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डीडीसी अध्यक्ष ने अपने कार्यालय में ही शुरू किया धरना
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फोटो...डीडीसी अध्यक्षा ने अपने कार्यालय परिसर में बेरोजगारों को रोजगार और पावर प्रोजेक्टो के भूस?
- फोटो : UDHAMPUR
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किश्तवाड़। जिले की डीडीसी अध्यक्ष पूजा ठाकुर ने अब तय किया कि डंगडोरू के बजाय वह अपने ही कार्यालय के परिसर में धरना देंगी। इसका आरंभ उन्होंने मंगलवार से कर दिया है।
गौरतलब है कि 12 दिनों से वह डंगडोरू दच्छन पक्कल-डूल बांध साइट पर धरना दे रही थीं। उनकी मांग थी कि भू-स्वामियों को उनकी भूमि का मुआवजा दिया जाए। साथ ही बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। जब मंडलायुक्त एवं एडीजीपी के किश्तवाड़ दौरे के दौरान उनकी बैठक हुई, तो उनकी मांगों को मात्र सुना गया। लेकिन, कोई फैसला नहीं हो पाया। जिसके बाद वह वहीं बैठक के बाद रोईं भी। उनके साथ उनके पति दच्छन के सरपंच बाबू लाल भी भी रोए।
डीडीसी अध्यक्ष का रोता हुआ वीडियो वायरल भी हो गया है। हालांकि मंगलवार को धरने के दौरान डीडीसी अध्यक्ष ने कहा कि अब वह दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी के पास जाएंगी। हो सके तो वह वहीं धरना भी देंगी।
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पावर प्रोजेक्टों में लगाए 90 प्रतिशत स्थानीय
पावर प्रोजेक्टों में लगाए लोगों में 90 प्रतिशत से अधिक लोग स्थानीय हैं। लगभग 35 ठेकेदारों को काम दिया है, जिसमें मात्र तीन लोग दूसरे राज्यों के हैं। अब कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उन पर गलत आरोप लगाया गया है कि बाहर के लोगों को रोजगार दिया गया है। इसलिए, मंडलायुक्त ने धरना देने वालों को सुना और मौके पर कहा कि इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद देखेंगे। परंतु, धरने पर बैठीं डीडीसी अध्यक्ष मौके पर ही कंपनियों पर दबाव डलवाना चाहती थीं। वह चाहती थीं कि फैसला उनके हक में हो। लेकिन, ऐसा कुछ हो न सका।
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गौरतलब है कि 12 दिनों से वह डंगडोरू दच्छन पक्कल-डूल बांध साइट पर धरना दे रही थीं। उनकी मांग थी कि भू-स्वामियों को उनकी भूमि का मुआवजा दिया जाए। साथ ही बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। जब मंडलायुक्त एवं एडीजीपी के किश्तवाड़ दौरे के दौरान उनकी बैठक हुई, तो उनकी मांगों को मात्र सुना गया। लेकिन, कोई फैसला नहीं हो पाया। जिसके बाद वह वहीं बैठक के बाद रोईं भी। उनके साथ उनके पति दच्छन के सरपंच बाबू लाल भी भी रोए।
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डीडीसी अध्यक्ष का रोता हुआ वीडियो वायरल भी हो गया है। हालांकि मंगलवार को धरने के दौरान डीडीसी अध्यक्ष ने कहा कि अब वह दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी के पास जाएंगी। हो सके तो वह वहीं धरना भी देंगी।
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पावर प्रोजेक्टों में लगाए 90 प्रतिशत स्थानीय
पावर प्रोजेक्टों में लगाए लोगों में 90 प्रतिशत से अधिक लोग स्थानीय हैं। लगभग 35 ठेकेदारों को काम दिया है, जिसमें मात्र तीन लोग दूसरे राज्यों के हैं। अब कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उन पर गलत आरोप लगाया गया है कि बाहर के लोगों को रोजगार दिया गया है। इसलिए, मंडलायुक्त ने धरना देने वालों को सुना और मौके पर कहा कि इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद देखेंगे। परंतु, धरने पर बैठीं डीडीसी अध्यक्ष मौके पर ही कंपनियों पर दबाव डलवाना चाहती थीं। वह चाहती थीं कि फैसला उनके हक में हो। लेकिन, ऐसा कुछ हो न सका।