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केंद्रीय जांच, ऑफलाइन पंजीकरण के लिए आंदोलन की दी चेतावनी
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ौरिदार संघर्ष कमेटी के सदस्य
- फोटो : KATRA
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कटड़ा। बारीदार संघर्ष कमेटी ने माता वैष्णो देवी भवन के पास भगदड़ मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने और ऑफलाइन यात्रा पंजीकरण बहाल करने के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी दी है।
कमेटी सदस्यों ने कहा कि भगदड़ की घटना प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। अब इस मामले को दबाने के लिए प्रदेश स्तर की कमेटी गठित की गई है। वहीं, ऑनलाइन पंजीकरण की अनिवार्यता से यात्रा को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, क्याेंकि ज्यादातर श्रद्धालुओं के पास ऑनलाइन पंजीकरण का माध्यम नहीं है। दोनों मांगाें को पूरा नहीं किया गया तो कमेटी स्थानीय लोगों को साथ लेकर आंदोलन करेगी।
कमेटी के प्रधान शाम सिंह व सदस्यों ने कहा कि श्राइन बोर्ड के सीईओ का कहना हैं कि एनजीटी के आदेशानुसार 50 हजार तक यात्री भेजने की अनुमित है। कोरोना काम में लगभग 45 हजार यात्री भवन जा सकते हैं। भगदड़ वाले दिन यात्रा मार्ग सहित भवन में एक लाख से ऊपर यात्री थे। अगर कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन चालान कर सकता है तो श्राइन बोर्ड की इतनी बड़ी गलती पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?
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दूसरी ओर उनका कहना है कि गठित की गई कमेटी में कुछ सदस्य श्राइन बोर्ड में रह चुके हैं। उपराज्यपाल खुद श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वह किस पर कार्यवाही करेंगे? इसलिए, मामले में केंद्र को हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय जांच कमेटी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। उधर, उपराज्यपाल ने यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य किया है। लेकिन, क्या हर यात्री पढ़ा लिखा होता है? या हर यात्री के पास बड़ा फोन होता है जिससे वह ऑनलाइन बुकिंग कर सके?
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भीड़ होने की स्थिति में दी जाती थी वेटिंग पर्ची
प्रधान का कहना है कि पहले भी भीड़ होने के बाद यात्री को वेटिंग पर्ची दी जाती थी, और यात्रा कटड़ा में ही रोक दी जाती थी। उपराज्यपाल को चाहिए कि भवन में जितने यात्री आ सकते हैं, उतने ही भेजे जाएं। जिससे हादसे होने की संभावना नहीं रहेगी। अगर ऐसा नहीं किया तो कमेटी उग्र प्रदर्शन करेगी। क्योंकि, यात्रियों की जिंदगी से दोबारा खिलवाड़ नहीं होने देंगे। इस मौके पर सदस्य कुलदीप सिंह, विशाल समोत्रा, सोहन दरोडा, मानव समोत्रा, रतन सिंह, आदि मौजूद रहे।
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कमेटी सदस्यों ने कहा कि भगदड़ की घटना प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। अब इस मामले को दबाने के लिए प्रदेश स्तर की कमेटी गठित की गई है। वहीं, ऑनलाइन पंजीकरण की अनिवार्यता से यात्रा को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, क्याेंकि ज्यादातर श्रद्धालुओं के पास ऑनलाइन पंजीकरण का माध्यम नहीं है। दोनों मांगाें को पूरा नहीं किया गया तो कमेटी स्थानीय लोगों को साथ लेकर आंदोलन करेगी।
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कमेटी के प्रधान शाम सिंह व सदस्यों ने कहा कि श्राइन बोर्ड के सीईओ का कहना हैं कि एनजीटी के आदेशानुसार 50 हजार तक यात्री भेजने की अनुमित है। कोरोना काम में लगभग 45 हजार यात्री भवन जा सकते हैं। भगदड़ वाले दिन यात्रा मार्ग सहित भवन में एक लाख से ऊपर यात्री थे। अगर कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन चालान कर सकता है तो श्राइन बोर्ड की इतनी बड़ी गलती पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?
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दूसरी ओर उनका कहना है कि गठित की गई कमेटी में कुछ सदस्य श्राइन बोर्ड में रह चुके हैं। उपराज्यपाल खुद श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वह किस पर कार्यवाही करेंगे? इसलिए, मामले में केंद्र को हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय जांच कमेटी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। उधर, उपराज्यपाल ने यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य किया है। लेकिन, क्या हर यात्री पढ़ा लिखा होता है? या हर यात्री के पास बड़ा फोन होता है जिससे वह ऑनलाइन बुकिंग कर सके?
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भीड़ होने की स्थिति में दी जाती थी वेटिंग पर्ची
प्रधान का कहना है कि पहले भी भीड़ होने के बाद यात्री को वेटिंग पर्ची दी जाती थी, और यात्रा कटड़ा में ही रोक दी जाती थी। उपराज्यपाल को चाहिए कि भवन में जितने यात्री आ सकते हैं, उतने ही भेजे जाएं। जिससे हादसे होने की संभावना नहीं रहेगी। अगर ऐसा नहीं किया तो कमेटी उग्र प्रदर्शन करेगी। क्योंकि, यात्रियों की जिंदगी से दोबारा खिलवाड़ नहीं होने देंगे। इस मौके पर सदस्य कुलदीप सिंह, विशाल समोत्रा, सोहन दरोडा, मानव समोत्रा, रतन सिंह, आदि मौजूद रहे।