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Udhampur News: सीएमओ ने मृत्यु के बाद आंखें दान करने का लिया संकल्प
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डोडा। 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर सरकारी एएनएमटी स्कूल डोडा में नेत्रदान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्टाफ को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी डोडा डॉ. विनोद शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर जीएमसी डोडा के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. फारूक रोन्याल, एएनएमटी स्कूल की प्रिंसिपल तथा सीएमओ कार्यालय के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
डॉ. फारूक रोन्याल ने विद्यार्थियों और स्टाफ को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए लोगों से मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के माध्यम से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित लोगों को दोबारा दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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इस अवसर पर डॉ. विनोद शर्मा ने स्वयं मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान मानवता की सेवा का एक महान माध्यम है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी ला सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों, स्टाफ और आम लोगों से नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इस नेक कार्य के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों से अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय के बीच नेत्रदान के महत्व का संदेश पहुंचाने और अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने ज़िले में नेत्र स्वास्थ्य और दृष्टि संबंधी सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संवाद
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कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी डोडा डॉ. विनोद शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर जीएमसी डोडा के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. फारूक रोन्याल, एएनएमटी स्कूल की प्रिंसिपल तथा सीएमओ कार्यालय के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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डॉ. फारूक रोन्याल ने विद्यार्थियों और स्टाफ को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए लोगों से मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के माध्यम से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित लोगों को दोबारा दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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इस अवसर पर डॉ. विनोद शर्मा ने स्वयं मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान मानवता की सेवा का एक महान माध्यम है, जिसके जरिए व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी ला सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों, स्टाफ और आम लोगों से नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इस नेक कार्य के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों से अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय के बीच नेत्रदान के महत्व का संदेश पहुंचाने और अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने ज़िले में नेत्र स्वास्थ्य और दृष्टि संबंधी सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संवाद