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कपाट खुलते ही जयकारों से गूंजा मां मचैल का दरबार
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किश्तवाड़। जिले के प्रसिद्ध मचैल माता का मंदिर के कपाट रविवार को 10 दिन बाद फिर खुलते ही दरबार फिर से जयकारों से गूंजने लगा है। अब फिर से अनौपचारिक रूप से भक्तों का आना शुरू हो गया है। रविवार को मंदिर परिसर में हवन का आयोजन किया गया, जिसमें डीसी ने परिवार सहित शिरकत कर प्रदेश में अमन और कोरोना से मुक्ति की कामना की है।
गौरतलब रहे कि 15 जुलाई को मचैल माता का दरबार इलाके के अन्य मंदिरों की तरह दर्शन के लिए बंद हो गया था। मान्यता के अनुसार अनुसार हर साल श्रावण माह के सात दिनों में जिन्हें श्रावण सति के नाम से जाना जाता है पूरे पाडर में सभी मंदिर बंद हो जाते हैं। इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना भी नहीं होती है।
25 जुलाई को सुबह के समय मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खुलते ही जयकारे लगना शुरू हो गए। डीसी अशोक कुमार शर्मा ने मां के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद हवन में हिस्सा लिया। इस दौरान कोविड एसओपी का पूरा पालन किया गया। कोरोना के चलते इस बार इस बार भी मचैल यात्रा स्थगित कर दी गई है। 18 अगस्त को परंपरा के अनुसार जम्मू से माता की छड़ी रवाना होगी, जिसमें कुछ ही लोग शामिल होंगे। इक्का-दुक्का लोग दर्शन करने जा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें अनुमति लेनी होगी और कोविड एसओपी का सख्ती से पालन करना होगा।
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गौरतलब रहे कि 15 जुलाई को मचैल माता का दरबार इलाके के अन्य मंदिरों की तरह दर्शन के लिए बंद हो गया था। मान्यता के अनुसार अनुसार हर साल श्रावण माह के सात दिनों में जिन्हें श्रावण सति के नाम से जाना जाता है पूरे पाडर में सभी मंदिर बंद हो जाते हैं। इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना भी नहीं होती है।
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25 जुलाई को सुबह के समय मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खुलते ही जयकारे लगना शुरू हो गए। डीसी अशोक कुमार शर्मा ने मां के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद हवन में हिस्सा लिया। इस दौरान कोविड एसओपी का पूरा पालन किया गया। कोरोना के चलते इस बार इस बार भी मचैल यात्रा स्थगित कर दी गई है। 18 अगस्त को परंपरा के अनुसार जम्मू से माता की छड़ी रवाना होगी, जिसमें कुछ ही लोग शामिल होंगे। इक्का-दुक्का लोग दर्शन करने जा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें अनुमति लेनी होगी और कोविड एसओपी का सख्ती से पालन करना होगा।
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