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मचैल गांव को मार्च में मिलेगी बिजली
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किश्तवाड़। जिले के उपमंडल पाडर के दूरदराज मचैल में छठे माह के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पाई है। स्थानीय लोग पुराने समय की तरह धीनी (मशाल) जलाकर रोशनी करने को मजबूर हैं। सरकार, प्रशासन और पीडीडी विभाग के प्रति लोगों में भारी रोष है, परंतु इंतजार के अलावा कुछ कर नहीं पा रहे हैं। अब, मार्च 2022 में बिजली बहाल होने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि 27 जुलाई को चिशोती और कुंडेल गांव के बीच बादल फटने से लगभग तीन से चार किलोमीटर तक बिजली खंबे व तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। सभी सामान नदी में समा गया था, जिसके बाद कुंडेल से लेकर मचैल गांव तक लगभग 51 घरों की बिजली चली गई। इतना समय बीतने के बाद भी उन्हें बिजली नहीं मिल पाई, क्योंकि बिजली विभाग इसे ठीक करने में सक्षम नहीं था। इसमें लगभग 55 से 60 लाख रुपये की लागत लग सकती है।
मचैल निवासी राजू, संजीव, रंगेल सिंह, संसार चंद, आदि ने प्रशासन और विभाग से गुहार लगाई है कि शीघ्र बिजली बहाल की जाए। इस लाइन से चिशोती, हमूरी और मचैल के सभी 512 घर अंधेरे में हैं। कुछ घरों में सोलर लाइट हैं। बाकी सभी धीनी जलाकर रोशनी करते हैं। मोबाइल, आदि चार्ज करने के लिए बिजली आवश्यक है। इस कोरोना महामारी के बीच बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन नहीं हो पा रही है। कई बार उपायुक्त को इस बारे में अनुरोध किया है। इसके अलावा उपराज्यपाल तक गुहार लगाई है। परंतु, छह माह बीतने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पाई।
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कुंडेल गांव में बिजली बहाल कर दी थी, परंतु वहां से आगे लगभग चार किलोमीटर तक भारी नुकसान हो गया है। बादल फटने से पूरी लाइन ध्वस्त है। मौके का जायजा लिया और एक वीडियो बनाकर उच्चाधिकारियों को भी भेजा गया। इस वीडियो को देखने के बाद विभाग के एमडी ने आश्वस्त किया है कि शीघ्र ही पूरा खर्चा जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए 55 से 60 लाख रुपये का फंड मांगा है। उम्मीद है कि वह जल्द जारी हो जाएगा, और मौसम ठीक रहा तो फरवरी में इस पर काम आरंभ कर देंगे। मार्च में बिजली बहाल हो जाएगी। कुछ सामान पहले ही मिल गया है। उपायुक्त ने भी हामी भर दी है।
- शेख अल्ताफ हुसैन, एक्सईएन, पीडीडी किश्तवाड़
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गौरतलब है कि 27 जुलाई को चिशोती और कुंडेल गांव के बीच बादल फटने से लगभग तीन से चार किलोमीटर तक बिजली खंबे व तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। सभी सामान नदी में समा गया था, जिसके बाद कुंडेल से लेकर मचैल गांव तक लगभग 51 घरों की बिजली चली गई। इतना समय बीतने के बाद भी उन्हें बिजली नहीं मिल पाई, क्योंकि बिजली विभाग इसे ठीक करने में सक्षम नहीं था। इसमें लगभग 55 से 60 लाख रुपये की लागत लग सकती है।
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मचैल निवासी राजू, संजीव, रंगेल सिंह, संसार चंद, आदि ने प्रशासन और विभाग से गुहार लगाई है कि शीघ्र बिजली बहाल की जाए। इस लाइन से चिशोती, हमूरी और मचैल के सभी 512 घर अंधेरे में हैं। कुछ घरों में सोलर लाइट हैं। बाकी सभी धीनी जलाकर रोशनी करते हैं। मोबाइल, आदि चार्ज करने के लिए बिजली आवश्यक है। इस कोरोना महामारी के बीच बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन नहीं हो पा रही है। कई बार उपायुक्त को इस बारे में अनुरोध किया है। इसके अलावा उपराज्यपाल तक गुहार लगाई है। परंतु, छह माह बीतने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पाई।
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कुंडेल गांव में बिजली बहाल कर दी थी, परंतु वहां से आगे लगभग चार किलोमीटर तक भारी नुकसान हो गया है। बादल फटने से पूरी लाइन ध्वस्त है। मौके का जायजा लिया और एक वीडियो बनाकर उच्चाधिकारियों को भी भेजा गया। इस वीडियो को देखने के बाद विभाग के एमडी ने आश्वस्त किया है कि शीघ्र ही पूरा खर्चा जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए 55 से 60 लाख रुपये का फंड मांगा है। उम्मीद है कि वह जल्द जारी हो जाएगा, और मौसम ठीक रहा तो फरवरी में इस पर काम आरंभ कर देंगे। मार्च में बिजली बहाल हो जाएगी। कुछ सामान पहले ही मिल गया है। उपायुक्त ने भी हामी भर दी है।
- शेख अल्ताफ हुसैन, एक्सईएन, पीडीडी किश्तवाड़