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पांच वर्ष से खुले में बैठ कर शिक्षा हासिल करने को मजबूर 42 विद्यार्थी
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उधमपुर के पंचैरी तहसील में खुले आसमान के नीचे शिक्षा हासिल करते प्राइमरी स्कूल गोंडा के विद्यार?
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर/पंचैरी। जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर पंचैरी तहसील के लटयार पंचायत में 42 बच्चे ठंड में खुले में शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। 2017 में आंधी के चलते स्कूल की उड़ी छत की पांच साल बाद भी मरम्मत नहीं हो पाई है। अभिभावक और शिक्षक कई शिक्षा विभाग और प्रशासन के समक्ष समस्या को उजागर कर चुके हैं, लेकिन आजतक किसी ने सुध नहीं ली है।
शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा अभियान सहित कई अन्य सरकारी योजनाओं के जरिए सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा कर रहा है, लेकिन जिले में हकीकत कुछ और ही है। आज भी कई स्कूल हैं, जिन्हें आजतक छत तक नसीब नहीं हुई है। पंचैरी तहसील की लटियार पंचायत का प्राइमरी स्कूल गोंडा भी सरकार की नजर इनायत को तरस रहा है।
2017 में आंधी के चलते स्कूल की इमारत क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद विद्यार्थी बाहर खुले में शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं। पांच साल बाद भी स्थिति जस के तस है। बारिश होने पर मजबूरन बच्चों को छुट्टी दी जाती है। ठंड में बच्चे जमीन पर बैठ कर शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल में शौचालय और पानी की भी सुविधा नहीं है। महेंद्र कुमार, शाम लाल, मुख्यातर चंद, बजीर सिंह आदि अभिभावकों ने बताया कि कई बार स्कूल की इमारत की मरम्मत करने व स्टाफ की कमी को दूर करने की मांग को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने रखा है। बैक टू विलेज के हर कार्यक्रम में भी इस परेशानी को प्रमुखता के उठाया है, लेकिन आजतक कुछ नहीं हुआ।
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ग्रामीण के घर तैयार हो रहा मिड-डे-मील
स्कूल की अपनी इमारत नहीं होने के कारण स्कूल के शिक्षक को मिड-डे-मील बनाने में भी बहुत परेशानी हो रही है। रसोई शेड नहीं होने पर मिड-डे-मील स्कूल के नजदीक ही एक ग्रामीण के घर तैयार किया जाता है।
एक शिक्षक के सहारे चल रहा प्राइमरी स्कूल गोंडा
प्राइमरी में विद्यार्थियों की संख्या 42 है, लेकिन एक शिक्षक को नियुक्त किया गया है। उक्त शिक्षक पर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, मिड-डे-मील का इंतजाम सहित अन्य व्यवस्थाएं करना बहुत मुश्किल हो रहा है। कई बार मांग उठाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने स्टाफ की कमी को दूर नहीं कर पाया है।
कई वर्षों से स्कूल की इमारत की मरम्मत की मांग को शिक्षा विभाग और प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं। कई ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। लेकिन आजतक आश्वासनों के सिवाए कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा बच्चे भुगतने को मजबूर हैं।
- कुलदीप कुमार, सरपंच, लटयार पंचायत
प्राइमरी स्कूल गोंडा की इमारत की समस्या की जानकारी नहीं है। प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में अतिरिक्त कमरों के निर्माण को मंजूरी मिली है। उसमें शायद इस स्कूल का नाम भी है। अगर नाम नहीं होगा तो भी स्कूल की हालत को सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।
- अरविन कुमार कौल, सीईओ, उधमपुर
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शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा अभियान सहित कई अन्य सरकारी योजनाओं के जरिए सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा कर रहा है, लेकिन जिले में हकीकत कुछ और ही है। आज भी कई स्कूल हैं, जिन्हें आजतक छत तक नसीब नहीं हुई है। पंचैरी तहसील की लटियार पंचायत का प्राइमरी स्कूल गोंडा भी सरकार की नजर इनायत को तरस रहा है।
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2017 में आंधी के चलते स्कूल की इमारत क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद विद्यार्थी बाहर खुले में शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं। पांच साल बाद भी स्थिति जस के तस है। बारिश होने पर मजबूरन बच्चों को छुट्टी दी जाती है। ठंड में बच्चे जमीन पर बैठ कर शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल में शौचालय और पानी की भी सुविधा नहीं है। महेंद्र कुमार, शाम लाल, मुख्यातर चंद, बजीर सिंह आदि अभिभावकों ने बताया कि कई बार स्कूल की इमारत की मरम्मत करने व स्टाफ की कमी को दूर करने की मांग को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने रखा है। बैक टू विलेज के हर कार्यक्रम में भी इस परेशानी को प्रमुखता के उठाया है, लेकिन आजतक कुछ नहीं हुआ।
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ग्रामीण के घर तैयार हो रहा मिड-डे-मील
स्कूल की अपनी इमारत नहीं होने के कारण स्कूल के शिक्षक को मिड-डे-मील बनाने में भी बहुत परेशानी हो रही है। रसोई शेड नहीं होने पर मिड-डे-मील स्कूल के नजदीक ही एक ग्रामीण के घर तैयार किया जाता है।
एक शिक्षक के सहारे चल रहा प्राइमरी स्कूल गोंडा
प्राइमरी में विद्यार्थियों की संख्या 42 है, लेकिन एक शिक्षक को नियुक्त किया गया है। उक्त शिक्षक पर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, मिड-डे-मील का इंतजाम सहित अन्य व्यवस्थाएं करना बहुत मुश्किल हो रहा है। कई बार मांग उठाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने स्टाफ की कमी को दूर नहीं कर पाया है।
कई वर्षों से स्कूल की इमारत की मरम्मत की मांग को शिक्षा विभाग और प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं। कई ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। लेकिन आजतक आश्वासनों के सिवाए कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा बच्चे भुगतने को मजबूर हैं।
- कुलदीप कुमार, सरपंच, लटयार पंचायत
प्राइमरी स्कूल गोंडा की इमारत की समस्या की जानकारी नहीं है। प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में अतिरिक्त कमरों के निर्माण को मंजूरी मिली है। उसमें शायद इस स्कूल का नाम भी है। अगर नाम नहीं होगा तो भी स्कूल की हालत को सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।
- अरविन कुमार कौल, सीईओ, उधमपुर