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मनुष्य जन्म भगवान की असीम कृपा से मिला है : बाईगण
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वाधान में गांव-थाती में सद्भावना सत्संग समारोह आयोजित किया गया। इसमें काफी संख्या में स्थानीय और आसपास के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आत्म लाभ प्राप्त किया।
सत्संग के दौरान महात्मा शमा बाई, महात्मा त्रिपुरा बाई और महात्मा संयमी बाई ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। अपने विचारों में कहा कि मनुष्य जन्म भगवान की असीम कृपा से मिला है। इसके लिए देवतागण भी याचना करते हैं। देव दुर्लभ मानुष तन पाकर हमें चाहिए कि हम भगवान को अपने हृदय मंदिर में जानकर उसका निरंतर भजन ध्यान करें।
आगे समझाया कि मोह-माया का लोभ छोड़कर भगवान का भजन करो। सच्चा सुख और आनंद भगवान की भजन भक्ति में ही समाया हुआ है। उन्होंने कहा, जहां कोई अपना नहीं, सब अपने-अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे से प्रीति लगाए बैठे हैं।
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महाशिवरात्रि के पावन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए बाईगण ने कहा कि भगवान शंकर माता पार्वती से कहते हैं - गिरिजा संत समागम सम लाभ न कछु आन। बिनु हरि कृपा न होहिं गावहिं वेद पुराण।। उमा कहूं मैं अनुभव अपना। सत हरि भजन जगत सब सपना।। उमा ते लोग बड़े अभागे हरि भजन छोड़ विषय अनुरागे।। भावार्थ यह है कि भगवान की कृपा के बिना सत्संग की प्राप्ति नहीं होती और सत्संग मिलने के बराबर कोई लाभ नहीं। सच्चे संतों के संग से ही ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त होता है। भगवान शंकर कहते हैं कि ज्ञान मिलने के पश्चात विषय वासनाओं का त्याग कर भजन-ध्यान करने से ही कल्याण होगा।
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उधमपुर। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वाधान में गांव-थाती में सद्भावना सत्संग समारोह आयोजित किया गया। इसमें काफी संख्या में स्थानीय और आसपास के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आत्म लाभ प्राप्त किया।
सत्संग के दौरान महात्मा शमा बाई, महात्मा त्रिपुरा बाई और महात्मा संयमी बाई ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। अपने विचारों में कहा कि मनुष्य जन्म भगवान की असीम कृपा से मिला है। इसके लिए देवतागण भी याचना करते हैं। देव दुर्लभ मानुष तन पाकर हमें चाहिए कि हम भगवान को अपने हृदय मंदिर में जानकर उसका निरंतर भजन ध्यान करें।
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आगे समझाया कि मोह-माया का लोभ छोड़कर भगवान का भजन करो। सच्चा सुख और आनंद भगवान की भजन भक्ति में ही समाया हुआ है। उन्होंने कहा, जहां कोई अपना नहीं, सब अपने-अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे से प्रीति लगाए बैठे हैं।
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महाशिवरात्रि के पावन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए बाईगण ने कहा कि भगवान शंकर माता पार्वती से कहते हैं - गिरिजा संत समागम सम लाभ न कछु आन। बिनु हरि कृपा न होहिं गावहिं वेद पुराण।। उमा कहूं मैं अनुभव अपना। सत हरि भजन जगत सब सपना।। उमा ते लोग बड़े अभागे हरि भजन छोड़ विषय अनुरागे।। भावार्थ यह है कि भगवान की कृपा के बिना सत्संग की प्राप्ति नहीं होती और सत्संग मिलने के बराबर कोई लाभ नहीं। सच्चे संतों के संग से ही ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त होता है। भगवान शंकर कहते हैं कि ज्ञान मिलने के पश्चात विषय वासनाओं का त्याग कर भजन-ध्यान करने से ही कल्याण होगा।