{"_id":"67ec34cf5e5b400387064b64","slug":"mata-sharda-temple-at-mountain-udhampur-news-c-202-1-sjam1015-121908-2025-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: गंगेड़ा पहाड़ी पर एक पेड़ के तने में है शारदा माता का वास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: गंगेड़ा पहाड़ी पर एक पेड़ के तने में है शारदा माता का वास
विज्ञापन
उधमपुर। शहर के नजदीक गंगेडा पहाडी पर मौजूद शारदा माता का मंदिर।
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर से सटे गंगेड़ा पहाड़ी पर मां शारदा का अनूठा मंदिर शहरवासियों की आस्था का बड़ा केंद्र है। नवरात्र पर यहां हर साल हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मा शारदा यहां एक जामुन के पेड़ के खोखले तने में एक श्यामवर्ण की प्रतिमा के रूप में विराजमान हैं। इसी पेड़ के नीचे मंदिर बनाया गया है।
चीड़ के हरे-भरे वृक्षों के बीच मां शारदा का यह मंदिर श्रद्धालुओं को सहज ही आकर्षित करता है। मां शारदा का आशीर्वाद लेने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते यहां हैं। हर महीने माता रानी के इस दरबार में मासिक भंडारा और जागरण भी होता है। नवरात्रों के नौ दिन यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मुरादें पूरी करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता रानी अवश्य पूरी करती हैं।
चमत्कारिक रूप से रंग व भाव बदलती है प्रतिमा
मंदिर में मौजूद माता रानी की श्याम वर्ण की प्रतिमा यहां चमत्कारिक रूप से रंग और भाव बदलती है। सामान्य दिनों में मां की यह प्रतिमा दिन में दो बार तक अपने भाव बदलती है जबकि नवरात्र के दिनों में यह चमत्कार कई बार नजर आता है। जिस जामुन के पेड़ के तने में यह प्रतिमा स्थापित है, वह नीचे से सूखा हुआ है लेकिन ऊपर से एकदम हर भरा है। दो साल में एक बार इस पर फल भी लगते हैं। इस दौरान प्रतिमा का रंग भी जामुन के रंग के जैसा हो जाता है। भक्त इसे माता रानी का दैवीय चमत्कार मानते हैं।
विज्ञापन
शारदा माता की प्रतिमा का इतिहास
शारदा माता के संबंध में प्रचलित दंत कथा के मुताबिक इसका इतिहास काफी पुराना है। माना जाता है कि किसी प्राचीन समय में एक राजा कश्मीर में मां शारदा की इस प्रतिमा को स्थापित करने के लिए लेकर जा रहा था। रास्ते में गंगेड़ा पहाड़ी पर वह रात्रि विश्राम के लिए रुका। लेकिन अगली सुबह जब उसने इस प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया तो वह चाहकर भी इसे यहां से हिला तक नहीं पाया। इसके बाद राजा ने इसे माता रानी की इच्छा समझकर प्रतिमा को यहीं छोड़ दिया। सालों बाद जखैनी के एक स्थानीय निवासी गोपाल सड़ोत्रा को सपने में मां शारदा की यह प्रतिमा नजर आई और यहां मंदिर स्थल का संकेत मिला। अलगी सुबह गांववालों के साथ जब गोपाल दास स्वपन में नजर आए स्थान पर पहुंचे तो वहां एक जामुन के पेड़ के तने में माता रानी की यह प्रतिमा प्रकट हुई। यह देखकर गांव वाले अचंभित हो गए और तभी से माता रानी के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। वर्तमान समय से यहां एक भव्य मंदिर बनाया गया है।
शहर से पांच किमी दूरी पर मौजूद है मंदिर
शहर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दिव्य मंदिर श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक उर्जा से भर देता है। इस तक पहुंचने के लिए शहर से जखैनी होकर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब एक किलोमीटर आगे जाना पड़ता है। हाईवे के किनारे पर ही इसका प्रवेश द्वार बना है और यहां से मंदिर के लिए कच्चा चढ़ाई का रास्ता बना है। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के बाद भक्त माता रानी के इस दिव्य मंदिर में पहुंचते हैं। अब इस मंदिर के लिए सड़क बनाने की मंजूरी भी मिल चुकी है और उम्मीद है कि अगले साल तक मंदिर तक श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के वाहन लेकर पहुंच सकेंगे।
