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मिड-डे मील बनाने वाले बावर्चियों ने किया प्रदर्शन
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उधमपुर। स्थायी करने, मानदेय बढ़ाने व अन्य लंबित मांगों को लेकर मिड-डे मील बनाने वाले बावर्चियों ने मंगलवार को शहीद भगत सिंह पार्क में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो मजबूरन मिड-डे मील बनाना बंद करना पड़ेगा।
दोपहर करीब दो बजे मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले बावर्चियों ने शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान रंजीत कुमार व अन्य बावर्चियों ने बताया कि सरकार उन्हें मिड-डे मील बनाने के लिए एक दिन के 30 रुपये देती है। महीने में उन्हें करीब 900 रुपये मिलते हैं। स्कूलों में काम करते हुए 15 वर्ष से अधिक हो गए, लेकिन अभी तक उन्हें न तो स्थायी किया गया और न ही मानदेय बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षा विभाग की तरफ से कम से मनरेगा की दिहाड़ी जितना पैसा तो मिलना चाहिए। उनके लिए अब 900 रुपये मानदेय में काम करना संभव नहीं हो पा रहा है। इस पैसे से तो यात्री वाहन का किराया भी पूरा नहीं हो सका। इसलिए, उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उन्हें स्थायी करने के लिए कोई नीति तैयार की जाए, और अगर स्थायी नहीं करना है तो मानदेय में बढ़ोतरी कर राहत प्रदान की जाए।
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दोपहर करीब दो बजे मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले बावर्चियों ने शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान रंजीत कुमार व अन्य बावर्चियों ने बताया कि सरकार उन्हें मिड-डे मील बनाने के लिए एक दिन के 30 रुपये देती है। महीने में उन्हें करीब 900 रुपये मिलते हैं। स्कूलों में काम करते हुए 15 वर्ष से अधिक हो गए, लेकिन अभी तक उन्हें न तो स्थायी किया गया और न ही मानदेय बढ़ाया गया।
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उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षा विभाग की तरफ से कम से मनरेगा की दिहाड़ी जितना पैसा तो मिलना चाहिए। उनके लिए अब 900 रुपये मानदेय में काम करना संभव नहीं हो पा रहा है। इस पैसे से तो यात्री वाहन का किराया भी पूरा नहीं हो सका। इसलिए, उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उन्हें स्थायी करने के लिए कोई नीति तैयार की जाए, और अगर स्थायी नहीं करना है तो मानदेय में बढ़ोतरी कर राहत प्रदान की जाए।
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