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35 एकड़ में लगाया जा रहा आलू का बीज
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चिनैनी। निमाटोड जैसे कीड़े आलू की पैदावार पर असर तो डाल रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके नत्थाटाप में पिछले वर्ष 21 एकड़ में करीब 532 क्विंटल आलू निकाला गया था। इस साल 35 एकड़ में आलू का बीज लगाया जा रहा है और लगभग 12 सौ क्विंटल आलू निकाले जाने का लक्ष्य है। निमाटोड जैसी बीमारी का खात्मा हो जाए तो बंपर आलू नत्थाटाप में पैदा हो सकेगा।
जम्मू संभाग के विकसित पर्यटन स्थल नत्थाटाप आलू फार्म में हर वर्ष कई क्विंटल आलू पैदा होता है जो किसानों तक पहुंचाया जाता है। नत्थाटाप में आलू के चार किस्म के बीज लगाए जाते हैं। कुफरी ज्योति, कुफरी हिमालयनी, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी गिरधारी जैसे बीज लगाए जाते है। इस वर्ष बारिश देरी से होने की वजह से इसे मई माह में लगाया जा रहा है जबकि इसे लगाने का समय अपैल में शुरू हो जाता है। आलू फार्म में पिछले कुछ वर्ष से निमाटोड कीड़े भी आलू की पैदावार पर असर डाल रहे है, जिसको लेकर विभाग वहां पर दवाई का छिड़काव कर निमाटोड बीमारी को कम करता है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यदि निमाटोड जैसी बीमारी न हो तो नत्थाटाप में 532 क्विंटल की जगह आठ सौ क्विंटल आलू की पैदावार होती। आलू फार्म मैनेजर अरशद नायक ने कहा कि मौसम ने साथ दिया तो 35 एकड़ में लगाए जा रहे आलू के बीज इस बार एक हजार से 12 सौ क्विंटल निकाले जाने की उम्मीद है।
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जम्मू संभाग के विकसित पर्यटन स्थल नत्थाटाप आलू फार्म में हर वर्ष कई क्विंटल आलू पैदा होता है जो किसानों तक पहुंचाया जाता है। नत्थाटाप में आलू के चार किस्म के बीज लगाए जाते हैं। कुफरी ज्योति, कुफरी हिमालयनी, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी गिरधारी जैसे बीज लगाए जाते है। इस वर्ष बारिश देरी से होने की वजह से इसे मई माह में लगाया जा रहा है जबकि इसे लगाने का समय अपैल में शुरू हो जाता है। आलू फार्म में पिछले कुछ वर्ष से निमाटोड कीड़े भी आलू की पैदावार पर असर डाल रहे है, जिसको लेकर विभाग वहां पर दवाई का छिड़काव कर निमाटोड बीमारी को कम करता है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यदि निमाटोड जैसी बीमारी न हो तो नत्थाटाप में 532 क्विंटल की जगह आठ सौ क्विंटल आलू की पैदावार होती। आलू फार्म मैनेजर अरशद नायक ने कहा कि मौसम ने साथ दिया तो 35 एकड़ में लगाए जा रहे आलू के बीज इस बार एक हजार से 12 सौ क्विंटल निकाले जाने की उम्मीद है।
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