विज्ञापन
उधमपुर। शहर से सटे गंगेड़ा पहाड़ी पर मां शारदा का अनूठा मंदिर शहरवासियों की आस्था का बड़ा केंद्र है। नवरात्र पर यहां हर साल हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मा शारदा यहां एक जामुन के पेड़ के खोखले तने में एक श्यामवर्ण की प्रतिमा के रूप में विराजमान हैं। इसी पेड़ के नीचे मंदिर बनाया गया है।
चीड़ के हरे-भरे वृक्षों के बीच मां शारदा का यह मंदिर श्रद्धालुओं को सहज ही आकर्षित करता है। मां शारदा का आशीर्वाद लेने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते यहां हैं। हर महीने माता रानी के इस दरबार में मासिक भंडारा और जागरण भी होता है। नवरात्रों के नौ दिन यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मुरादें पूरी करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता रानी अवश्य पूरी करती हैं।
विज्ञापन
चमत्कारिक रूप से रंग व भाव बदलती है प्रतिमा
मंदिर में मौजूद माता रानी की श्याम वर्ण की प्रतिमा यहां चमत्कारिक रूप से रंग और भाव बदलती है। सामान्य दिनों में मां की यह प्रतिमा दिन में दो बार तक अपने भाव बदलती है जबकि नवरात्र के दिनों में यह चमत्कार कई बार नजर आता है। जिस जामुन के पेड़ के तने में यह प्रतिमा स्थापित है, वह नीचे से सूखा हुआ है लेकिन ऊपर से एकदम हर भरा है। दो साल में एक बार इस पर फल भी लगते हैं। इस दौरान प्रतिमा का रंग भी जामुन के रंग के जैसा हो जाता है। भक्त इसे माता रानी का दैवीय चमत्कार मानते हैं।
विज्ञापन
शारदा माता की प्रतिमा का इतिहास
शारदा माता के संबंध में प्रचलित दंत कथा के मुताबिक इसका इतिहास काफी पुराना है। माना जाता है कि किसी प्राचीन समय में एक राजा कश्मीर में मां शारदा की इस प्रतिमा को स्थापित करने के लिए लेकर जा रहा था। रास्ते में गंगेड़ा पहाड़ी पर वह रात्रि विश्राम के लिए रुका। लेकिन अगली सुबह जब उसने इस प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया तो वह चाहकर भी इसे यहां से हिला तक नहीं पाया। इसके बाद राजा ने इसे माता रानी की इच्छा समझकर प्रतिमा को यहीं छोड़ दिया। सालों बाद जखैनी के एक स्थानीय निवासी गोपाल सड़ोत्रा को सपने में मां शारदा की यह प्रतिमा नजर आई और यहां मंदिर स्थल का संकेत मिला। अलगी सुबह गांववालों के साथ जब गोपाल दास स्वपन में नजर आए स्थान पर पहुंचे तो वहां एक जामुन के पेड़ के तने में माता रानी की यह प्रतिमा प्रकट हुई। यह देखकर गांव वाले अचंभित हो गए और तभी से माता रानी के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। वर्तमान समय से यहां एक भव्य मंदिर बनाया गया है।
शहर से पांच किमी दूरी पर मौजूद है मंदिर
शहर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दिव्य मंदिर श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक उर्जा से भर देता है। इस तक पहुंचने के लिए शहर से जखैनी होकर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब एक किलोमीटर आगे जाना पड़ता है। हाईवे के किनारे पर ही इसका प्रवेश द्वार बना है और यहां से मंदिर के लिए कच्चा चढ़ाई का रास्ता बना है। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के बाद भक्त माता रानी के इस दिव्य मंदिर में पहुंचते हैं। अब इस मंदिर के लिए सड़क बनाने की मंजूरी भी मिल चुकी है और उम्मीद है कि अगले साल तक मंदिर तक श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के वाहन लेकर पहुंच सकेंगे।