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भूस्खलन में मारे गए दो बच्चों के पिता ने किया था पक्के मकान के लिए आवेदन
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उधमपुर। जिले के टिकरी ब्लॉक की समोल पंचायत में भूस्खलन से मारे गए दो बच्चों के पिता ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान के लिए बीते वर्ष आवेदन किया था। उसको मंजूरी भी मिल गई है। जल्द ही उसके मकान के निर्माण का नंबर आने वाला था। उससे पहले भूस्खलन ने उसके दो बच्चों की जान ले ली।
गौरतलब है कि शुक्रवार देर रात को जसाना गांव में पहाड़ पर भूस्खलन होने से मलबा गांव के कच्चे मकानों तक पहुंच गया। देखते ही देखते स्थानीय निवासी बिल्ला का कच्चा मकान मलबे में तब्दील हो गया, और कमरे में सो रहे दो बच्चे मलबे में दब गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया, और दोनों मासूमों को बाहर निकाला। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस हादसे का बड़ा कारण ग्रामीणों के पास पक्का मकान न होना भी था।
जिले में आज भी सैकड़ों ग्रामीण कच्चे मकानों में रह रहे हैं। आए दिन बारिश के दौरान कच्चे मकान गिरने के मामले सामने आते हैं। सैकड़ों ग्रामीणों ने पक्के मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर रखा है, लेकिन अभी तक इन ग्रामीणों का नंबर नहीं आया। समोल पंचायत के सरपंच प्रीतम सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत में करीब एक वर्ष पहले पीएमएवाई का सर्वे हुआ था। इस सर्वे में 171 परिवार सामने आए थे, जिनके पास कच्चे मकान हैं।
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उन्होंने बताया कि इन सभी ने पक्के मकान के लिए आवेदन किया था। इसमें बिल्ला भी शामिल है। इनमें से 10 घरों को बनाने की मंजूरी मिल चुकी है, और इनके काम भी चल रहे हैं। बाकी का नंबर बारी बारी से आ रहा है। कुछ महीने के बाद बिल्ला को भी पक्का मकान बनाने की मंजूरी मिलने वाली है। 171 में से करीब 70 घरों की जियो टैगिंग हो चुकी है। इनको जल्द मंजूरी मिल जाएगी। जिनकी जियो टैगिंग नहीं हुई है, उनको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
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गौरतलब है कि शुक्रवार देर रात को जसाना गांव में पहाड़ पर भूस्खलन होने से मलबा गांव के कच्चे मकानों तक पहुंच गया। देखते ही देखते स्थानीय निवासी बिल्ला का कच्चा मकान मलबे में तब्दील हो गया, और कमरे में सो रहे दो बच्चे मलबे में दब गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया, और दोनों मासूमों को बाहर निकाला। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस हादसे का बड़ा कारण ग्रामीणों के पास पक्का मकान न होना भी था।
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जिले में आज भी सैकड़ों ग्रामीण कच्चे मकानों में रह रहे हैं। आए दिन बारिश के दौरान कच्चे मकान गिरने के मामले सामने आते हैं। सैकड़ों ग्रामीणों ने पक्के मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर रखा है, लेकिन अभी तक इन ग्रामीणों का नंबर नहीं आया। समोल पंचायत के सरपंच प्रीतम सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत में करीब एक वर्ष पहले पीएमएवाई का सर्वे हुआ था। इस सर्वे में 171 परिवार सामने आए थे, जिनके पास कच्चे मकान हैं।
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उन्होंने बताया कि इन सभी ने पक्के मकान के लिए आवेदन किया था। इसमें बिल्ला भी शामिल है। इनमें से 10 घरों को बनाने की मंजूरी मिल चुकी है, और इनके काम भी चल रहे हैं। बाकी का नंबर बारी बारी से आ रहा है। कुछ महीने के बाद बिल्ला को भी पक्का मकान बनाने की मंजूरी मिलने वाली है। 171 में से करीब 70 घरों की जियो टैगिंग हो चुकी है। इनको जल्द मंजूरी मिल जाएगी। जिनकी जियो टैगिंग नहीं हुई है, उनको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।