चाक हो रहा था।
कई लोग घायलों को लेकर घाटी भागे
घायलों के प्राथमिक उपचार के बाद कई के रिश्तेदार उन्हें लेकर श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों की ओर भागे। जबकि कुछ का इलाज वहीं चल रहा है। देर रात तक अस्पताल में घायलों और मृतकों के रिश्तेदार औपचारिकताएं पूरी करने में जुटे थे।
पिठार गांव के अल्ताफ अहमद ने बताया कि हादसे की जानकारी से पूरा गांव पहले ही कांप गया था। क्योंकि सबको पता था कि इस गांव से बहुत से मजदूर ग्रेेफ के तहत सड़क पर काम करते हैं और शाम को टिप्पर से सभी को छोड़ा जाता है।