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जम्मू-कश्मीर: डोडा में गर्भवती को पालकी से पहुंचाया अस्पताल, बर्फ में तीन किमी चलकर दुर्गम इलाका किया पार

Sun, 29 Jan 2023 12:14 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, डोडा
अमर उजाला नेटवर्क, डोडा Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sun, 29 Jan 2023 12:14 AM IST
सार

जेलाह ब्रिसवाना गांव की महिला को दिन में प्रसव पीड़ा हुई। जब परेशानी ज्यादा बढ़ी तो परिजन गांव के कुछ अन्य लोगों की सहायता लेकर डोली से महिला को अस्पताल पहुंचाया।

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Pregnant woman was taken hospital dolly, walked three km snow Doda
गर्भवती को अस्पताल ले जाते लोग - फोटो : संवाद

विस्तार

डोडा जिले के सुदूरवर्ती इलाके जेलाह ब्रिसवाना गांव में सड़क न होने के कारण गर्भवती को पालकी में रखकर अस्पताल पहुंचाया गया। गांव के आसपास काफी बर्फ भी जमा थी और रास्ता फिसलन भरा था। इस ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलकर ग्रामीणों ने महिला को तीन किमी तक पालकी में बैठकर सड़क तक पहुंचाया।

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उसके बाद जीएमसी डोडा तक ले गए। अस्पताल में महिला का सुरक्षित और सामान्य प्रसव किया गया। जेलाह ब्रिसवाना गांव की एक महिला को शुक्रवार दिन में प्रसव पीड़ा हुई। जब परेशानी ज्यादा बढ़ी तो परिजन गांव के कुछ अन्य लोगों की सहायता लेकर महिला को अस्पताल लेकर चल दिए।
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वे पहले महिला को गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए , जहां महिला को मदद नहीं मिली। पीएचसी में तैनात डॉक्टरों ने बताया कि उनके यहां प्रशिक्षित चिकित्सक और आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसलिए, यहां प्रसव नहीं हो सकता। तब लोग महिला को पालकी से ही तीन किमी तक पैदल चलकर सड़क तक ले गए। इसके बाद वाहन में बैठाकर जीएमसी डोडा ले गए।
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पालकी से तीन किमी तक तय किया रास्ता काफी जोखिम भरा था। रास्ते पर बर्फ के कारण फिसलन थी और ऊबड़-खाबड़ पत्थर थे। थारोट के सरपंच फहीम अहमद ने बताया कि गांव में जब भी कोई बीमार होता है, या किसी को कोई चिकित्सा सुविधा की जरूरत होती है तो मरीज को पालकी में बैठाकर ही ले जाना पड़ता है। यहां सड़क नहीं है।


इसकी मांग कई बार प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन कभी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि ब्रिसवाना गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी है, लेकिन लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। यहां डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है, और न ही यहां सुविधाएं उपलब्ध है। जब भी कोई बीमार होता है तो उसे जिला अस्पताल ही भेज दिया जाता है। लोगों ने प्रशासन से उनकी समस्याओं को सुनने की अपील की है।

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