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पीडीडी कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी बुलंद की आवाज
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उधमपुर। बिजली विभाग के निजीकरण करने के विरोध में पीडीडी के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार तीसरे दिन जारी रही। कर्मचारियों ने पीडीडी कार्यालय के बाहर सुबह से दोपहर तक धरना देकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सेना के हवाले सभी ग्रिड स्टेशन और रिसीविंग स्टेशन को किया गया है। कर्मचारियों को इससे कोई परेशानी नहीं है। उनकी मांग है कि सरकार निजीकरण के आदेश को जल्द वापस ले।
अनवर हुसैन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सुबह से दोपहर तक पीडीडी कार्यालय के बाहर धरना देकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय के कारण हजारों कर्मचारियों के पूरे परिवार का भविष्य खराब होने की कगार पर पहुंच गया है। कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा है कि उनके परिवारों का क्या होगा। सरकार ने बिना सोचे समझे ही यह निर्णय ले लिया है। निजीकरण को लेकर स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है।
कर्मचारियों को नहीं बताया जा रहा है कि उनको किस तरह से वेतन दिया जाएगा। उल्टा उनसे कई तरह के लाभ वापस लिए जा रहे हैं। इसके साथ अस्थायी कर्मचारियों को लेकर भी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। उनको किस तरह से वेतन दिया जाएगा। इसकी भी जानकारी नहीं दी जा रही है। उनको स्थायी कर्मचारी बनाने को लेकर योजना के बारे में भी जानकारी नहीं दी जा रही है। जब भी सरकार के साथ बैठक हो रही है, तो कर्मचारियों की बात को सुनने के बजाए सरकार के प्रतिनिधि केवल अपनी बात को ही रख रहे हैं और उसको ही मनाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकारी हमारी बात को सुनने केे तैयार नहीं है।
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सभी मांगों को पूरी तरह से नजर अंदाज किया जा रहा है। जिस तरह से अचानक सेना को ग्रिड स्टेशन सौंप दिए गए हैं, तो इससे तो सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। समझ नहीं आ रहा है कि सरकार करना क्या चाहती है। सेना को ग्रिड स्टेशन सौंपने से उनको कोई आपत्ति नहीं है। सरकार के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता है, तो हड़ताल जारी रहेगी।
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अनवर हुसैन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सुबह से दोपहर तक पीडीडी कार्यालय के बाहर धरना देकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय के कारण हजारों कर्मचारियों के पूरे परिवार का भविष्य खराब होने की कगार पर पहुंच गया है। कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा है कि उनके परिवारों का क्या होगा। सरकार ने बिना सोचे समझे ही यह निर्णय ले लिया है। निजीकरण को लेकर स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है।
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कर्मचारियों को नहीं बताया जा रहा है कि उनको किस तरह से वेतन दिया जाएगा। उल्टा उनसे कई तरह के लाभ वापस लिए जा रहे हैं। इसके साथ अस्थायी कर्मचारियों को लेकर भी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। उनको किस तरह से वेतन दिया जाएगा। इसकी भी जानकारी नहीं दी जा रही है। उनको स्थायी कर्मचारी बनाने को लेकर योजना के बारे में भी जानकारी नहीं दी जा रही है। जब भी सरकार के साथ बैठक हो रही है, तो कर्मचारियों की बात को सुनने के बजाए सरकार के प्रतिनिधि केवल अपनी बात को ही रख रहे हैं और उसको ही मनाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकारी हमारी बात को सुनने केे तैयार नहीं है।
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सभी मांगों को पूरी तरह से नजर अंदाज किया जा रहा है। जिस तरह से अचानक सेना को ग्रिड स्टेशन सौंप दिए गए हैं, तो इससे तो सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। समझ नहीं आ रहा है कि सरकार करना क्या चाहती है। सेना को ग्रिड स्टेशन सौंपने से उनको कोई आपत्ति नहीं है। सरकार के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता है, तो हड़ताल जारी रहेगी।