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परमात्मा हमेश भीतर प्रकट रहते हैं : सुभाष शास्त्री
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उधमपुर। फंग्याल रठियान में कथा करते हुए संत सुभाष शास्त्री। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। रत्ना मोती पैलेस फंग्याल रठियान उधमपुर में शिव महापुराण कथा के छठे दिन शनिवार को संत सुभाष शास्त्री ने कथा करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि जब पाप बढ़ेगा तब ही भगवान प्रकट होंगे। भगवान हमेशा भीतर प्रकट रहते हैं यदि भगवान इस समय नहीं हैं तो यह सृष्टि कैसे चल रही है।
असलियत में भगवान बाहर जब प्रकट होंगे-होंगे, पहले तो वह हम सब के भीतर ही हैं लेकिन कोई उन्हें जगा कर बैठा है तो कोई भूल कर। कोई उन्हें हर पल याद कर रहा है जबकि कोई उन्हें याद ही नहीं करता। शास्त्री महाराज ने कहा कि मनुष्य में सत्य के ज्ञान के साथ ही प्रेम का होना भी उनका प्रकट होना ही है, अर्थात जिसके हृदय में प्रेम प्रकट है, तो मानो प्रेम के रूप में प्रभु ही प्रकट हैं। आदमी में घमंड और पाखंड, राग-द्वेष का होना ही उसको भुलाना है। भगवान को याद करते ही वह हमारे दिलों में प्रकट हो जाते हैं और यह प्रकट होते हैं, तब मनुष्य साधु अर्थात सज्जन पुरुष हो जाता है।
यह संत महापुरुषों के विचार हैं, ध्यानपूर्वक सुने और इन्हें जीवन में धारण करके जीवन को धन्य करें। जिसका मन निर्मल है, वह हर पल प्रभु को याद करता है। मनुष्य पापी तभी होता है जब परमात्मा को याद नहीं करता और इस कारण वह मनुष्य से भी नीचे की योनियों में जन्म लेता है।
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उधमपुर। रत्ना मोती पैलेस फंग्याल रठियान उधमपुर में शिव महापुराण कथा के छठे दिन शनिवार को संत सुभाष शास्त्री ने कथा करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि जब पाप बढ़ेगा तब ही भगवान प्रकट होंगे। भगवान हमेशा भीतर प्रकट रहते हैं यदि भगवान इस समय नहीं हैं तो यह सृष्टि कैसे चल रही है।
असलियत में भगवान बाहर जब प्रकट होंगे-होंगे, पहले तो वह हम सब के भीतर ही हैं लेकिन कोई उन्हें जगा कर बैठा है तो कोई भूल कर। कोई उन्हें हर पल याद कर रहा है जबकि कोई उन्हें याद ही नहीं करता। शास्त्री महाराज ने कहा कि मनुष्य में सत्य के ज्ञान के साथ ही प्रेम का होना भी उनका प्रकट होना ही है, अर्थात जिसके हृदय में प्रेम प्रकट है, तो मानो प्रेम के रूप में प्रभु ही प्रकट हैं। आदमी में घमंड और पाखंड, राग-द्वेष का होना ही उसको भुलाना है। भगवान को याद करते ही वह हमारे दिलों में प्रकट हो जाते हैं और यह प्रकट होते हैं, तब मनुष्य साधु अर्थात सज्जन पुरुष हो जाता है।
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यह संत महापुरुषों के विचार हैं, ध्यानपूर्वक सुने और इन्हें जीवन में धारण करके जीवन को धन्य करें। जिसका मन निर्मल है, वह हर पल प्रभु को याद करता है। मनुष्य पापी तभी होता है जब परमात्मा को याद नहीं करता और इस कारण वह मनुष्य से भी नीचे की योनियों में जन्म लेता है।
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