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एक घंटे तक भगवान शिव के घुटने पर पड़ीं सूर्य की किरणें
ब्यूरो/अमर उजाला, चिनैनी
Updated Fri, 15 Jan 2016 01:07 AM IST
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चिनैनी तहसील के गांव धनास में स्थित बाबा बूढ़ा केदारनाथ भगवान शिव के प्राचीन मंदिर यानी गुफा के अंदर इस बार मकर संक्रांति पर एक घंटे तक सूर्य की किरणें भगवान शिव के घुटने पर पड़ती रही। इन दुर्लभ किरणों की दर्शन करने के लिए सुबह साढे़ नौ बजे से साढ़े दस बजे तक लोगों का हुजूम उमड़ा रहा।
दरअसल, गुफा के अंदर किसी भी तरह से सूर्य की रोशनी पहुंचा संभव नहीं होता है। लेकिन साल में एक दिन मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें कुछ देर के लिए भगवान के प्राकृतिक घुटने पर पड़ती हैं।
इस लिए यह दिन यहां के लिए और भी ज्यादा खास माना जाता है। लोग इन किरणों की दर्शन करने का इंतजार करते रहते हैं।
वीरवार को भी सुबह साढ़े नौ से सुबह साढे़ दस बजे तक सूर्य किरणें भगवान शिव के घुटने पर पड़ती रही, जिसके दर्शन गांव के सैकड़ों लोगों ने किए।
सूर्य किरणें अंदर कैसे पहुंचतीं हैं, यह रहस्य आज तक बरकरार है। इन किरणों का दर्शन करना भग्य की बात मानी जाती है।
मंदिर के 70 वर्षीय पुजारी तेज राम ने बताया कि उन्होंने 40 साल से लगातार मकर संक्रांति पर इस रहस्यमय किरण को देखते आ रहे हैं।
इस बार भी उन्होंने ने ही नहीं बल्कि गांव के सैकड़ों लोगों ने इन किरणों के दर्शन किए। उनका कहना था कि मंदिर के अंदर गुफा में रोशनी नहीं है। प्राकृतिक रूप से दिन में भी बल्ब जलाया जाता है। मात्र एक दिन गुफा में सूर्य की किरणें पहुंचना चमत्कार से कम नहीं है।
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दरअसल, गुफा के अंदर किसी भी तरह से सूर्य की रोशनी पहुंचा संभव नहीं होता है। लेकिन साल में एक दिन मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें कुछ देर के लिए भगवान के प्राकृतिक घुटने पर पड़ती हैं।
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इस लिए यह दिन यहां के लिए और भी ज्यादा खास माना जाता है। लोग इन किरणों की दर्शन करने का इंतजार करते रहते हैं।
वीरवार को भी सुबह साढ़े नौ से सुबह साढे़ दस बजे तक सूर्य किरणें भगवान शिव के घुटने पर पड़ती रही, जिसके दर्शन गांव के सैकड़ों लोगों ने किए।
सूर्य किरणें अंदर कैसे पहुंचतीं हैं, यह रहस्य आज तक बरकरार है। इन किरणों का दर्शन करना भग्य की बात मानी जाती है।
मंदिर के 70 वर्षीय पुजारी तेज राम ने बताया कि उन्होंने 40 साल से लगातार मकर संक्रांति पर इस रहस्यमय किरण को देखते आ रहे हैं।
इस बार भी उन्होंने ने ही नहीं बल्कि गांव के सैकड़ों लोगों ने इन किरणों के दर्शन किए। उनका कहना था कि मंदिर के अंदर गुफा में रोशनी नहीं है। प्राकृतिक रूप से दिन में भी बल्ब जलाया जाता है। मात्र एक दिन गुफा में सूर्य की किरणें पहुंचना चमत्कार से कम नहीं है।
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