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Udhampur News: 18 दिन बाद फिर से पटरी पर लौटी सफाई व्यवस्था, मिली राहत
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उधमपुर। पिछले 18 दिन से शहर में ठप हुई सफाई व्यवस्था वीरवार को फिर से वापस पटरी पर लौट आई है। उप मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सफाई कर्मचारियों ने बुधवार को अपनी हड़ताल पांच दिन के लिए स्थगित कर दी थी।
वीरवार सुबह सभी कर्मचारी अपने काम पर वापस लौट आए और शहर के प्रत्येक हिस्से में फैली गंदगी को हटाने में जुट गए। इससे शहरवासियों ने भी राहत की सांस ली और सरकार से उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा करने का कहा। वीरवार तड़के नगर परिषद के अधीन पड़ते 21 वार्डों के प्रत्येक गली मोहल्ले में सफाई व्यवस्था शुरू कर दी गई थी। इसके चलते लगभग 18 दिन बाद शहर की सड़कें, गली, मोहल्ले और चौक चौराहे साफ सुथरे नजर आ रहे थे, जबकि दो दिन पहले तहत प्रत्येक स्थान पर जगह-जगह गंदगी के ढेर और बदबू की समस्या से शहरवासियों सहित जिला मुख्यालय में आने वाले ग्रामीणों और अन्य यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा था। हालांकि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपनी काम छोड़ हड़ताल जरूर बंद कर दी लेकिन सरकार को पांच दिन का अल्टीमेटम भी दे डाला है। मांगें न पूरी होने पर पूरे संभाग में सफाई कर्मचारियों ने फिर से सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।
इस बारे में सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान डेविड संधू ने बताया कि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म कर वीरवार को सभी सफाई कर्मचारी काम पर लौट आए हैं लेकिन सरकार को उनकी मांगों को लेकर पांच दिन का समय दिया गया है। अगर इस दौरान कोई उचित निर्णय नहीं लिया जाता तो यूनियन के पदाधिकारियों की ओर से जो भी निर्णय लिया जाएगा। सभी सफाई कर्मी उसी के तहत आगे की कार्रवाई करेंगे।
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हक की मांग के साथ जनता के हित का भी रखें ध्यान
सरकार को अस्थायी कर्मचारियों के लिए बनाई गई नीति के तहत काम करना चाहिए और लंबे समय से काम कर रहे सभी अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करना चाहिए। ये वही लोग हैं, जो अपने स्वास्थ्य को खतरे में डालकर समाज को हर रोज गंदगी से मुक्ति दिलाते हैं।
-जतिंद्र बरमानी, अध्यक्ष व्यापार मंडल
शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जो हालात पैदा हुए थे, उससे आम आदमी के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा था। भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सरकार को भी जल्द ही कोई उचित निर्णय लेना चाहिए।
-सुरेश खजूरिया, बैडमिंटन खिलाड़ी
पिछले 18 दिनों तक चली हड़ताल की वजह से हर वर्ग प्रभावित हुआ है। सफाई व्यवस्था सुचारु होने से लोगों को काफी राहत मिली है। कर्मचारियों को भी चाहिए कि अपनी जायज मांगों को जरूर उठाएं लेकिन जनता के स्वास्थ्य को चुनौती या फिर किसी प्रकार की अव्यवस्था को पैदा न होने दें।
- अमित सलारिया, शहरवासी
किसी समस्या से निपटने के लिए बातचीत का रास्ता निकालना चाहिए। सरकार को भी सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर पहले से ही उचित कदम उठा लेने चाहिए थे। सरकार और कर्मचारियों के बीच फंसे मुद्दे के कारण आम जनता को बुरी तरह से प्रभावित होना पड़ा है।
- वरुण शर्मा, शहरवासी
कुछ देर के लिए फिर रुका था सफाई का काम
वीरवार को काम पर लौटे सफाई कर्मचारियों ने कुछ देर के लिए काम फिर से बंद कर दिया था। जैसे ही उन्हें पता चला कि नगर परिषद कार्यालय में कचरा फैलाने पर सीईओ ने उनके दो कर्मियों के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इस पर सभी कर्मचारी काम बंद करके सीईओ के कार्यालय पहुंच गए। वहां पर दोनों पक्षों में हुई बातचीत के बात समझौता होने पर सफाई कर्मी फिर से काम पर लौट गए।
