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Udhampur News: एसएमवीडीयू के छात्रों ने राष्ट्रीय कार्यशाला में लिया भाग
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जम्मू के आईआईटी राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने पहुचे एसएमवीड़ीयू व अन्य
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा । श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) के भाषा और साहित्य संकाय के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के चुनिंदा समूह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जम्मू में आयोजित तकनीकी परिदृश्य में आदिवासी संस्कृति और भाषा को लाना नामक एक अग्रणी कार्यशाला में भाग लिया।
इस कार्यक्रम में उभरते तकनीकी ढांचे के भीतर आदिवासी भाषाओं और परंपराओं को संरक्षित और एकीकृत करने के अभिनव तरीकों की खोज करने के लिए विद्वानों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं को एक साथ लाया गया। छात्रों के साथ भाषा और साहित्य संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख डॉ.अनुराग कुमार भी थे जिन्होंने जम्मू और कश्मीर के गुज्जरों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों को नेविगेट करना सत्र में एक पैनलिस्ट के रूप में भी योगदान दिया।
उनकी अंतर्दृष्टि ने गुज्जर सांस्कृतिक पहचान की जटिलताओं और समृद्धि और आधुनिक तकनीकी प्लेटफार्मों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक ज्ञान को जोड़ने की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला ने अंत विषय संवाद के महत्व और समावेशी, सांस्कृतिक रूप से जागरूक नवाचार का समर्थन करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। भाषा एवं साहित्य स्कूल की भागीदारी कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों की आवाज को बढ़ाने वाले सहयोगात्मक प्रयासों के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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कटड़ा । श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) के भाषा और साहित्य संकाय के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के चुनिंदा समूह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जम्मू में आयोजित तकनीकी परिदृश्य में आदिवासी संस्कृति और भाषा को लाना नामक एक अग्रणी कार्यशाला में भाग लिया।
इस कार्यक्रम में उभरते तकनीकी ढांचे के भीतर आदिवासी भाषाओं और परंपराओं को संरक्षित और एकीकृत करने के अभिनव तरीकों की खोज करने के लिए विद्वानों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं को एक साथ लाया गया। छात्रों के साथ भाषा और साहित्य संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख डॉ.अनुराग कुमार भी थे जिन्होंने जम्मू और कश्मीर के गुज्जरों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों को नेविगेट करना सत्र में एक पैनलिस्ट के रूप में भी योगदान दिया।
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उनकी अंतर्दृष्टि ने गुज्जर सांस्कृतिक पहचान की जटिलताओं और समृद्धि और आधुनिक तकनीकी प्लेटफार्मों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक ज्ञान को जोड़ने की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला ने अंत विषय संवाद के महत्व और समावेशी, सांस्कृतिक रूप से जागरूक नवाचार का समर्थन करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। भाषा एवं साहित्य स्कूल की भागीदारी कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों की आवाज को बढ़ाने वाले सहयोगात्मक प्रयासों के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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