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लाली बरियोत में मर्ज-ए-मोबाइल की दवा दूसरी पंचायत के पास
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उधमपुर/पंचैरी। आधुनिक समय मोंगरी तहसील में मोबाइल सिगनल नहीं है, जिस कारण ग्रामीण देश-दुनिया से कट गए हैं। न तो उन तक सरकार योजनाओं की जानकारी पहुंच पा रही है और न ही वह मौके पर अपनी समस्याओं को प्रशासन और संबंधित अधिकारी के समक्ष रख पा रहे हैं। बात करने के लिए ग्रामीणों को सात किलोमीटर कर सफर तय कर दूसरी पंचायत में जाना पड़ता है।
मोंगरी तहसील के लाली बरियोत पंचायत के ग्रामीण मोबाइल सिगनल को तरस रहे हैं। इनके पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए घर से करीब सात किलोमीटर दूर दूसरी पंचायत में जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार अधिकारियों और मंत्रियों को समस्या से अबगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई भी समाधान निकालने में विफल रहा है। जिले में लाली बरियोत एकमात्र ऐसी पंचायत है, जहां आज तक किसी ने कंपनी ने मोबाइल टाबर नहीं लगाया है। यहां तक की बीएसएनएल भी मोबाइल टावर नहीं है।
आधुनिक युग में सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल की है। लेकिन पंचायतवासी इस सुविधा से वंचित है। हर बार मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने को लेकर सिर्फ झूठे आश्वासन मिलते रहे हैं। लेकिन अब तक क्षेत्र में कोई भी मोबाइल टावर नहीं लग पाया है। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से तीन हजार से अधिक लोग परेशान है। ग्रामीण मोबाइल सिगनल, इंटरनेट और कालिंग भी सुविधा से भी अंजान हैं।
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- सागर सिंह, निवासी लाली
लोग घर बैठे देश दुनिया की खबर रखते हैं। लेकिन लाली पंचायत के ग्रामीणों तक इसकी जानकारी कई दिनों के बाद पहुंचती है। उनके पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए गांव से कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस कारण सरकारी सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। प्रशासन और सरकार की तरफ से उनकी परेशानी को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
- अक्षय कुमार, निवासी लाली
कोरोना संकट के कारण पूरे देश में ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से लाली पंचायत के बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से महरूम हैं। उनकी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। इसके बारे में ग्रामीण कई मंत्रियों और प्रशासन के अधिकारियों को बता चुके हैं। पंचायतवासी आज भी स्वयं को पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
- सुभाष सिंह, निवासी लाली
मोबाइल नेटवर्क सुविधा नहीं होने से सूचनाएं ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंचती है। प्रशासन के आदेश भी कई दिन बाद पहुंचते हैं। इससे शिक्षा विभाग सहित सभी सरकारी विभागों का काम प्रभावित हो रहा है। समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग को अवगत करवाया है। लेकिन आज तक कोई राहत नहीं मिली है। मोबाइल फोन के जरिए बात करने के लिए सात किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
- कश्मीर सिंह, सेवानिवृत्त हेडमास्टर
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मोंगरी तहसील के लाली बरियोत पंचायत के ग्रामीण मोबाइल सिगनल को तरस रहे हैं। इनके पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए घर से करीब सात किलोमीटर दूर दूसरी पंचायत में जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार अधिकारियों और मंत्रियों को समस्या से अबगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई भी समाधान निकालने में विफल रहा है। जिले में लाली बरियोत एकमात्र ऐसी पंचायत है, जहां आज तक किसी ने कंपनी ने मोबाइल टाबर नहीं लगाया है। यहां तक की बीएसएनएल भी मोबाइल टावर नहीं है।
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आधुनिक युग में सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल की है। लेकिन पंचायतवासी इस सुविधा से वंचित है। हर बार मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने को लेकर सिर्फ झूठे आश्वासन मिलते रहे हैं। लेकिन अब तक क्षेत्र में कोई भी मोबाइल टावर नहीं लग पाया है। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से तीन हजार से अधिक लोग परेशान है। ग्रामीण मोबाइल सिगनल, इंटरनेट और कालिंग भी सुविधा से भी अंजान हैं।
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- सागर सिंह, निवासी लाली
लोग घर बैठे देश दुनिया की खबर रखते हैं। लेकिन लाली पंचायत के ग्रामीणों तक इसकी जानकारी कई दिनों के बाद पहुंचती है। उनके पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन इनको चलाने के लिए गांव से कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस कारण सरकारी सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। प्रशासन और सरकार की तरफ से उनकी परेशानी को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
- अक्षय कुमार, निवासी लाली
कोरोना संकट के कारण पूरे देश में ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से लाली पंचायत के बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से महरूम हैं। उनकी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। इसके बारे में ग्रामीण कई मंत्रियों और प्रशासन के अधिकारियों को बता चुके हैं। पंचायतवासी आज भी स्वयं को पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
- सुभाष सिंह, निवासी लाली
मोबाइल नेटवर्क सुविधा नहीं होने से सूचनाएं ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंचती है। प्रशासन के आदेश भी कई दिन बाद पहुंचते हैं। इससे शिक्षा विभाग सहित सभी सरकारी विभागों का काम प्रभावित हो रहा है। समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग को अवगत करवाया है। लेकिन आज तक कोई राहत नहीं मिली है। मोबाइल फोन के जरिए बात करने के लिए सात किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
- कश्मीर सिंह, सेवानिवृत्त हेडमास्टर