फोटो सहित
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वीरवार सुबह सभी कर्मचारी अपने काम पर वापस लौट आए और शहर के प्रत्येक हिस्से में फैली गंदगी को हटाने में जुट गए। इससे शहरवासियों ने भी राहत की सांस ली और सरकार से उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा करने का कहा। वीरवार तड़के नगर परिषद के अधीन पड़ते 21 वार्डों के प्रत्येक गली मोहल्ले में सफाई व्यवस्था शुरू कर दी गई थी। इसके चलते लगभग 18 दिन बाद शहर की सड़कें, गली, मोहल्ले और चौक चौराहे साफ सुथरे नजर आ रहे थे, जबकि दो दिन पहले तहत प्रत्येक स्थान पर जगह-जगह गंदगी के ढेर और बदबू की समस्या से शहरवासियों सहित जिला मुख्यालय में आने वाले ग्रामीणों और अन्य यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा था। हालांकि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपनी काम छोड़ हड़ताल जरूर बंद कर दी लेकिन सरकार को पांच दिन का अल्टीमेटम भी दे डाला है। मांगें न पूरी होने पर पूरे संभाग में सफाई कर्मचारियों ने फिर से सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।
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इस बारे में सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान डेविड संधू ने बताया कि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म कर वीरवार को सभी सफाई कर्मचारी काम पर लौट आए हैं लेकिन सरकार को उनकी मांगों को लेकर पांच दिन का समय दिया गया है। अगर इस दौरान कोई उचित निर्णय नहीं लिया जाता तो यूनियन के पदाधिकारियों की ओर से जो भी निर्णय लिया जाएगा। सभी सफाई कर्मी उसी के तहत आगे की कार्रवाई करेंगे।
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हक की मांग के साथ जनता के हित का भी रखें ध्यान
सरकार को अस्थायी कर्मचारियों के लिए बनाई गई नीति के तहत काम करना चाहिए और लंबे समय से काम कर रहे सभी अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करना चाहिए। ये वही लोग हैं, जो अपने स्वास्थ्य को खतरे में डालकर समाज को हर रोज गंदगी से मुक्ति दिलाते हैं।
-जतिंद्र बरमानी, अध्यक्ष व्यापार मंडल
शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जो हालात पैदा हुए थे, उससे आम आदमी के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा था। भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सरकार को भी जल्द ही कोई उचित निर्णय लेना चाहिए।
-सुरेश खजूरिया, बैडमिंटन खिलाड़ी
पिछले 18 दिनों तक चली हड़ताल की वजह से हर वर्ग प्रभावित हुआ है। सफाई व्यवस्था सुचारु होने से लोगों को काफी राहत मिली है। कर्मचारियों को भी चाहिए कि अपनी जायज मांगों को जरूर उठाएं लेकिन जनता के स्वास्थ्य को चुनौती या फिर किसी प्रकार की अव्यवस्था को पैदा न होने दें।
- अमित सलारिया, शहरवासी
किसी समस्या से निपटने के लिए बातचीत का रास्ता निकालना चाहिए। सरकार को भी सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर पहले से ही उचित कदम उठा लेने चाहिए थे। सरकार और कर्मचारियों के बीच फंसे मुद्दे के कारण आम जनता को बुरी तरह से प्रभावित होना पड़ा है।
- वरुण शर्मा, शहरवासी
कुछ देर के लिए फिर रुका था सफाई का काम
वीरवार को काम पर लौटे सफाई कर्मचारियों ने कुछ देर के लिए काम फिर से बंद कर दिया था। जैसे ही उन्हें पता चला कि नगर परिषद कार्यालय में कचरा फैलाने पर सीईओ ने उनके दो कर्मियों के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। इस पर सभी कर्मचारी काम बंद करके सीईओ के कार्यालय पहुंच गए। वहां पर दोनों पक्षों में हुई बातचीत के बात समझौता होने पर सफाई कर्मी फिर से काम पर लौट गए।
फोटो सहित